West Bengal Politics News: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी की पार्टी TMC और राष्ट्रपति भवन के बीच एक नया सियासी विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन बार TMC के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किया है। इसके पीछे 7 मार्च के आदिवासी सम्मेलन विवाद की बड़ी भूमिका मानी जा रही है।
दिल्ली में TMC और राष्ट्रपति भवन के बीच ‘लेटर वॉर’
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसी के साथ राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। लेकिन इस बार की एक बड़ी सियासी लड़ाई दिल्ली के गलियारों में लड़ी जा रही है और यह लड़ाई है TMC और राष्ट्रपति भवन के बीच।
ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पिछले कई हफ्तों से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय माँग रही है। TMC का कहना है कि वह राष्ट्रपति को बंगाल सरकार की जनकल्याण योजनाओं और समावेशी विकास की रिपोर्ट सौंपना चाहती है। लेकिन राष्ट्रपति भवन की तरफ से हर बार एक ही जवाब आता है समय की कमी के कारण मुलाकात संभव नहीं।
तीन बार हुआ इनकार, जानें पूरी टाइमलाइन

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 9 मार्च 2026 को हुई जब TMC ने पहली बार राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मुलाकात का समय माँगा। लेकिन 11 मार्च को राष्ट्रपति भवन से जवाब आया कि समय की कमी के कारण मुलाकात संभव नहीं है। इसके बाद TMC ने हिम्मत नहीं हारी और दोबारा 16 से 20 मार्च के बीच किसी भी दिन मिलने का समय माँगा। लेकिन 22 मार्च को एक बार फिर राष्ट्रपति भवन से वही जवाब आया समयाभाव के कारण मुलाकात नहीं हो सकती। इसके बाद सोमवार 23 मार्च को TMC ने तीसरी बार पत्र भेजा और इस बार 24 मार्च से 2 अप्रैल के बीच किसी भी दिन मिलने की गुहार लगाई। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या इस बार राष्ट्रपति भवन दरवाजा खोलेगा या नहीं।
West Bengal Politics News: सिर्फ व्यस्तता है या कोई और वजह?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति भवन की तरफ से यह बार-बार इनकार महज व्यस्तता की वजह से नहीं है। इसके पीछे 7 मार्च को हुई एक बड़ी घटना की छाया है। 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के दौरे पर थीं। वहाँ संताल समुदाय का एक सम्मेलन आयोजित था जिसमें राष्ट्रपति को शामिल होना था। लेकिन इस सम्मेलन का आयोजन स्थल अचानक बदल दिया गया। इस बदलाव से राष्ट्रपति बेहद नाराज हुईं।
लेकिन इससे भी बड़ी बात यह थी कि राष्ट्रपति की इस बंगाल यात्रा के दौरान न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहाँ मौजूद थीं और न ही राज्य सरकार का कोई कैबिनेट मंत्री। यह बेहद असामान्य और प्रोटोकॉल के खिलाफ था। राष्ट्रपति इस व्यवहार से आहत हुईं। राजनीतिक गलियारों में यही माना जा रहा है कि अब TMC को मिलने का समय न देना उसी नाराजगी का नतीजा है।
ममता का पलटवार: BJP के इशारे पर बोलती हैं राष्ट्रपति’
जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल यात्रा के दौरान अपनी नाराजगी जताई तो ममता बनर्जी ने इस पर बेहद तीखा पलटवार किया। ममता ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ‘BJP के इशारे पर’ बोल रही हैं। TMC की सुप्रीमो ने मणिपुर हिंसा पर राष्ट्रपति की चुप्पी का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब मणिपुर जल रहा था तब राष्ट्रपति चुप क्यों रहीं? इसके अलावा SIR यानी Special Intensive Revision की प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर भी ममता ने राष्ट्रपति की चुप्पी को निशाने पर लिया। यह बयान बेहद विवादास्पद रहा क्योंकि राष्ट्रपति एक संवैधानिक पद पर हैं और उन पर सीधे आरोप लगाना कई लोगों को अनुचित लगा।
PM मोदी और BJP का पलटवार: आदिवासी राष्ट्रपति का अपमान
इस पूरे विवाद ने चुनावी रंग ले लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने TMC के इस व्यवहार को ‘शर्मनाक और अप्रत्याशित’ करार दिया। उन्होंने कहा कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति का इस तरह अपमान करना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।
BJP ने इस मामले को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। पार्टी का आरोप है कि ममता बनर्जी की सरकार ने एक आदिवासी राष्ट्रपति के साथ जो व्यवहार किया वह सभी मर्यादाओं को लाँघता है। BJP ने यह भी कहा कि ममता सरकार की यह हरकत आदिवासी समाज का अपमान है। बंगाल में आदिवासी और जनजातीय आबादी की भी एक बड़ी संख्या है और BJP का मानना है कि इस मुद्दे से वह इस वर्ग के वोटरों को TMC के खिलाफ गोलबंद कर सकती है।
TMC क्यों चाहती है राष्ट्रपति से मिलना?
अब सवाल यह उठता है कि TMC आखिर राष्ट्रपति से मिलना इतना जरूरी क्यों समझ रही है। दरअसल TMC इस मुलाकात के जरिए कई काम करना चाहती है। पहला- बंगाल सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड राष्ट्रपति को सौंपकर यह संदेश देना कि सरकार का काम बेहद अच्छा है। दूसरा- SIR प्रक्रिया में नाम हटाए जाने का मुद्दा राष्ट्रपति के सामने रखना ताकि इस पर ध्यान खींचा जा सके। तीसरा- चुनाव से पहले यह दिखाना कि TMC संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करती है। लेकिन राष्ट्रपति भवन के लगातार इनकार से TMC की यह रणनीति फिलहाल काम नहीं कर रही।
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