West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बीच सप्लीमेंटरी वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य के कैबिनेट मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम रब्बानी का नाम इस लिस्ट में नहीं है। यही नहीं, हासन सीट से तृणमूल उम्मीदवार काजल शेख का नाम भी सूची से गायब है। इस मामले ने पूरे राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और चुनाव आयोग पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
मंत्री रब्बानी का नाम लिस्ट से गायब, खुद ढूंढते रह गए
गुलाम रब्बानी ग्वालपोखर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार हैं और साथ ही राज्य सरकार में मंत्री भी हैं। उन्होंने खुद बताया कि जब वो अपना नाम पार्ट नंबर 60 और सीरियल नंबर 83 में खोजने गए, तो वहां उनका नाम था ही नहीं। एक मंत्री और उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट में न होना, यह किसी के लिए भी हैरान करने वाली बात है।
रब्बानी ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने सभी जरूरी कागजात जमा किए थे, जिनमें स्कूल का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, आधार कार्ड और वोटर आईडी तक शामिल थे। इसके बावजूद उनका नाम सूची में नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने सारे दस्तावेज देने के बाद भी नाम नहीं जुड़ता, तो आम आदमी का क्या होगा जिसके पास इतने कागज भी नहीं होते?
ग्वालपोखर में 78 हजार आवेदन अटके, पूरे राज्य में 60 लाख का मामला

मंत्री रब्बानी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ उनकी निजी समस्या नहीं है। उनके मुताबिक, केवल ग्वालपोखर विधानसभा क्षेत्र में ही करीब 78 हजार आवेदन अभी तक लंबित पड़े हैं। पूरे जिले में यह संख्या लगभग 4 लाख 80 हजार बताई जा रही है। अगर पूरे पश्चिम बंगाल की बात करें तो यह आंकड़ा करीब 60 लाख तक पहुंचता है।
यह बेहद गंभीर मामला है क्योंकि जिन लोगों ने अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया, दस्तावेज जमा किए और लंबा इंतजार किया, उनमें से लाखों का नाम अभी भी वोटर लिस्ट में नहीं आया है। जब चुनाव नजदीक हो और नामांकन की तारीखें सामने हों, तब इस तरह की देरी सीधे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर डालती है।
ट्रिब्यूनल का रास्ता आम आदमी के लिए आसान नहीं
रब्बानी ने यह भी कहा कि जिन लोगों का नाम लिस्ट में नहीं आया है, उनके पास ट्रिब्यूनल जाने का विकल्प तो है, लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं है। एक आम मतदाता के लिए ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया समझना और उसमें जाना दोनों ही मुश्किल काम हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को वो चुनाव आयोग और बीजेपी की सोची-समझी साजिश मान रहे हैं, जिसका मकसद तृणमूल के वोटरों को मतदान से रोकना है। बीजेपी ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
काजल शेख का नाम भी नहीं, पार्टी के सामने उम्मीदवार बदलने की नौबत?
इस विवाद में एक और नाम जुड़ गया है। हासन सीट से तृणमूल उम्मीदवार काजल शेख का नाम भी सप्लीमेंटरी वोटर लिस्ट में नहीं है। यह इसलिए और बड़ी चिंता बन गई है क्योंकि 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है और नामांकन की आखिरी तारीख 9 अप्रैल है।
चुनाव नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति उस विधानसभा क्षेत्र का मतदाता नहीं है, वो वहां से चुनाव नहीं लड़ सकता। ऐसे में अगर काजल शेख का नाम समय पर वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ा, तो तृणमूल कांग्रेस को अपना उम्मीदवार बदलने तक की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
90 साल की मां को भी बुलाया गया सुनवाई के लिए
सूत्रों के अनुसार, काजल शेख को और उनकी 90 वर्ष से अधिक उम्र की मां को भी एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की सुनवाई के लिए बुलाया गया था। दोनों गए, सभी दस्तावेज जमा किए, लेकिन पहले नाम ‘पेंडिंग’ की सूची में डाल दिया गया और अब सप्लीमेंटरी लिस्ट में भी नाम नहीं आया।
एक बुजुर्ग महिला को इस तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़े और फिर भी नतीजा कुछ न निकले, यह मामला संवेदनशीलता की दृष्टि से भी काफी गंभीर है। काजल शेख को अभी उम्मीद है कि अगली सूची में उनका नाम जरूर आएगा, लेकिन वक्त तेजी से कम होता जा रहा है।
तृणमूल ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
इस पूरे विवाद के बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि जब उम्मीदवार खुद वोटर लिस्ट में नहीं हैं, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि आम जनता के लाखों आवेदन क्यों अटके हुए हैं। पार्टी ने यह भी मांग की है कि बकाया सभी आवेदनों को जल्द से जल्द प्रोसेस किया जाए और लोगों को उनका मतदान का अधिकार मिले।
सप्लीमेंटरी वोटर लिस्ट वो सूची होती है जो मुख्य मतदाता सूची के बाद जारी की जाती है और जिसमें नए नाम जोड़े जाते हैं। यह उन लोगों के लिए आखिरी मौका होती है जो किसी कारण मुख्य सूची में शामिल नहीं हो पाए। अगर किसी का नाम इसमें भी नहीं आता, तो वो मतदान नहीं कर सकता। यही कारण है कि इस लिस्ट का समय पर और सही तरीके से जारी होना बेहद जरूरी माना जाता है।
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