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Arvind Kejriwal Targets Amit Shah: राम मंदिर चंदा चोरी पर केजरीवाल का बीजेपी पर बड़ा हमला, अमित शाह से पूछे तीखे सवाल

Arvind Kejriwal Targets Amit Shah: अयोध्या स्थित राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले चढ़ावे में कथित चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर सीधा और कड़ा प्रहार किया है। केजरीवाल ने दावा किया कि भाजपा केवल वोट लेने के लिए श्रीराम का नाम इस्तेमाल करती है, लेकिन हकीकत में उनके मन में भगवान के प्रति कोई श्रद्धा नहीं है। इस बयान के बाद देश की सियासत में एक बार फिर मंदिर और आस्था के नाम पर बहस छिड़ गई है।

Arvind Kejriwal Targets Amit Shah, आस्था बनाम राजनीति, केजरीवाल का आरोप

अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से देशभर के करोड़ों सनातनी और राम भक्त आहत हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि ये लोग वास्तव में भगवान श्रीराम को अपना आराध्य मानते, तो चढ़ावे की चोरी करते वक्त उनके हाथ कांपते। उन्होंने कहा कि चढ़ावे की चोरी यह साबित करने के लिए काफी है कि इन लोगों के मन में श्रीराम के प्रति कोई भय या श्रद्धा नहीं है। भगवान सर्वव्यापी हैं और सब कुछ देख रहे हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए की गई यह हरकत उनकी मानसिकता को दर्शाती है।

अमित शाह पर सीधे निशाना और पांच सवाल

केजरीवाल ने अपनी बात रखते हुए गृहमंत्री अमित शाह के सामने पांच बड़े सवाल रखे। उन्होंने कहा कि ये सवाल केवल उनके नहीं, बल्कि देश की जनता के हैं जो अमित शाह से जवाब चाहती है। केजरीवाल ने पूछा कि आखिर अमित शाह राम मंदिर क्यों नहीं गए? क्या उनका मन भगवान राम के दर्शन करने का नहीं करता? क्या उन्हें भगवान राम का आशीर्वाद नहीं चाहिए? और क्या वे सच में श्रीराम को भगवान मानते हैं?

केजरीवाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जून 2024 को हुई थी। इस बात को ढाई साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री एक बार भी रामलला के चरणों में मत्था टेकने नहीं पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि इन 891 दिनों के दौरान अमित शाह ने अपने भाषणों और इंटरव्यू में 42 से ज्यादा बार राम मंदिर का जिक्र किया है। केजरीवाल का आरोप है कि भाजपा के पास राम के नाम पर वोट मांगने का समय तो है, लेकिन मंदिर जाकर आशीर्वाद लेने का वक्त नहीं है।

क्या है राम मंदिर दान चोरी का मामला?

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह मामला तब सामने आया जब मंदिर प्रशासन को दान पेटियों और चढ़ावे में गड़बड़ी की भनक लगी। पुलिस पूछताछ में एक आरोपी ने चौंकाने वाला दावा किया कि चढ़ावे की रकम को शौचालयों तक में छिपाया जाता था। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद से ही मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठने लगे थे, जिसका फायदा उठाते हुए विपक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।

मंदिर की सुरक्षा और वहां होने वाले दान की पवित्रता को लेकर भक्त पहले से ही संवेदनशील रहते हैं। ऐसे में दान में चोरी की खबर ने जनभावनाओं को गहरा धक्का पहुंचाया है। प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले की हर पहलू से जांच कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष लगातार उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहा है।

Arvind Kejriwal Targets Amit Shah: इस बयान का क्या होगा असर?

सियासी जानकारों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल का यह बयान भाजपा के उस आधार को चुनौती देने की कोशिश है जिस पर वे लंबे समय से अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा का एकाधिकार माना जाता रहा है, लेकिन अब विपक्षी दल इसे ‘श्रद्धा बनाम राजनीति’ के रूप में पेश कर रहे हैं। केजरीवाल का यह रुख आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक हो सकता है।

दूसरी तरफ, भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी के नेता अक्सर ऐसे बयानों को ‘हताशा में दिया गया बयान’ करार देते रहे हैं। मंदिर प्रशासन और सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वे इस मामले को कैसे सुलझाते हैं ताकि भक्तों की आस्था पर कोई आंच न आए।

Arvind Kejriwal Targets Amit Shah: क्या सियासत से ऊपर उठ पाएगी आस्था?

राम मंदिर जैसा विषय करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसे राजनीति से अलग रखकर देखना ही मर्यादा के अनुकूल है। चढ़ावे की चोरी का मामला गंभीर है और इस पर कानून अपना काम करेगा, लेकिन मंदिर की शुचिता बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में धार्मिक स्थलों की व्यवस्था पर राजनीतिक बहस और तेज होगी।

यह देश की जनता को तय करना है कि वे इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देखती है। क्या दान में चोरी का मामला वाकई कोई बड़ा घोटाला है या केवल प्रशासनिक लापरवाही? इसका जवाब तो जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। तब तक, राम भक्त यही उम्मीद करेंगे कि मंदिर की गरिमा बनी रहे और आस्था का सम्मान सुरक्षित रहे।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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