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बिहार के 5.87 लाख शिक्षकों के लिए बड़ा फैसला, प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण अब अनिवार्य

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 5.87 लाख शिक्षकों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी शिक्षकों को प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत इस प्रशिक्षण की पूरी कार्य योजना तैयार कर ली है। यह फैसला शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।

कितने स्कूलों और शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण

Bihar News: A Teacher is Teaching in Classroom
Bihar News: A Teacher is Teaching in Classroom

बिहार में प्रारंभिक स्तर के 71,863 स्कूल और माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर के 9,360 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन सभी स्कूलों में कुल 5.87 लाख शिक्षक पढ़ाने का काम करते हैं। शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को साल में दो बार 50-50 घंटे का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में तीन मुख्य बातों पर जोर दिया जाएगा। पहला, शिक्षण कार्य में गुणवत्ता बढ़ाना। दूसरा, समावेशिता को बढ़ावा देना। तीसरा, छात्र-छात्राओं की सीखने की प्रक्रिया में सुधार लाना। विभाग का मानना है कि अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हो गए हैं।

छात्र-शिक्षक अनुपात में ऐतिहासिक सुधार

बिहार में छात्र-शिक्षक अनुपात में बीते वर्षों में शानदार सुधार हुआ है। वर्ष 2005 में 65 छात्रों पर सिर्फ एक शिक्षक हुआ करते थे। लेकिन 2026 में यह अनुपात घटकर 29 छात्रों पर एक शिक्षक हो गया है। शिक्षा विभाग इसे ऐतिहासिक बदलाव मानता है।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अनुपात और बेहतर होगा। इस साल शिक्षकों की जो नई नियुक्तियां होने वाली हैं, उनके बाद स्थिति और सुधरेगी। अब जब पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हो गए हैं, तो उनकी योग्यता बढ़ाना और बेहतर प्रशिक्षण देना जरूरी हो गया है।

प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की होगी शुरुआत

नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को जरूरी सामग्री तैयार करने का निर्देश दे दिया है।

डायट के माध्यम से मिलेगा प्रशिक्षण

सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) को भी प्रशिक्षण की तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार से प्रशिक्षण मद में 63.20 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह राशि शिक्षकों की ट्रेनिंग पर खर्च होगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया प्रशिक्षण का महत्व

बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने इस फैसले को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि साल में दो बार शिक्षकों को डायट के माध्यम से प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। डायट शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जिला स्तर पर काम करने वाला एक महत्वपूर्ण सरकारी संस्थान है।

टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा

शिक्षा मंत्री के मुताबिक यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद करेगा। प्रशिक्षण के बाद सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग की व्यवस्था लागू होगी। साथ ही, सभी स्कूलों में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाएगा।

एआई और साइबर सुरक्षा का भी मिलेगा प्रशिक्षण

बिहार के शिक्षकों को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग और साइबर ठगी से बचाव के तरीके भी सिखाए जाएंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत हर शिक्षक को एआई और साइबर सुरक्षा की अनिवार्य ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।

सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य

यह प्रशिक्षण केवल सरकारी शिक्षकों के लिए नहीं होगा। निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को भी यह ट्रेनिंग लेनी होगी। एनईपी के अनुसार पाठ्यक्रम में हुए व्यापक बदलावों को देखते हुए सभी शिक्षकों को नई तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

दीक्षा पोर्टल पर होगा ऑनलाइन प्रशिक्षण

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इस प्रशिक्षण की कार्य योजना तैयार कर रही है। सतत व्यवसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम के तहत यह ट्रेनिंग दीक्षा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन कराई जाएगी।

किन विषयों का होगा समावेश

प्रशिक्षण में कई आधुनिक विषय शामिल होंगे। इनमें डिजिटल स्किल्स, टेक्नो-पेडागॉजी, डिजिटल वेलनेस, मीडिया लिटरेसी, वित्तीय सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी, रोबोटिक्स और ड्रोन जैसे विषय शामिल हैं। हर मॉड्यूल के अंत में प्रश्नोत्तर होंगे।

परीक्षा पास करने पर मिलेगा सर्टिफिकेट

कोर्स पूरा करने के बाद शिक्षकों को अंतिम परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में पास होने वाले शिक्षकों को डिजिटल सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यह सर्टिफिकेट उनके करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

साइबर सुरक्षा की मिलेगी पूरी जानकारी

ट्रेनिंग के दौरान शिक्षकों को साइबर सुरक्षा की व्यापक जानकारी दी जाएगी। इसमें लैपटॉप, डेस्कटॉप और मोबाइल की सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड बनाने की तकनीक, फर्जी कॉल और मैसेज पहचानने के तरीके सिखाए जाएंगे।

सिस्टम सुरक्षा पर मिलेगी खास जानकारी

शिक्षकों को सिस्टम अपडेट और एंटीवायरस के सही उपयोग की भी जानकारी दी जाएगी। साथ ही डिजिटल सिटीजनशिप और डिजि-लॉकर के प्रभावी उपयोग पर विशेष प्रशिक्षण मिलेगा। यह सभी जानकारियां डिजिटल युग में बेहद जरूरी हैं।

छात्रों तक भी पहुंचेगा ज्ञान

इस पहल का मकसद केवल शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना नहीं है। बल्कि छात्रों को भी डिजिटल सुरक्षा और एआई के सही उपयोग के प्रति जागरूक करना है। पहले शिक्षक प्रशिक्षित होंगे, फिर वही ज्ञान वे अपने छात्रों तक पहुंचाएंगे।

बच्चों को मिलेगी जागरूकता

बच्चों को अनजान लिंक से बचने, सोशल मीडिया के सीमित उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाएगी। यह जानकारी आज के समय में बेहद जरूरी है क्योंकि साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

शिक्षा को राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना भी लक्ष्य

प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षकों की योग्यता बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा को राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ना भी है। शिक्षा विभाग चाहता है कि शिक्षक न केवल आधुनिक तकनीक में निपुण हों, बल्कि भारतीय संस्कृति और मूल्यों को भी छात्रों तक पहुंचाएं।

Bihar News: सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल सकता है। जब शिक्षक आधुनिक तकनीक और बेहतर शिक्षण विधियों से लैस होंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता अपने आप बढ़ेगी।

छात्र-शिक्षक अनुपात में हुए सुधार के बाद यह दूसरा बड़ा कदम है। पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता और उनका बेहतर प्रशिक्षण मिलकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएगा। यह पहल निश्चित रूप से राज्य के भविष्य के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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