CEC Gyanesh Kumar: देश की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। INDIA ब्लॉक की विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की गंभीर तैयारी में हैं। यह कदम पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विवाद के बाद उठाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे की अध्यक्षता में INDIA ब्लॉक की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने महाभियोग के सुझाव पर सहमति जताई।
TMC ने उठाया मुद्दा, खडगे की बैठक में बनी सहमति

तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा उपनेता शताब्दी रॉय ने संसद में अपने कार्यालय में आयोजित INDIA ब्लॉक की बैठक में सबसे पहले यह मुद्दा उठाया। शताब्दी रॉय ने बैठक में जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च से SIR के विरोध में धरने पर बैठी हैं और इस धरने को चार दिन से ज्यादा हो चुके हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे में विपक्ष के लिए CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाकर अगला ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मौजूद अन्य सभी विपक्षी नेताओं ने इस सुझाव पर अपनी सहमति व्यक्त की।
क्या है SIR विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ में पश्चिम बंगाल में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद हुई मतदाता सूची की सफाई है। चुनाव आयोग ने राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी की। इस प्रक्रिया के बाद राज्य की मतदाता सूची से करीब 63.66 लाख नाम हटा दिए गए जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। TMC और ममता बनर्जी का आरोप है कि यह सब बंगाल के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने और राज्य को विभाजित करने की सुनियोजित साजिश है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। कोलकाता में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को काले झंडे दिखाए और उनके खिलाफ वापस जाओ के नारे लगाए।
संविधान में क्या है महाभियोग की प्रक्रिया?
महाभियोग प्रस्ताव लाना संवैधानिक दृष्टि से एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान संसदीय महाभियोग प्रक्रिया के जरिए हटाया जा सकता है।
प्रस्ताव लाने के लिए राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए जबकि लोकसभा में यह संख्या 100 है। प्रस्ताव में हटाने के ठोस कारणों का उल्लेख होना अनिवार्य है। यह प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
प्रस्ताव पेश होने के बाद संबंधित सदन के अध्यक्ष को आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन करना होगा। यदि समिति CEC को दोषी पाती है तो उसकी रिपोर्ट पर मतदान होगा। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होगा। दोनों सदनों की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति निष्कासन का अंतिम आदेश जारी करते हैं।
क्या विपक्ष के पास है पर्याप्त संख्या बल?
विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने दावा किया है कि उनके पास दोनों सदनों में से किसी में भी प्रस्ताव पेश करने के लिए आवश्यक संख्या बल मौजूद है। हालांकि प्रस्ताव को अंतिम रूप से पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी जो फिलहाल विपक्ष के पास नहीं है। इस लिहाज से महाभियोग प्रस्ताव पारित होने की संभावना कम है लेकिन विपक्ष इसके जरिए चुनाव आयोग और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
CEC Gyanesh Kumar: TMC पेश करेगी प्रस्ताव, विवरण पर काम जारी
सूत्रों के मुताबिक यह महाभियोग प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश किया जाएगा जबकि पूरा विपक्ष उसके साथ खड़ा रहेगा। अभी प्रस्ताव के विवरण पर काम जारी है जिसमें यह तय होना भी शामिल है कि इसे लोकसभा में पेश किया जाएगा या राज्यसभा में। यह पूरा घटनाक्रम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले देश की राजनीति में एक नया और बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
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