LPG Cylinder Crisis: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की लपटें अब सीधे भारतीय जनजीवन को झुलसाने लगी हैं। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक एलपीजी आपूर्ति बुरी तरह चरमरा गई है। भारत में इसका असर इतना गहरा हो गया है कि केंद्र सरकार को घरेलू गैस को प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक यानी कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की रिफिलिंग पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगानी पड़ी है। इस फैसले के बाद देश के कई बड़े शहरों में हाहाकार मच गया है। सबसे चौंकाने वाली खबर पुणे से आई है जहां श्मशान घाट तक बंद होने की नौबत आ गई है। बेंगलुरु में होटल और रेस्टोरेंट ताले लगाने पर मजबूर हो रहे हैं। मुंबई, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में भी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
पुणे में श्मशान घाट बंद – सबसे दर्दनाक असर
कमर्शियल एलपीजी संकट का सबसे दर्दनाक और अकल्पनीय असर पुणे में देखने को मिला है। यहां श्मशान घाटों पर गैस की आपूर्ति बंद हो जाने के कारण अंत्येष्टि कार्यों में भारी बाधा आ रही है। आधुनिक श्मशान घाट गैस आधारित भट्टियों पर निर्भर होते हैं और व्यावसायिक एलपीजी के बिना ये भट्टियां चलाना संभव नहीं है। ऐसे में शवों का अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है जो अपने आप में एक मानवीय संकट है। परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुणे नगर निगम और श्मशान घाट प्रशासन ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
बेंगलुरु – होटल और रेस्टोरेंट पर लटके ताले

देश की आईटी राजधानी बेंगलुरु में कमर्शियल गैस संकट ने आतिथ्य क्षेत्र की कमर तोड़ दी है। शहर के सैकड़ों होटल और रेस्टोरेंट संचालक मंगलवार से अपने प्रतिष्ठान बंद करने पर मजबूर हो गए हैं। बेंगलुरु जैसे महानगर में जहां रोजाना लाखों लोग बाहर खाना खाते हैं, वहां यह संकट सीधे आम जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। छोटे ढाबे और सड़क किनारे के फूड स्टॉल पहले ही बंद हो चुके हैं। बड़े रेस्टोरेंट भी पहले से जमा स्टॉक पर किसी तरह काम चला रहे थे लेकिन अब वह भी खत्म होने की कगार पर है। कर्नाटक होटल एसोसिएशन ने राज्य सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि अगर 48 घंटों में गैस आपूर्ति नहीं हुई तो पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर प्रतिष्ठान बंद हो जाएंगे।
मुंबई – महानगर में भी घुटने टेके
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कमर्शियल एलपीजी की कमी ने कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। धारावी जैसे इलाकों में जहां छोटे-छोटे उद्योग और खानपान के हजारों केंद्र हैं वहां गैस खत्म होने की खबरें आ रही हैं। मुंबई के पांच सितारा होटल अभी किसी तरह वैकल्पिक ईंधन के जुगाड़ से काम चला रहे हैं लेकिन यह समाधान न तो स्थायी है और न ही सस्ता। मुंबई के उपनगरों में ढाबों और मिड-रेंज रेस्टोरेंट की स्थिति सबसे खराब है। विदर्भ और मराठवाड़ा में भी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
पंजाब – उद्योग और खानपान दोनों बेहाल
पंजाब में कमर्शियल गैस संकट ने राज्य के ढाबा संस्कृति पर सीधा वार किया है। पंजाब के प्रसिद्ध ढाबे जो देश-विदेश के लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, उनमें से कई अब गैस की कमी से जूझ रहे हैं। लुधियाना और जालंधर के औद्योगिक क्षेत्रों में भी व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति रुकने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। अमृतसर जैसे पर्यटन शहर में होटल उद्योग पर भी असर दिखने लगा है।
हिमाचल प्रदेश – BBN औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन ठप
हिमाचल प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में संकट सबसे पहले और सबसे तीव्र रूप में सामने आया। यह देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है जहां फार्मा, पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग और गत्ता उद्योग में हजारों व्यावसायिक सिलिंडर रोज इस्तेमाल होते हैं। 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो तीनों आकार के व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग बंद होने से यहां के उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। परवाणू में गैस कंपनियों और वितरकों की आपात बैठक भी हुई लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
केंद्र सरकार का फैसला और उसकी वजह
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से देश को करीब 55 फीसदी एलएनजी मिलती थी और अकेले कतर से 40 फीसदी आपूर्ति होती थी। जब से यह रास्ता बंद हुआ घरेलू भंडार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय मंत्रालय ने तेल कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। इसी के चलते व्यावसायिक सिलिंडरों की रिफिलिंग रोकनी पड़ी। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि यह आदेश केंद्र सरकार की तरफ से आया है।
LPG Cylinder Crisis: कब मिलेगी राहत?
फिलहाल राहत की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि मध्य-पूर्व में युद्धविराम कब होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य कब खुलता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ट्रंप-पुतिन बातचीत में भी ईरान संकट का समाधान निकालने की कोशिश हुई है। लेकिन जब तक वैश्विक आपूर्ति सामान्य नहीं होती तब तक भारत में कमर्शियल गैस संकट बना रहेगा और इसकी मार देश के हर कोने में महसूस होती रहेगी।
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