West Bengal SIR 2026: पश्चिम बंगाल में चुनाव से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के तहत चौथी पूरक मतदाता सूची रविवार रात जारी कर दी है। इस सूची में करीब दो लाख लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि लगातार तीन दिनों में तीन पूरक सूचियां जारी की गई हैं, जो यह बताता है कि आयोग बंगाल में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के काम को बड़ी तेजी के साथ आगे बढ़ा रहा है।
क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण और यह क्यों हो रहा है?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की गहराई से जांच करता है। इसमें यह देखा जाता है कि सूची में जिन लोगों के नाम हैं, वे असल में उस पते पर रहते हैं या नहीं, वे मतदान के योग्य हैं या नहीं और कोई नाम गलत तरीके से तो नहीं जोड़ा गया। जो लोग पात्र हैं लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें भी इस प्रक्रिया में जोड़ा जाता है।
बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर पहले से ही काफी चर्चा और विवाद रहा है। एक तरफ जहां आयोग का कहना है कि यह पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया है, वहीं कुछ राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में इस चौथी पूरक सूची का जारी होना राजनीतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।
कब-कब जारी हुई पूरक सूचियां?

SIR की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि अब तक सूचियां किस क्रम में जारी हुई हैं। सबसे पहले 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके बाद 23 मार्च को पहली पूरक सूची जारी की गई। फिर शुक्रवार की देर रात दूसरी पूरक सूची आई। शनिवार को तीसरी पूरक सूची जारी हुई और अब रविवार रात को चौथी पूरक सूची सामने आई है।
यानी सिर्फ तीन दिनों यानी शुक्रवार, शनिवार और रविवार को लगातार तीन पूरक सूचियां जारी की गई हैं। इतनी तेज गति से पूरक सूचियां जारी होना यह दिखाता है कि आयोग इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है।
दो लाख नए नाम जुड़े, लेकिन कितने हटाए गए?
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक इस चौथी पूरक सूची में करीब दो लाख लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। यह वे लोग हैं जो मतदान के लिए योग्य हैं लेकिन किसी कारण से उनका नाम पहले की सूची में शामिल नहीं हो पाया था।
हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इस सूची में कुल कितने नाम हटाए गए हैं। ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की श्रेणी में आने वाले कितने लोगों के नाम काटे गए, इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है।
40 से 45 प्रतिशत विचाराधीन मतदाताओं के नाम हटाए गए
आयोग के सूत्रों से जो जानकारी मिली है वह बहुत महत्वपूर्ण है। सूत्रों के मुताबिक ‘विचाराधीन’ मतदाताओं में से 40 से 45 प्रतिशत लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं। ‘विचाराधीन’ वे मतदाता होते हैं जिनके बारे में जांच के दौरान कुछ सवाल उठते हैं, जैसे कि उनका पता सही नहीं है, वे उस इलाके में नहीं रहते जहां से उन्होंने नाम दर्ज कराया है या उनके दस्तावेजों में कोई कमी है।
इन मतदाताओं की जांच के बाद जो लोग पात्र नहीं पाए गए, उनके नाम हटाए जाते हैं। 40 से 45 प्रतिशत का आंकड़ा काफी बड़ा है और यह दिखाता है कि बंगाल में मतदाता सूची में काफी गड़बड़ियां थीं जिन्हें इस प्रक्रिया के जरिए दूर करने की कोशिश की जा रही है।
बंगाल में क्यों है SIR इतना विवादित?
पश्चिम बंगाल एक राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील राज्य है। यहां हर चुनाव में मतदाता सूची को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि सूची में बड़े पैमाने पर फर्जी नाम जोड़े जाते हैं। वहीं सत्ताधारी दल का कहना है कि SIR की आड़ में असली मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
इसी तनाव के बीच चुनाव आयोग यह काम कर रहा है। आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक हो रही है और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक दखल नहीं है। हर नाम जोड़ने और हटाने के लिए तय नियमों का पालन किया जा रहा है।
आम मतदाताओं पर क्या होगा असर?
जो लोग बंगाल में रहते हैं और अपना वोट देना चाहते हैं, उनके लिए यह जरूरी है कि वे अपना नाम मतदाता सूची में जरूर जांच लें। SIR की प्रक्रिया में कई बार कुछ असली मतदाताओं के नाम भी गलती से हट जाते हैं। ऐसे में अगर आपका नाम सूची में नहीं है तो आप चुनाव आयोग की वेबसाइट या अपने नजदीकी चुनाव कार्यालय में जाकर इसकी जांच कर सकते हैं और नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने भी लोगों से अपील की है कि वे अपनी मतदाता पहचान पत्र की जानकारी अपडेट रखें और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी तुरंत आयोग को दें।
राजनीतिक दलों की क्या है प्रतिक्रिया?
इस चौथी पूरक सूची के जारी होने पर राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी मतदाताओं को सूची से हटाना एक अच्छा कदम है और आयोग को यह काम और भी सख्ती से करना चाहिए। वहीं कुछ दलों ने यह आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग के असली मतदाताओं के नाम ज्यादा हटाए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर आयोग को दिशानिर्देश देता रहता है।
आगे क्या होगा?
अभी यह साफ नहीं है कि चुनाव आयोग बंगाल में और कितनी पूरक सूचियां जारी करेगा। SIR की प्रक्रिया जब तक पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक पूरक सूचियां आती रह सकती हैं। आयोग की कोशिश है कि अगले चुनाव से पहले मतदाता सूची पूरी तरह साफ और सटीक हो जाए।
बंगाल की जनता और राजनीतिक दलों की नजर अब इस बात पर है कि आखिरकार अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम होंगे और कितने लोगों को अपना वोट देने का अधिकार मिलेगा। जो भी हो, यह प्रक्रिया बंगाल की आने वाली चुनावी राजनीति पर गहरा असर डालने वाली है।
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