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झारखंड में JTET परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला, RTE से पहले के टीचर भी दे सकेंगे परीक्षा, सर्टिफिकेट की मान्यता होगी आजीवन

JTET New Rules 2026: झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी JTET के लिए एक नई नियमावली तैयार की है। इस नियमावली में कई महत्वपूर्ण बातें तय की गई हैं जो राज्य के हजारों शिक्षकों की जिंदगी पर सीधा असर डालेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि जो शिक्षक शिक्षा का अधिकार कानून यानी RTE लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे, वे भी अब JTET परीक्षा दे सकेंगे। इसके साथ ही इस परीक्षा के सर्टिफिकेट की मान्यता आजीवन रहेगी, जो पहले के नियमों से बिल्कुल अलग और बेहतर व्यवस्था है।

क्या है JTET और यह क्यों है जरूरी?

JTET यानी झारखंड टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट, झारखंड में सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए एक अनिवार्य पात्रता परीक्षा है। देश में शिक्षा का अधिकार कानून यानी RTE लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह तय किया था कि सभी प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ताकि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक एक तय स्तर की योग्यता रखते हों।

झारखंड में स्कूली शिक्षा विभाग ने अब इस परीक्षा के लिए नई नियमावली बनाई है जिसमें पुराने शिक्षकों और पारा शिक्षकों को भी मौका देने की बात कही गई है।

RTE से पहले के शिक्षकों को भी मिलेगा मौका

JTET New Rules 2026

नई नियमावली में सबसे बड़ा और राहत देने वाला फैसला यह है कि RTE लागू होने से पहले नियुक्त प्राथमिक शिक्षक और पारा शिक्षक भी JTET परीक्षा में बैठ सकेंगे। लेकिन इसके लिए एक जरूरी शर्त है। जिन शिक्षकों की सेवा अवधि एक सितंबर 2025 की तारीख को पांच साल से अधिक बची हो, वे इस परीक्षा के लिए पात्र होंगे।

इसके अलावा जिन शिक्षकों का ग्रेड-चार या ग्रेड-सात पर पदोन्नति का दावा लंबित है, वे भी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यह फैसला उन हजारों शिक्षकों के लिए बहुत जरूरी था जो लंबे समय से नौकरी में हैं लेकिन पात्रता परीक्षा न देने के कारण अनिश्चितता में जी रहे थे।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर राज्य सरकार जरूरी समझे तो सेवारत सहायक शिक्षकों और पारा शिक्षकों के लिए अलग से JTET परीक्षा का आयोजन भी किया जा सकता है। यानी सरकार ने इस मामले में पूरी तरह लचीला रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पुनर्विचार याचिकाओं का असर

स्कूली शिक्षा विभाग ने यह नियमावली बनाते समय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को भी ध्यान में रखा है जिसमें RTE लागू होने से पहले नियुक्त उन प्राथमिक शिक्षकों के लिए JTET पास करना अनिवार्य किया गया था जिनकी पांच साल से अधिक सेवा बची है।

हालांकि, यहां एक पेच भी है। इस आदेश के खिलाफ अब तक 35 पुनर्विचार याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगा, उसका असर राज्य सरकार के इस फैसले पर भी पड़ सकता है। इसलिए शिक्षकों को इस मामले पर नजर बनाए रखनी होगी।

जितनी बार चाहें दे सकते हैं परीक्षा, कोई रोक नहीं

नई नियमावली की एक और बेहद अच्छी बात यह है कि कोई भी अभ्यर्थी JTET परीक्षा जितनी बार चाहे उतनी बार दे सकता है। अगर किसी को लगता है कि उसके अंक बेहतर हो सकते हैं, तो वह दोबारा या बार-बार परीक्षा देकर अपने नंबर सुधार सकता है। इस पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

यह प्रावधान उन उम्मीदवारों के लिए बहुत फायदेमंद है जो पहली बार में अच्छे अंक नहीं ला पाते या जो भविष्य में बेहतर नौकरी के लिए ज्यादा अंक चाहते हैं।

सर्टिफिकेट की मान्यता अब आजीवन रहेगी

पहले JTET सर्टिफिकेट की एक तय समय सीमा होती थी, जिसके बाद उसे दोबारा देना पड़ता था। लेकिन नई नियमावली में यह बड़ा बदलाव किया गया है कि JTET का सर्टिफिकेट एक बार मिलने के बाद आजीवन मान्य रहेगा। यानी अगर आपने यह परीक्षा पास कर ली, तो आपको बार-बार परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत है।

कदाचार पर होगी सख्त कार्रवाई

नियमावली में नकल और धोखाधड़ी यानी कदाचार को रोकने के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। अगर कोई अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान कदाचार करते हुए पकड़ा जाता है, तो झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी JAC उसे अगली दो परीक्षाओं में बैठने से रोक सकता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि परीक्षा की पवित्रता बनी रहे और जो शिक्षक सच में मेहनत करते हैं, उनके साथ अन्याय न हो।

भोजपुरी, मगही और अंगिका को सूची से बाहर रखने पर बवाल

नई नियमावली में एक विवादित पहलू भी सामने आया है। जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं किया गया है। इस फैसले पर खासकर पलामू इलाके में जबरदस्त विरोध हो रहा है।

रविवार को मेदिनीनगर कचहरी परिसर में झारखंड राज्य सहयोगी संघर्ष मोर्चा की पलामू जिला इकाई की एक बैठक हुई। इस बैठक में कहा गया कि मगही और भोजपुरी भाषा को JTET परीक्षा से बाहर करना उन लाखों लोगों के साथ अन्याय है जो इन भाषाओं को बोलते और समझते हैं।

बैठक में जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव और झारखंड राज्य सहयोगी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी ने कहा कि भोजपुरी भाषा को मिटाने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे पर सभी संगठनों को एक मंच पर आने की अपील भी की।

शिक्षकों के लिए क्यों अहम है यह नियमावली?

झारखंड में हजारों ऐसे शिक्षक हैं जो RTE लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। उनके मन में यह डर था कि क्या उन्हें भी JTET देनी होगी और अगर देनी होगी तो क्या वे उसके लिए पात्र होंगे। नई नियमावली ने उनकी इस उलझन को बहुत हद तक सुलझा दिया है।

इसके अलावा परीक्षा कितनी भी बार देने की आजादी और सर्टिफिकेट की आजीवन मान्यता जैसे प्रावधान शिक्षकों को एक स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था देते हैं। अब शिक्षकों को बार-बार परीक्षा देने की चिंता नहीं करनी होगी।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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