Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक और अहंकारी मानसिकता का गंभीर आरोप लगाया और दावा किया कि इस बार बंगाल की जनता TMC को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। दूसरी तरफ TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर तीखे सवाल उठाए और वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बंगाल दौरे के दौरान TMC कार्यकर्ताओं ने काले झंडों से विरोध प्रदर्शन किया।
सरावगी का हमला – SIR संवैधानिक अधिकार, TMC फर्जी वोटों से जीतना चाहती है

बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी और TMC पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने SIR प्रक्रिया का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है और SIR प्रक्रिया का संचालन करना उनका पूरा अधिकार है। इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
सरावगी ने TMC पर तीखा निशाना साधते हुए सवाल किया कि तृणमूल कांग्रेस आखिर क्या चाहती है? क्या वह बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं, घुसपैठियों, मृतकों और दोहरी प्रविष्टियों वाले फर्जी वोटों का इस्तेमाल करके चुनाव जीतना चाहती है? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसा होने नहीं दिया जाएगा क्योंकि बंगाल के संसाधनों पर अधिकार बंगाल की जनता का है न कि घुसपैठियों और बांग्लादेशियों का।
ममता पर सांप्रदायिकता और अहंकार का आरोप
सरावगी ने ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक और अहंकारी मानसिकता का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अखबारों की सुर्खियों में बने रहने के लिए ममता बनर्जी जो खेल खेल रही हैं उसे बंगाल की जनता अच्छी तरह देख और समझ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल की जनता TMC को सत्ता से बाहर कर देगी और राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी।
| भाजपा का आरोप | TMC का पक्ष |
|---|---|
| SIR संवैधानिक प्रक्रिया है | वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए |
| TMC फर्जी वोटों से जीतना चाहती है | सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष जताया |
| घुसपैठी मतदाताओं को हटाना जरूरी | मनमाने तरीके से नाम काटे गए |
| ममता सांप्रदायिक और अहंकारी | CEC का बंगाल दौरा पक्षपातपूर्ण |
TMC का पलटवार – वैध मतदाताओं के नाम एकतरफा हटाए गए
भाजपा के हमले के जवाब में TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया की तीखी आलोचना की। पार्टी के विरोध प्रदर्शन के समापन पर बोलते हुए अभिषेक ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से TMC की टीम ने कई सवाल पूछे लेकिन उन्होंने सभी सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दिए।
अभिषेक बनर्जी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की और मतदाताओं के नाम एकतरफा तरीके से हटाए जाने को लेकर TMC के संदेह को अदालत के सामने रखा गया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर असंतोष जताते हुए उच्च न्यायालय को उन मतदाताओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जो मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील करना चाहते हैं।
TMC का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में वैध और असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। पार्टी का मानना है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित है और इससे बंगाल के लाखों वोटरों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा सकता है।
CEC ज्ञानेश कुमार का बंगाल दौरा – काले झंडों से स्वागत
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस बीच पश्चिम बंगाल का दौरा किया। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने बंगाल के मतदाताओं से आगामी विधानसभा चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि चुनाव शांतिपूर्ण और तनावमुक्त माहौल में होंगे। CEC ने चुनाव तैयारियों की समीक्षा की, नए मतदाताओं से संवाद किया और प्रतीकात्मक EPIC यानी मतदाता पहचान पत्र भी भेंट किए।
लेकिन उनके दौरे के दौरान TMC के साथ तनाव खुलकर सामने आया। जब CEC ज्ञानेश कुमार कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे तब TMC कार्यकर्ताओं ने मंदिर के बाहर काले झंडों के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि TMC और चुनाव आयोग के बीच संबंध कितने तनावपूर्ण हैं।
क्या है SIR – क्यों है विवाद का केंद्र?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को व्यापक स्तर पर जांचा और सुधारा जाता है। इसमें फर्जी, दोहरी और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है।
भाजपा का तर्क है कि बंगाल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए और अन्य अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में दर्ज हैं जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। SIR के जरिए इन्हें हटाना लोकतंत्र की शुद्धता के लिए जरूरी है।
दूसरी तरफ TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल असली मतदाताओं को परेशान करने और उनके नाम सूची से हटाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इससे खासतौर पर अल्पसंख्यक और दलित मतदाता प्रभावित हो रहे हैं जो TMC के पारंपरिक वोट बैंक हैं।
Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव की राजनीतिक तस्वीर
पश्चिम बंगाल में इस वर्ष के अंत में 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी की TMC लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है जबकि भाजपा 2021 के चुनाव में मिली हार का बदला लेने के लिए पूरी तैयारी में जुटी है।
भाजपा ने बंगाल को अपनी प्राथमिकता वाले राज्यों में रखा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीती थीं लेकिन 200 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका था। इस बार पार्टी संगठन को मजबूत करने और नए चेहरों को आगे लाने में लगी है।
SIR को लेकर जारी विवाद, CEC के दौरे पर हुआ विरोध और दोनों पार्टियों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप — यह सब दर्शाता है कि बंगाल चुनाव से पहले का माहौल बेहद गर्म है। आने वाले महीनों में यह सियासी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं।
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