Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य में बागवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए एक बड़ी पहल की है। कृषि विभाग ने टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के इच्छुक किसानों और उद्यमियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। सरकार इस लैब की स्थापना लागत का पूरा 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये तक का अनुदान देगी। इस योजना का उद्देश्य राज्य में आधुनिक तकनीक के जरिए गुणवत्तापूर्ण और रोगमुक्त पौधों का उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 मार्च 2026 है इसलिए इच्छुक लोगों को देरी नहीं करनी चाहिए।
क्या है यह योजना और इससे क्या मिलेगा?

बिहार कृषि विभाग की इस योजना के तहत निजी क्षेत्र में टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने पर सरकार आधी लागत उठाएगी। लैब की अधिकतम इकाई लागत 4 करोड़ 85 लाख रुपये तय की गई है जिस पर 50 प्रतिशत अनुदान के रूप में अधिकतम 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये मिलेंगे।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| लैब की अधिकतम इकाई लागत | ₹4,85,00,000 |
| सरकारी अनुदान (50%) | अधिकतम ₹2,42,50,000 |
| आवेदन की अंतिम तिथि | 15 मार्च 2026 |
| आवेदन पोर्टल | horticulture.bihar.gov.in |
यह अनुदान किसानों और उद्यमियों दोनों के लिए उपलब्ध है। अगर आप बागवानी के क्षेत्र में एक स्थायी और लाभदायक व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं तो सरकार की यह मदद एक बड़ा आर्थिक सहारा बन सकती है।
भूमि और पात्रता संबंधी जरूरी शर्तें
टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करना अनिवार्य है।
न्यूनतम दो एकड़ भूमि: लैब के लिए कम से कम दो एकड़ जमीन होनी चाहिए। यह जमीन आवेदक के नाम पर होनी चाहिए या न्यूनतम 25 वर्षों की लीज पर होनी चाहिए। लीज वाली जमीन पर भी यह लाभ मिल सकता है लेकिन 25 साल की न्यूनतम अवधि जरूरी है।
जमीन ऊंची और जलमुक्त हो: टिश्यू कल्चर लैब के लिए जमीन ऊंची होनी चाहिए और उस पर जलजमाव नहीं होना चाहिए। प्रयोगशाला में नमी और जलभराव से उपकरण और पौधे दोनों को नुकसान होता है।
मुख्य सड़क से जुड़ाव जरूरी: जमीन का मुख्य सड़क से जुड़ा होना भी अनिवार्य है ताकि बड़े वाहन आसानी से आ-जा सकें। तैयार पौध को अन्य स्थानों तक पहुंचाने के लिए यह जरूरी है।
आवेदन के साथ क्या-क्या देना होगा
आवेदन के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज और रिपोर्ट जमा करनी होगी। सबसे पहले एक विस्तृत मॉडल प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी MPR तैयार करनी होगी जिसमें लैब की स्थापना योजना, लागत का विवरण और अनुमानित उत्पादन शामिल हो। इसके साथ ही बैंक ऋण से संबंधित सहमति पत्र भी जमा करना होगा जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आवेदक के पास शेष 50 प्रतिशत लागत जुटाने की व्यवस्था है।
15 मार्च तक ऑनलाइन करें आवेदन
आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इच्छुक किसान और उद्यमी कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर 15 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। समय सीमा नजदीक होने की वजह से जो भी इस योजना में रुचि रखते हैं उन्हें तुरंत वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक
टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें पौधों के छोटे ऊतक या कोशिकाओं को प्रयोगशाला में एक विशेष पोषक माध्यम पर विकसित किया जाता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे कम समय में बड़ी संख्या में बिल्कुल एक जैसे और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं।
पारंपरिक बीज या कलम विधि की तुलना में टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों की गुणवत्ता काफी बेहतर होती है। इन पौधों में बीमारियों का खतरा कम होता है, वे तेजी से बढ़ते हैं और उत्पादन भी अधिक देते हैं।
केले की खेती में मिल चुकी है बड़ी सफलता
बिहार में टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग पहले ही कई फसलों में शानदार परिणाम दे चुका है। खासकर केले की खेती में यह तकनीक बेहद कारगर साबित हुई है। जी-9, मालभोग और चीनिया किस्मों के टिश्यू कल्चर पौधों ने राज्य में केले का उत्पादन काफी बढ़ाया है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
केले के अलावा आलू, गन्ना, अदरक, स्ट्राबेरी और सागवान जैसी फसलों में भी इस तकनीक से बेहतर नतीजे मिलते हैं। अब अगर राज्य में नई टिश्यू कल्चर लैब बनती हैं तो किसानों को और अधिक किस्मों के गुणवत्तापूर्ण पौधे स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेंगे।
Bihar News: किसानों और उद्यमियों के लिए क्यों है यह सुनहरा अवसर
बिहार में बागवानी का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। लेकिन गुणवत्तापूर्ण पौध की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। अभी राज्य के किसानों को उन्नत पौधे दूसरे राज्यों से मंगाने पड़ते हैं जिससे लागत बढ़ती है और समय भी लगता है।
अगर राज्य में ही टिश्यू कल्चर लैब बनें तो स्थानीय किसानों को सस्ते और आसानी से गुणवत्तापूर्ण पौधे मिल सकेंगे। साथ ही लैब संचालकों के लिए भी यह एक स्थायी और लाभदायक व्यवसाय बन सकता है क्योंकि पूरे राज्य में इन पौधों की मांग रहती है। सरकार की 50 प्रतिशत सब्सिडी इस व्यवसाय को शुरू करने की लागत को आधा कर देती है जो किसी भी उद्यमी के लिए बड़ी राहत है।
कृषि विभाग का मानना है कि नई लैब बनने से राज्य में बागवानी क्षेत्र में और तेज गति से विकास होगा तथा किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। इच्छुक आवेदक बिना देरी के 15 मार्च से पहले horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन करें।
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