Top 5 This Week

Related Posts

“बिहार चुनाव 2025: महिलाओं ने तय की जीत की दिशा! जानिए NDA और महागठबंधन में किसे मिला महिला वोट का साथ

डेस्क:बिहार की सियासत में इस बार एक बात सबसे दिलचस्प रही — महिला वोटर्स की अभूतपूर्व भागीदारी। 2025 के विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने पहले से कहीं ज्यादा उत्साह दिखाया और मतदान प्रतिशत में पुरुषों से आगे रहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार का असली खेल “महिला मत” ने पलट दिया है। एग्जिट पोल्स के मुताबिक, बिहार की महिलाएं किसी एक पार्टी के साथ पूरी तरह नहीं गईं, बल्कि उन्होंने मुद्दों, योजनाओं और विश्वास के आधार पर वोट किया है।

महिला वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव

पिछले चुनावों में जहां पुरुष मतदाताओं का रुझान अधिक निर्णायक माना जाता था, वहीं इस बार तस्वीर उलट गई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार 69.2% महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 65.7% रहा। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाएं अब सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि ‘किंगमेकर’ बन चुकी हैं।

NDA को मिला महिला मतों का मजबूत समर्थन

एग्जिट पोल के शुरुआती नतीजों के अनुसार, NDA को महिलाओं से बड़ी राहत मिली है।
लगभग 56% महिला मतदाताओं ने एनडीए को वोट दिया है, जबकि महागठबंधन को 41% समर्थन मिला है।

इसका सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है नीतीश कुमार की योजनाएं, जैसे —

  • मुख्यमंत्री साइकिल योजना
  • कन्या उत्थान योजना
  • मुख्यमंत्री वृद्धा पेंशन योजना
  • हर घर नल-जल योजना

इन योजनाओं ने गांव-गांव में महिलाओं के जीवन को प्रभावित किया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि “नीतीश कुमार का महिला सशक्तिकरण मॉडल अभी भी ग्रामीण महिलाओं के मन में गहराई से बसा है।”

महागठबंधन ने युवतियों और शहरी महिलाओं में बनाई पकड़

दूसरी ओर, महागठबंधन को 18 से 30 वर्ष की महिलाओं में अच्छा समर्थन मिला है।
तेजस्वी यादव की युवा अपील, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दों पर खुलकर बात करने की रणनीति ने शहरी और पढ़ी-लिखी युवतियों को आकर्षित किया। C-Voter के सर्वे के मुताबिक, शहरी इलाकों में 48% महिलाओं ने महागठबंधन को वोट दिया, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा घटकर 38% रह गया।

महिलाओं के मुद्दे बने चुनाव का केंद्र

इस बार के चुनाव में महिलाओं से जुड़े मुद्दे न केवल प्रचार का हिस्सा रहे, बल्कि एजेंडा भी बने। महंगाई, LPG गैस की कीमतें, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी चिंताएँ हर सभा में गूंजीं। NDA ने इन मुद्दों पर “विकास और स्थिरता” की बात की, जबकि महागठबंधन ने “परिवर्तन और अवसर” का नारा दिया। राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय सिंह के अनुसार,“महिलाएं अब सिर्फ जाति या परिवार के आधार पर वोट नहीं करतीं। वे अब खुद सोचती हैं कि किसकी नीतियों से उनके जीवन में वास्तविक बदलाव आएगा।”

2020 की तुलना में क्या बदला?

2020 के विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं ने नीतीश कुमार को बड़ी बढ़त दिलाई थी। तब 60% से अधिक महिला वोट NDA को मिले थे, जिससे कई सीटों पर हार को जीत में बदला जा सका था। इस बार भी महिला मतदाताओं की वही निर्णायक भूमिका दोहराई जाती दिख रही है — खासकर उत्तर बिहार, मिथिलांचल और मगध क्षेत्रों में।

महिला मतदाताओं की भूमिका क्यों अहम?

  1. बिहार में महिलाओं की आबादी पुरुषों के बराबर है।

  2. ग्रामीण इलाकों में वे परिवार के फैसलों में अब खुलकर भाग ले रही हैं।

  3. सरकारी योजनाओं के सीधे लाभार्थी होने के कारण, वे “इमोशनल कनेक्ट” के साथ वोट करती हैं।

इसलिए, किसी भी दल की जीत या हार अब सीधे तौर पर महिला वोटरों के फैसले से जुड़ गई है।

निष्कर्ष:

बिहार चुनाव 2025 में यह साफ हो गया है कि अब महिलाएं सियासत की साइलेंट स्ट्रेंथ नहीं, बल्कि निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं।
एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि जहां एनडीए को ग्रामीण और पारंपरिक महिला मतों का साथ मिला है, वहीं महागठबंधन ने युवा और शहरी महिलाओं में पैठ बनाई है।अंतिम नतीजे चाहे जो भी हों, एक बात तय है — अब बिहार में कोई भी चुनाव महिलाओं के बिना नहीं जीता जा सकता। और इस बार, उन्होंने साबित कर दिया है कि “महिला वोट” अब सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सत्ता का संतुलन है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles