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क्या सिर्फ ब्लड टेस्ट से पता चल सकता है कैंसर? जानिए प्रोस्टेट कैंसर में HRC टेस्ट की सच्चाई डॉक्टर की ज़ुबानी

 डेस्क:मेडिकल साइंस की दुनिया में लगातार हो रही प्रगति ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की शुरुआती पहचान के नए रास्ते खोले हैं। हाल ही में चर्चा में आए HRC ब्लड टेस्ट को लेकर लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है — क्या यह टेस्ट वास्तव में प्रोस्टेट कैंसर की सटीक पहचान कर सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि HRC टेस्ट शरीर में कैंसर के जोखिम का संकेत जरूर देता है, लेकिन यह कोई फाइनल डायग्नोस्टिक टेस्ट नहीं है। यानी यह बता सकता है कि व्यक्ति में कैंसर की संभावना कितनी है, पर यह पुष्टि नहीं करता कि कैंसर है ही। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि किसी भी रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले विशेषज्ञ की राय लेना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि शुरुआती चरण में की गई जांच और सही इलाज ही जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।

ब्लड टेस्ट से कैंसर का पता लगना — कितनी सच्चाई?

हाल के वर्षों में मेडिकल साइंस ने काफी तरक्की की है। कई नए बायोमार्कर टेस्ट विकसित किए गए हैं जो रक्त में मौजूद असामान्य कोशिकाओं, प्रोटीन या जीन म्यूटेशन के आधार पर कैंसर का जोखिम बताते हैं।

लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि “सिर्फ ब्लड टेस्ट से कैंसर की 100% पुष्टि नहीं की जा सकती”।
ब्लड टेस्ट से सिर्फ यह संकेत मिल सकता है कि शरीर में कुछ असामान्य हो रहा है, लेकिन सही निदान के लिए बायोप्सी, MRI, CT स्कैन जैसी जांचें भी जरूरी होती हैं।

प्रोस्टेट कैंसर और HRC टेस्ट — कितना कारगर?

प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम कैंसर है, जो शुरुआती स्टेज में लगभग लक्षण-रहित होता है। पारंपरिक तौर पर इसे पहचानने के लिए PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट किया जाता है। अब धीरे-धीरे HRC (High-Risk Cancer) टेस्ट चर्चा में आ रहा है। यह एक मल्टी-बायोमार्कर ब्लड टेस्ट है जो जीनोमिक स्तर पर शरीर में हो रहे परिवर्तनों को स्कैन करता है और बताता है कि कैंसर का जोखिम कितना अधिक है।

डॉ. आकाश मेहता (ऑन्कोलॉजिस्ट, AIIMS, नई दिल्ली) बताते हैं —“HRC टेस्ट प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद कर सकता है, लेकिन यह ‘डायग्नोस्टिक टेस्ट’ नहीं, बल्कि ‘रिस्क असेसमेंट टेस्ट’ है। यानी यह बताता है कि किसी व्यक्ति में कैंसर होने की संभावना कितनी है, पर यह नहीं कि कैंसर है ही।”

HRC टेस्ट के फायदे

  • नॉन-इनवेसिव: सिर्फ ब्लड सैंपल से किया जाता है।
  • शुरुआती पहचान: लक्षणों से पहले जोखिम पकड़ने में मददगार।
  • जेनेटिक जानकारी: जीन म्यूटेशन या पारिवारिक कैंसर हिस्ट्री वाले लोगों के लिए उपयोगी।

सीमाएँ भी जानना ज़रूरी है

  • टेस्ट हमेशा 100% सटीक नहीं होता।
  • फॉल्स पॉज़िटिव या फॉल्स नेगेटिव की संभावना रहती है।
  • रिपोर्ट की व्याख्या डॉक्टर की निगरानी में होनी चाहिए।
  • अंतिम पुष्टि के लिए बायोप्सी जरूरी रहती है।

डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?

कैंसर की रोकथाम के लिए डॉक्टरों की राय एक ही है —“HRC या कोई भी ब्लड टेस्ट सिर्फ शुरुआती संकेत दे सकता है, अंतिम निदान नहीं। अगर परिवार में किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा है या उम्र 50 से ऊपर है, तो PSA टेस्ट के साथ-साथ नियमित स्वास्थ्य जांच ज़रूरी है।”

निष्कर्ष:

HRC टेस्ट को एक ‘सहायक उपकरण’ के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णय लेने वाले टेस्ट के रूप में। यह तकनीक मेडिकल क्षेत्र में एक नई आशा की किरण जरूर है, लेकिन कैंसर जैसे गंभीर रोग में सिर्फ ब्लड रिपोर्ट के भरोसे रहना खतरनाक साबित हो सकता है। सही निदान और समय पर इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह ही सबसे बड़ा “टेस्ट” है जिस पर भरोसा किया जाना चाहिए।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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