Bihar News: बिहार सरकार ने किसानों और युवाओं के लिए बड़ी सौगात दी है। मशरूम खेती (मशरूम फार्मिंग) पर 90 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है। सुपौल जिले में कई किसान इस योजना से जुड़कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। कम जगह और कम निवेश में मशरूम खेती से महीने में हजारों रुपये कमा रहे हैं। उद्यान विभाग की यह योजना ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रही है।
योजना में क्या मिल रहा?
मुख्यमंत्री उद्यान विकास योजना के तहत मशरूम खेती के लिए:
- यूनिट लागत पर 90% तक सब्सिडी।
- छोटी यूनिट (200 ट्रे) पर करीब 50-60 हजार रुपये सब्सिडी।
- ट्रेनिंग और बीज भी मुफ्त या सस्ते में।
- मार्केटिंग के लिए भी मदद।
सुपौल में कई किसानों ने 10×10 फीट के कमरे में मशरूम यूनिट लगाई है। 45 दिन में फसल तैयार हो जाती है। एक यूनिट से महीने में 20-30 हजार रुपये तक की कमाई हो रही है।
किसानों की सफलता की कहानी
एक किसान ने बताया कि पहले खेती से गुजारा मुश्किल था। अब मशरूम से अच्छी कमाई हो रही है। सब्जी की तरह मशरूम बाजार में बिक रहा है। होटल और दुकानों को सप्लाई कर रहे हैं।
एक महिला ने घर में यूनिट लगाई। वे कहती हैं, “घर बैठे कमाई हो रही है। बच्चे पढ़ रहे हैं।” कई युवा शहर जाने की बजाय गांव में ही मशरूम फार्मिंग कर रहे हैं।
विभाग की तैयारी
उद्यान विभाग सुपौल में कैंप लगाकर आवेदन ले रहा है। इच्छुक किसान या युवा विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। ट्रेनिंग सेंटर में सिखाया जाता है कि मशरूम कैसे उगाएं। बीज और सामग्री सब्सिडी पर दी जाती है।
जिला उद्यान पदाधिकारी ने कहा कि योजना से सुपौल में सैकड़ों यूनिट लग चुकी हैं। ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें। मशरूम की डिमांड ज्यादा है। कमाई अच्छी है।
Bihar News: क्यों फायदेमंद है मशरूम खेती?
- कम जगह में ज्यादा उत्पादन।
- 45 दिन में फसल।
- कम पानी और खाद।
- बाजार में अच्छी कीमत।
- स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद।
बिहार सरकार किसानों को परंपरागत खेती से हटाकर नई खेती की ओर ले जा रही है। मशरूम फार्मिंग इसका अच्छा उदाहरण है। सुपौल के किसान अब खुश हैं। उनकी आय बढ़ी है। परिवार की स्थिति सुधरी है।
यह योजना पूरे बिहार में चल रही है। सुपौल में सफलता मिलने से अन्य जिलों में भी उत्साह है। सरकार का यह कदम किसानों के लिए बड़ा तोहफा है। ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें और लाभ उठाएं।



