Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों से जुड़े लाखों शिक्षकों और करोड़ों छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ सकती है। राज्य में शनिवार को हाफ-डे यानी आधे दिन का कार्यदिवस करने की माँग अब जोर पकड़ने लगी है और इस पर जल्द ही कोई बड़ा फैसला होने की उम्मीद है।
पिछले कुछ दिनों से पूरे बिहार के शैक्षिक गलियारों में यही चर्चा है कि क्या एक बार फिर शनिवार को हाफ-डे की वह पुरानी व्यवस्था बहाल होगी जो दशकों से चली आ रही थी लेकिन दिसंबर 2023 में अचानक बंद कर दी गई थी। इस माँग को विधान परिषद में भी उठाया जा चुका है और शिक्षा मंत्री ने भी समीक्षा का भरोसा दिलाया है।
सबसे बड़ी खबर यह है कि माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली रवाना होने से पहले इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह राज्य के लगभग 6 लाख शिक्षकों और 1.70 करोड़ छात्रों के लिए एक बेहद बड़ी राहत होगी।
क्या था पुराना नियम और कब बदला?
यह समझना जरूरी है कि आखिर यह पूरा मामला क्या है। बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को हाफ-डे यानी आधे दिन काम करने की परंपरा दशकों से चली आ रही थी। यह व्यवस्था सिर्फ बिहार में नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में लागू थी।
लेकिन दिसंबर 2023 में शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी करके शनिवार को पूरे दिन यानी फुल-डे स्कूल चलाने का नियम लागू कर दिया। इस फैसले से शिक्षकों और अभिभावकों दोनों में नाराजगी फैली।
शिक्षकों का कहना था कि शनिवार को पूरे दिन काम करने से उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता। खासकर दूर-दराज के इलाकों में तैनात शिक्षकों के लिए यह और भी मुश्किल था क्योंकि शनिवार को देर से घर पहुँचने से उनके सामाजिक और पारिवारिक दायित्व प्रभावित होते थे।
विधान परिषद में उठी जोरदार माँग
इस माँग को अब एक बड़ा राजनीतिक समर्थन मिल गया है। बीते 16 फरवरी 2026 को बिहार विधान परिषद में कोसी से जदयू के एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. संजय कुमार सिंह और करीब 20 अन्य सदस्यों ने एक सूचना के माध्यम से सरकार का ध्यान इस मुद्दे पर आकर्षित किया।
इन सदस्यों ने सदन में तर्क दिया कि दशकों से चली आ रही हाफ-डे की व्यवस्था को अचानक फुल-डे में बदलने से शिक्षकों पर अनावश्यक बोझ पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत दूसरे शनिवार की छुट्टी का जो प्रावधान है, वह भी अभी तक लागू नहीं किया गया है। यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। सदन में इस माँग ने जोर पकड़ा और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को इस पर अपना रुख साफ करना पड़ा।
शिक्षा मंत्री ने दिया समीक्षा का भरोसा
विधान परिषद में उठी माँग के जवाब में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में स्पष्ट किया कि शनिवार को स्कूलों में हाफ-डे करने की माँग पर अधिकारियों की एक टीम पूरी तरह से समीक्षा करेगी। इस समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार अपना अंतिम निर्णय लेगी।
यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे पहले सरकार ने इस माँग पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी थी। शिक्षा मंत्री का समीक्षा का आश्वासन यह संकेत देता है कि सरकार इस माँग को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला आ सकता है। शिक्षा मंत्री के अनुसार अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो इससे प्रदेश के करीब 1.70 करोड़ छात्रों और 6 लाख शिक्षकों को सीधा फायदा होगा।
शिक्षक संघ का प्रस्ताव, बच्चों के मानसिक विकास को प्राथमिकता
इस पूरे मामले में शिक्षक संघ की भूमिका भी अहम रही है। बिहार शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ आनंद कौशल सिंह ने SCERT यानी स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग को लिखित सुझाव भेजे थे।
यह सुझाव बिहार पाठ्यचर्या की रूप-रेखा यानी BCF-2025 के निर्माण के लिए माँगे गए थे। आनंद कौशल सिंह ने अपने सुझाव में शनिवार को हाफ-डे करने की माँग को बच्चों के मानसिक विकास से जोड़ा।
उनका तर्क था कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें सप्ताह में कम से कम एक दिन थोड़ी राहत मिले। लगातार छह दिन पूरे दिन स्कूल जाना बच्चों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाता है। शनिवार को हाफ-डे करने से बच्चों को अपनी रचनात्मक गतिविधियों, खेलकूद और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा जो उनके संपूर्ण विकास के लिए जरूरी है।
दूर-दराज के शिक्षकों की खास परेशानी
इस पूरे मामले में एक और पहलू है जिस पर ध्यान देना जरूरी है। बिहार के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में शिक्षक दूर-दूर के इलाकों में तैनात हैं। इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो अपने घर से बहुत दूर रहते हैं और सप्ताहांत में घर जाते हैं।
जब शनिवार को पूरे दिन स्कूल होता है तो ये शिक्षक बहुत देर से घर पहुँचते हैं और कभी-कभी उसी रात घर जाना संभव नहीं होता। इससे उनका पारिवारिक जीवन प्रभावित होता है। शनिवार को हाफ-डे होने से ये शिक्षक दोपहर को ही निकल सकेंगे और समय पर घर पहुँच सकेंगे।
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