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निकाय चुनाव में BJP नहीं करेगी प्रत्याशियों की घोषणा, मजबूत उम्मीदवारों को मिलेगा आंतरिक समर्थन

Jharkhand Nikay Chunav: झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को गोविंदपुर में स्पष्ट किया कि चूंकि यह चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहे हैं इसलिए पार्टी आधिकारिक रूप से प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं करेगी।

आधिकारिक घोषणा नहीं, आंतरिक समर्थन की रणनीति

Jharkhand Nikay Chunav: BJP Leader Babulal Marandi
Jharkhand Nikay Chunav: BJP Leader Babulal Marandi

समाजसेवी शंभूनाथ अग्रवाल के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा के सांसद और विधायक भी किसी प्रत्याशी के लिए खुलकर प्रचार नहीं करेंगे। हालांकि पार्टी कार्यकर्ताओं को आंतरिक रूप से समझाने का प्रयास किया जाएगा कि दल समर्थित एक ही प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहे।

उन्होंने बताया कि यदि किसी वार्ड या निकाय से एक से अधिक भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुनाव लड़ने की स्थिति बनती है तो पार्टी मजबूत प्रत्याशी का आकलन करेगी और उसे आंतरिक समर्थन देगी। इस रणनीति से पार्टी वोटों के बंटवारे को रोकना चाहती है।

दलीय आधार पर चुनाव की मांग नहीं मानी गई

मरांडी ने कहा कि भाजपा लगातार मांग कर रही थी कि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराए जाएं लेकिन हेमंत सोरेन सरकार ने इस मांग को नहीं माना। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चुनाव दलीय आधार पर होते तो भाजपा सभी निकायों के लिए अलग-अलग प्रत्याशियों के नाम की आधिकारिक घोषणा करती और पार्टी चिन्ह पर चुनाव लड़ाती।

चूंकि सरकार ने निर्दलीय चुनाव कराने का फैसला किया है इसलिए पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब हर निकाय में मजबूत प्रत्याशी को आंतरिक रूप से समर्थन देने का निर्णय लिया गया है।

कार्यकर्ताओं में टकराव रोकने की कोशिश

भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी की पूरी कोशिश रहेगी कि कार्यकर्ताओं के बीच किसी तरह का टकराव न हो। सभी मिलजुलकर चुनाव लड़ें और पार्टी का एक ही व्यक्ति प्रत्येक वार्ड से चुनाव मैदान में हो। इसके लिए आपसी तालमेल बिठाया जाएगा और रायशुमारी के बाद मजबूत प्रत्याशी का समर्थन किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्थान से भाजपा के कई लोगों ने नामांकन पत्र भर दिया है तो पार्टी कोशिश करेगी कि मजबूत प्रत्याशी के पक्ष में अन्य सभी लोग अपना नाम वापस ले लें। यह फैसला स्थानीय स्तर पर पार्टी संगठन के परामर्श से लिया जाएगा।

उच्च न्यायालय के आदेश से हो रहे चुनाव

मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार नगर निकाय चुनाव कराने के पक्ष में नहीं थी। विभिन्न निकायों के कार्यकाल की समाप्ति के पांच वर्ष बीत चुके थे लेकिन सरकार ने चुनाव नहीं कराए। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही अब चुनाव हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नगर निकाय का चुनाव होना सराहनीय है क्योंकि इससे शहर के लोगों को निकायों में प्रतिनिधित्व मिलेगा। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए यह जरूरी है कि समय पर चुनाव हों और जनता को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिले।

राज्यसभा चुनाव पर टिप्पणी

पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में एक मत से पराजित उद्योगपति प्रदीप संथालिया को फिर से प्रत्याशी बनाए जाने के सवाल पर मरांडी ने कहा कि अभी राज्यसभा चुनाव नहीं हो रहे हैं। जब चुनाव होगा तब देखा जाएगा कि पार्टी किसके नाम पर विचार करती है। इस संबंध में अभी कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।

राज्यसभा सीट के लिए भाजपा के पास बहुमत नहीं होने के सवाल पर उन्होंने दिलचस्प जवाब देते हुए कहा कि बहुमत जुगाड़ किया जाता है। चुनाव के समय पार्टी इस पर विचार करती है। यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

पार्टी नेताओं की उपस्थिति

गोविंदपुर पहुंचने पर उद्योगपति प्रदीप संथालिया, भाजपा नेता नंदलाल अग्रवाल और बलराम अग्रवाल ने मरांडी का स्वागत किया। उन्होंने समाजसेवी शंभूनाथ अग्रवाल की दिवंगत माता को श्रद्धांजलि दी और श्राद्ध कर्म में भाग लिया।

इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष मोहन कुंभकार, घनश्याम ग्रोवर, ओमप्रकाश बजाज, रामप्रसाद अग्रवाल, विजय अग्रवाल, कमल अग्रवाल, किशन अग्रवाल, निताई रजवार, बाबू भगत सहित कई पार्टी नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

Jharkhand Nikay Chunav: चुनावी रणनीति का महत्व

भाजपा की यह रणनीति राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निर्दलीय चुनाव में भी पार्टी अपने प्रभाव को बनाए रखना चाहती है लेकिन आधिकारिक रूप से प्रत्याशियों की घोषणा न करके वह चुनाव आयोग के नियमों का पालन भी कर रही है।

आंतरिक समर्थन की यह रणनीति पार्टी को लचीलापन देती है और स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों को आगे लाने में मदद करती है। हालांकि इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी कार्यकर्ता कितनी एकजुटता दिखाते हैं और क्या वे एक ही प्रत्याशी के पीछे एकजुट हो पाते हैं।

निकाय चुनावों में भाजपा की यह रणनीति झारखंड की राजनीति में नया अध्याय खोल सकती है और अन्य दलों को भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर सकती है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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