नई दिल्ली: भारत में तुर्की और अज़रबैजान के उत्पादों और पर्यटन का बहिष्कार करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले इन दोनों देशों के खिलाफ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने व्यापारियों और आम जनता से अपील की है कि वे तुर्की और अज़रबैजान के सामानों का और वहां के पर्यटन स्थलों का पूरी तरह बहिष्कार करें। इससे पहले कैट ने चीन के सामानों के खिलाफ भी सफल बहिष्कार अभियान चलाया था और अब इसी तरह की मुहिम तुर्की और अज़रबैजान के खिलाफ शुरू की गई है।
व्यापार और पर्यटन पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव
कैट ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ट्रैवल और टूर ऑपरेटरों के साथ मिलकर काम करने की योजना बनाई है। संगठन का मानना है कि भारतीय पर्यटक यदि तुर्की और अज़रबैजान की यात्रा बंद कर देते हैं, तो इन देशों की अर्थव्यवस्था, खासकर पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान होगा।
2024 में तुर्की में लगभग 62.2 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 3 लाख भारतीय थे। भारतीय पर्यटकों ने तुर्की में करीब 291.6 मिलियन डॉलर खर्च किए। वहीं, अज़रबैजान में 2024 में 2.6 मिलियन विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 2.5 लाख भारतीय थे और उन्होंने 308.6 मिलियन डॉलर खर्च किए।
ट्रैवल कंपनियों ने भी लिया समर्थन
EaseMyTrip और Go Homestays जैसी प्रमुख ट्रैवल कंपनियों ने तुर्की और अज़रबैजान के लिए टूर पैकेज बंद कर दिए हैं और टर्किश एयरलाइंस के साथ अपनी साझेदारी भी खत्म कर दी है। इससे हजारों भारतीय यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है।
आगे की रणनीति पर होगी बैठक
कैट की ओर से 16 मई को नई दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ट्रेड डीलर्स आयोजित की जा रही है, जिसमें इस बहिष्कार अभियान की आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
तुर्की और अज़रबैजान के खिलाफ भारत में बहिष्कार अभियान तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा असर इन देशों के पर्यटन और व्यापार क्षेत्र पर पड़ेगा, जिससे उन्हें करोड़ों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह अभियान पाकिस्तान के समर्थन के खिलाफ भारत का एक मजबूत आर्थिक संदेश भी माना जा रहा है।

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