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चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन से नई पार्टी बनाने तक की पूरी मार्गदर्शिका

New Delhi: प्रशांत किशोर ने साल 2024 में जनसुराज पार्टी को लॉन्च करके देश की सियासत में हलचल मचाई थी और BJP-कांग्रेस समेत कई पार्टियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ गई थी. साल 2025 में ‘लॉटरी किंग’ सैनटिगो मार्टिन राजनीति में एंट्री करने जा रहे हैं. वे आज 14 दिसंबर दिन रविवार को अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं. उनकी पार्टी चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड हो चुकी है. पार्टी के नाम से लेकर अध्यक्ष तक का नाम फाइनल हो चुका है.

अनिवार्य है चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन

भारत में इस समय BJP-कांग्रेस 2 सबसे बड़े राजनीतिक दल हैं. इनके अलावा कई राजनीतिक दल भारतीय चुनाव आयोग (ECI) में रजिस्टर्ड हैं और उन्हें नेशनल पार्टी का दर्जा मिला हुआ है, जो केंद्रीय और राज्य स्तर पर चुनाव भी लड़ते हैं. वहीं कई राजनीतिक दल ऐसे हैं, जो रजिस्टर्ड हैं, लेकिन चुनाव नहीं लड़ते हैं. वहीं चुनाव आयोग के पास रजिस्ट्रेशन के बिना न कोई राजनीतिक दल का ऐलान कर सकता है और न ही चुनाव लड़ सकता है. वहीं चुनाव आयोग ही किसी दल को राष्ट्रीय दल होने का दर्जा देगा.

क्या है राजनीति दल के गठन की प्रक्रिया?

राजनीतिक दल बनाने के लिए सबसे पहले पार्टी का नाम तय करें, जो आप खुद रख सकते हैं, लेकिन अगर चुनाव आयोग वे आपके द्वारा प्रस्तावित नाम किसी और को दिया होगा तो वह नाम नहीं मिलेगा, बल्कि दूसरा नाम देना होगा, जो दूसरे के पास भी न हो.

नाम तय करने के बाद पार्टी का संविधान बनाना होगा. इसमें पार्टी का नाम और काम करने का तरीका बताना होगा. पार्टी अध्यक्ष के चुनाव की प्रतिक्रिया बतानी होगी? संविधान में पार्टी के उन लोगों के बारे में बताना होगा और साइन भी कराने होंगे, जो अहम पद संभालेंगे. पार्टी के बैंक अकाउंट की डिटेल भी बतानी होगी.

नाम-संविधान के बाद लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 29A के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होगा. इसके लिए रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरकर जमा कराना होगा. आवेदन-पत्र के पास संविधान की कॉपी, प्रस्तावित नाम और चुनाव चिह्न बताना होगा

राजनीतिक दल के नाम को 2 नेशनल और 2 रीजनल समाचार पत्रों में छपवाना होगा, ताकि अगर किसी को आपत्ति हो तो वह पता चले और आपत्ति के अनुसार संधोधन किए जाएं. आवेदन के स्टेट्स को

रजिस्टर्ड पार्टी को मिलती हैं ये सुविधाएं

चुनाव आयोग के पास राजनीतिक दल का रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद चुनाव चिह्न के आवंटन की सूची में शामिल हो जाते हैं. अगर तय मानक पूरे किए जाते हैं तो राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाता है. चंदा ले सकत हैं और इनकम टैक्स भी नहीं भरना पड़ता. चंदा देने वाले को भी डोनेट की गई रकम पर टैक्स में छूट मिलती है.

निष्कर्ष:

भारत में कोई भी नई राजनीतिक पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने के लिए उसका भारतीय चुनाव आयोग (ECI) में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। पार्टी गठन की प्रक्रिया में नाम तय करना, संविधान बनाना, प्रमुख पदाधिकारियों का विवरण, बैंक अकाउंट की जानकारी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29Ay के तहत आवेदन शामिल है। प्रस्तावित नाम और चुनाव चिह्न की सार्वजनिक सूचना अखबारों में देना भी जरूरी होता है।रजिस्ट्रेशन के बाद पार्टी को चुनाव चिह्न आवंटन, चंदा लेने और टैक्स छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं, तथा तय मानकों पर राज्य या राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी प्राप्त हो सकता है। यही प्रक्रिया भारतीय राजनीति में नई पार्टियों के वैधानिक प्रवेश और संचालन की बुनियाद है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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