वाराणसी –शहर के एक हाईराइज सोसाइटी में उस समय हड़कंप मच गया जब एक फ्लैट में रसोई गैस सिलेंडर से लीकेज होने के कारण अचानक आग लग गई। इस हादसे में फ्लैट में रहने वाले बुजुर्ग दंपती गंभीर रूप से झुलस गए। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि फ्लैट के कमरों में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने किसी तरह आग पर काबू पाया। घायल दंपती को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
हादसा कैसे हुआ?
घटना ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक नामी सोसाइटी की है। बुजुर्ग दंपती रामप्रसाद शर्मा (उम्र 72 साल) और उनकी पत्नी सुशीला शर्मा (उम्र 68 साल) अकेले फ्लैट में रहते थे। उनके बच्चे बाहर नौकरी करते हैं। शाम के समय सुशीला जी रसोई में चाय बना रही थीं। इसी दौरान गैस सिलेंडर की रेगुलेटर पाइप में लीकेज हो गया। गैस भरते ही कमरे में फैल गई।रामप्रसाद जी जब रसोई में आए तो लाइट जलाने के लिए स्विच ऑन किया। छोटी सी चिंगारी से गैस ने आग पकड़ ली। देखते ही देखते लपटें पूरे फ्लैट में फैल गईं। दंपती आग बुझाने की कोशिश करने लगे, लेकिन आग की तीव्रता इतनी थी कि दोनों बुरी तरह झुलस गए। रामप्रसाद जी के हाथ और चेहरा ज्यादा जल गया, जबकि सुशीला जी की पीठ और पैरों पर गंभीर जलन हुई।पड़ोसियों ने धुएं और चीखें सुनकर तुरंत दरवाजा खटखटाया। किसी तरह दंपती को बाहर निकाला गया। फ्लैट के अंदर रखे फर्नीचर, कपड़े, बिस्तर और इलेक्ट्रॉनिक सामान सब जलकर खाक हो गया। अनुमान है कि लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई
सोसाइटी के गार्ड ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। ग्रेटर नोएडा फायर स्टेशन से तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर ऑफिसर प्रदीप कुमार ने बताया कि आग गैस लीकेज से लगी थी। ऊपरी मंजिल पर होने के कारण धुआं पूरे बिल्डिंग में फैल गया था। फायरकर्मियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। अच्छी बात यह रही कि आग पड़ोस के फ्लैटों तक नहीं फैली। सोसाइटी के अन्य निवासियों को सुरक्षित निकाल लिया गया।पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सिलेंडर की पाइप पुरानी हो चुकी थी, जिससे लीकेज हुआ। गैस कंपनी के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और सिलेंडर को सुरक्षित हटाया।
डॉक्टरों ने क्या कहा?
घायल दंपती को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जलन ज्यादा होने के कारण उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, रामप्रसाद जी को 40 प्रतिशत और सुशीला जी को 35 प्रतिशत जलन हुई है। दोनों की हालत खतरे से बाहर है, लेकिन इलाज कुछ दिन चलेगा। स्किन ग्राफ्टिंग की जरूरत पड़ सकती है। दंपती के बेटे-बेटी को सूचना दे दी गई है, वे अस्पताल पहुंच गए हैं।
ऐसे हादसे क्यों होते हैं?
यह कोई पहला मामला नहीं है। ग्रेटर नोएडा और नोएडा में पहले भी गैस सिलेंडर लीकेज से कई हादसे हो चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में लापरवाही कारण बनती है। पुरानी रबर पाइप, खराब रेगुलेटर या सिलेंडर को बंद जगह में रखना खतरनाक होता है। गैस लीक होने पर अगर स्विच ऑन किया जाए या माचिस जलाई जाए तो आग भड़क जाती है।फायर विभाग के अधिकारी कहते हैं कि घरों में गैस डिटेक्टर लगाना चाहिए। सिलेंडर की पाइप हर छह महीने में बदलनी चाहिए। खाना बनाते समय ध्यान रखें कि रेगुलेटर ठीक से बंद हो। अगर गैस की बदबू आए तो तुरंत खिड़कियां खोलें और बाहर निकलें। आग बुझाने की कोशिश न करें, बल्कि फायर ब्रिगेड को कॉल करें।
पड़ोसियों और सोसाइटी की प्रतिक्रिया
सोसाइटी के निवासी बहुत डरे हुए हैं। एक पड़ोसी ने बताया, “धुआं देखकर लगा पूरा टावर जल जाएगा। बुजुर्ग अंकल-आंटी अच्छे लोग हैं, उन्हें देखकर दुख हुआ।” सोसाइटी मैनेजमेंट ने सभी फ्लैट्स में सेफ्टी चेकिंग का ऐलान किया है। वे गैस कंपनी से मीटिंग करके पाइपलाइन चेक करवाएंगे।
निष्कर्ष :
यह हादसा एक बार फिर हमें सतर्क करता है कि घरेलू गैस सिलेंडर कितना खतरनाक हो सकता है। छोटी सी लापरवाही जान ले सकती है और संपत्ति नष्ट कर सकती है। हमें नियमित रूप से सिलेंडर और उसके सामान की जांच करानी चाहिए। सरकार और गैस कंपनियों को भी जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। बुजुर्ग दंपती जल्द ठीक हों, यही कामना है। ऐसे हादसों से बचने के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। अगर हर घर में सुरक्षा के नियमों का पालन हो तो ऐसे दर्दनाक वाकये रोके जा सकते हैं।



