Court Update: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मद्रास हाईकोर्ट की जज जस्टिस जे निशा बानू को तत्काल प्रभाव से कोर्ट ज्वाइन करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 13 दिसंबर 2025 को आया, जब जस्टिस बानू लंबे समय से छुट्टी पर थीं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी अनुपस्थिति पर चिंता जताई थी और राष्ट्रपति को रिपोर्ट सौंपी थी। छोटे शहरों और गांवों के लोग जो न्याय व्यवस्था पर भरोसा करते हैं, वे इस फैसले से राहत महसूस कर रहे हैं। जस्टिस बानू की वापसी से मद्रास हाईकोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई तेज होगी। यह मामला न्यायिक पारदर्शिता और जजों की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
जस्टिस जे निशा बानू का प्रोफाइल
जस्टिस जे निशा बानू मद्रास हाईकोर्ट की स्थायी जज हैं। उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ और उन्होंने लॉ की डिग्री मद्रास यूनिवर्सिटी से ली। 2003 में वे मद्रास हाईकोर्ट में वकील बनीं और कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की। 2018 में उन्हें अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया और 2020 में स्थायी जज बनाया गया। वे महिला जजों में सीनियर हैं और कई संवेदनशील मामलों की सुनवाई कर चुकी हैं। जस्टिस बानू को सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों में विशेषज्ञता है। उनकी अनुपस्थिति से कोर्ट में जजों की कमी हो गई थी।
छुट्टी का मामला: लंबी अनुपस्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
जस्टिस बानू लंबे समय से कोर्ट नहीं आ रही थीं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी अनुपस्थिति पर रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में कहा गया कि वे व्यक्तिगत कारणों से छुट्टी पर हैं, लेकिन लंबी अनुपस्थिति न्यायिक कार्य को प्रभावित कर रही है। कॉलेजियम ने राष्ट्रपति को सिफारिश की कि जस्टिस बानू को तुरंत ज्वाइन करने का निर्देश दिया जाए। राष्ट्रपति ने यह आदेश जारी कर दिया। अब वे जल्द कोर्ट ड्यूटी पर लौटेंगी।
राष्ट्रपति के निर्देश का महत्व
राष्ट्रपति का यह निर्देश न्यायिक जवाबदेही को मजबूत करता है। मद्रास हाईकोर्ट में कई महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं, जिनमें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं। जस्टिस बानू की वापसी से सुनवाई तेज होगी। यह फैसला दिखाता है कि जजों की अनुपस्थिति पर सख्त नजर रखी जा रही है। न्यायपालिका की छवि पर सवाल न उठें, इसके लिए यह कदम जरूरी था।



