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रामलला के पुराने पुजारियों का वेतन बढ़ा – वो सम्मान जो सालों की सेवा को मिला

वाराणसी: जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के पूर्व से विराजमान रामलला की सेवा में संलग्न रहे पुराने पुजारियों का भी वेतन बढ़ गया। इनके वेतन में डेढ़ से दो हजार रुपये तक की वृद्धि हुई है, परंतु सभी अर्चकों का पारिश्रमिक एक समान नहीं हो पाया है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नवंबर से चारो पुराने अर्चकों के वेतन में बढ़ोतरी कर दी है। अब उन्हें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की कटौती के साथ लगभग साढ़े 36 हजार रुपये मिलने लगा है। यद्यपि नए अर्चकों का पारिश्रमिक अभी भी इनसे अधिक है।

चार पुराने अर्चकों को अब साढ़े 36 हज़ार रुपये मिल रहे हैं

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चारों पुराने पुजारियों के वेतन में बढ़ोतरी की। EPF कटौती के बाद भी अब उन्हें लगभग साढ़े 36 हज़ार रुपये मिलने लगे हैं। ये वो लोग हैं जो सालों से रामलला की सेवा में लगे रहे। “जो सालों चुपचाप सेवा करते रहे, आज उनका सम्मान हो रहा है।”

नए और पुराने अर्चकों में अभी भी फर्कImage result for राम मंदिर pujari

नए अर्चकों का पारिश्रमिक अभी भी इनसे ज़्यादा है। ट्रस्ट ने पुराने पुजारियों को बढ़ोतरी दी, लेकिन सबका वेतन एक समान नहीं हो पाया। “सम्मान की शुरुआत हो गई है, पूरी बराबरी का इंतज़ार अभी बाकी है।”

सम्मान इंसान को नई ताकत देता है

मनोविज्ञान में “रिकग्निशन” कहते हैं – जब सालों की मेहनत को मान्यता मिलती है, तो इंसान में नई ऊर्जा आती है। ये पुराने पुजारी सालों से सेवा कर रहे थे, शायद कभी शिकायत नहीं की। आज वेतन बढ़ा तो उनके दिल में सुकून आया होगा। “जब मेहनत को देखा जाता है, तो इंसान और मेहनत करने लगता है।”

ट्रस्ट का ये कदम – सेवा करने वालों के लिए उम्मीद

ट्रस्ट ने नवंबर से बढ़ोतरी लागू कर दी। ये सिर्फ़ पैसे नहीं, सालों की निष्ठा का सम्मान है। “जो चुपचाप सेवा करते हैं, उन्हें याद रखना ही सबसे बड़ा धन्यवाद है।”

रामलला की सेवा में लगे लोगों का दिलImage result for राम मंदिर pujari

सोचिए उन पुराने पुजारियों का – सालों तक छोटे वेतन में सेवा की, कभी शिकायत नहीं की। आज जब वेतन बढ़ा, तो शायद आँखें नम हो गई होंगी। “सेवा वो है जो बिना उम्मीद के की जाए, लेकिन जब उम्मीद पूरी हो, तो दिल भर आता है।”

आखिरी बात –

राम मंदिर बना, दुनिया ने देखा। लेकिन वो पुराने पुजारी जो पहले से सेवा में थे – उनका सम्मान भी ज़रूरी था। ट्रस्ट ने ये कदम उठाकर याद दिलाया – “सच्ची सेवा करने वाले कभी भुलाए नहीं जाते। उनका सम्मान देर से मिले, तो भी मिलता है।”

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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