Jharkhand Budget Session: झारखंड विधानसभा में साइबर अपराध से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं जो राज्य की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हेमलाल मुर्मू ने शनिवार को अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से साइबर अपराध में कम दोषसिद्धि दर पर सवाल उठाए।
चौंकाने वाले आंकड़े

वर्ष 2023 से 2025 तक झारखंड में साइबर अपराध के कुल 3,804 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में पुलिस ने 3,057 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पुलिस ने लगभग 80 प्रतिशत मामलों में गिरफ्तारियां कीं।
हालांकि असली चिंता का विषय यह है कि इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के बावजूद केवल 55 आरोपियों को ही दोषसिद्ध किया जा सका। यह गिरफ्तार किए गए आरोपियों का मात्र 1.8 प्रतिशत है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि 521 आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
विधायक के सवाल
हेमलाल मुर्मू ने प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रसाद द्वारा दी गई इस जानकारी पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के बाद भी लोग दोषमुक्त हो गए। यह या तो पुलिस की जांच में कमी को दर्शाता है या फिर निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करने की प्रवृत्ति को।
विधायक ने तीखे सवाल उठाए: क्या सबूत जुटाने में पुलिस विफल हो रही है या फिर पुलिस निर्दोषों को गिरफ्तार कर रही है? उन्होंने कहा कि पुलिस पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा पाती इसलिए आरोपी अदालत से बरी हो जाते हैं।
जवाबदेही की मांग
विधायक ने सरकार से पूछा कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को दंडित करने की कोई कार्य योजना है या नहीं। उन्होंने पुलिस के प्रशिक्षण और जन जागरूकता कार्यक्रमों की भी जानकारी मांगी।
यह सवाल महत्वपूर्ण है क्योंकि जब इतनी बड़ी संख्या में मामले दर्ज होते हैं लेकिन दोषसिद्धि नहीं होती तो इससे आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाता है।
मंत्री का जवाब
प्रभारी मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अपने जवाब में कहा कि सभी साइबर थानों में प्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 95 प्रतिशत अपराधियों को पकड़ा गया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि कई साइबर अपराध विदेश से संचालित हो रहे हैं जिससे जांच में कठिनाई आती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि साइबर अपराध को रोकने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।
समस्या की जड़
कम दोषसिद्धि दर के कई कारण हो सकते हैं:
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कमजोर जांच: साइबर अपराध की जांच के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। संभव है कि पुलिस के पास पर्याप्त प्रशिक्षित जनशक्ति और संसाधन नहीं हैं।
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डिजिटल साक्ष्य संग्रहण में कमी: साइबर अपराध में डिजिटल साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें वैध तरीके से एकत्र करना और संरक्षित रखना जरूरी है। इसमें कोई कमी होने पर अदालत में मामला कमजोर पड़ जाता है।
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जल्दबाजी में गिरफ्तारी: दबाव में आकर पुलिस कभी-कभी बिना पर्याप्त सबूत के गिरफ्तारियां कर लेती है जो बाद में टिक नहीं पातीं।
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अंतरराष्ट्रीय पहलू: जैसा कि मंत्री ने कहा, कई साइबर अपराध विदेश से संचालित होते हैं जिससे जांच जटिल हो जाती है।
व्यापक प्रभाव
यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि:
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नागरिकों का विश्वास: जब अपराधी बार-बार बच निकलते हैं तो नागरिकों का पुलिस और न्याय व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाता है।
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अपराध को बढ़ावा: कम दोषसिद्धि दर अपराधियों को प्रोत्साहित करती है क्योंकि उन्हें लगता है कि सजा मिलने की संभावना कम है।
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संसाधनों की बर्बादी: गिरफ्तारी से लेकर मुकदमे तक पूरी प्रक्रिया में भारी संसाधन लगते हैं। जब दोषसिद्धि नहीं होती तो यह बर्बादी है।
Jharkhand Budget Session: जरूरी सुधार
इस स्थिति को सुधारने के लिए:
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साइबर क्राइम में प्रशिक्षण को मजबूत करना होगा
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डिजिटल फोरेंसिक लैब की क्षमता बढ़ानी होगी
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अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करना होगा
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जवाबदेही तय करनी होगी
यह मुद्दा केवल झारखंड का नहीं बल्कि पूरे देश में साइबर अपराध से निपटने की चुनौती को दर्शाता है



