अमेरिका :विश्व प्रसिद्ध तबला वादक *उस्ताद जाकिर हुसैन* का 73 वर्ष की आयु में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उस्ताद जाकिर हुसैन, जिन्हें भारतीय संगीत के सबसे महान वादकों में से एक माना जाता था, ने अपने जीवन में अनगिनत पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए, जिनमें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान *पद्म विभूषण* भी शामिल है।
स्वास्थ्य समस्याएँ और अंतिम दिन
उस्ताद जाकिर हुसैन लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थे। पिछले कुछ महीनों से उनका इलाज सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में चल रहा था। उनकी स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें ICU में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने 15 दिसंबर को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने न केवल उनके प्रशंसकों को बल्कि संगीत प्रेमियों को भी गहरा दुख पहुँचाया।
मुख्यमंत्री का शोक संदेश
झारखंड के मुख्यमंत्री *हेमंत सोरेन* ने उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “यह देश की कला, संगीत और संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है।” उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके परिवार को इस कठिन समय में सहनशक्ति प्रदान करने की कामना की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उस्ताद हुसैन ने भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई थी और उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा।
संगीत में योगदान
उस्ताद जाकिर हुसैन का जन्म 9 मार्च 1949 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने अपने पिता, उस्ताद अल्ला रक्खा से तबला सीखना शुरू किया और जल्दी ही अपनी प्रतिभा के लिए पहचाने जाने लगे। उन्होंने न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत में बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उनकी अद्वितीय शैली और तकनीक ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशेष स्थान दिलाया।
उस्ताद हुसैन ने कई प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ काम किया, जिसमें जॉर्ज हैरिसन, मिक जैगर और रॉबर्ट प्लांट शामिल हैं। उन्होंने विभिन्न शैलियों को अपनाते हुए भारतीय संगीत को एक नई दिशा दी और इसे विश्व स्तर पर लोकप्रिय बनाया।
विरासत
उस्ताद जाकिर हुसैन की विरासत उनके संगीत के माध्यम से जीवित रहेगी। उनके द्वारा स्थापित मानक और उनकी कला की गहराई आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। उनकी शिक्षाएँ और संगीत प्रेमियों के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।
उनके निधन से भारतीय संगीत जगत ने एक महान कलाकार खो दिया है, लेकिन उनकी धुनें और रचनाएँ हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी। उस्ताद जाकिर हुसैन का योगदान न केवल भारतीय संस्कृति बल्कि वैश्विक संगीत परिदृश्य में भी अमिट रहेगा।

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