West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। छोटे-छोटे विपक्षी दल और कुछ बागी नेता अब TMC और BJP के बीच मुस्लिम वोटों को बांटने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 27% है, लेकिन कई विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा 35% से 66% तक पहुंच जाता है। ऐसे में कम से कम 120 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पिछले दो विधानसभा चुनावों (2016 और 2021) में तृणमूल कांग्रेस को मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा मिला था। 2021 में TMC ने 213 सीटें जीतीं जबकि BJP को 77 सीटें मिलीं। दोनों पार्टियों के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा 70:30 के आसपास रहा। लेकिन अब इस द्विध्रुवीय समीकरण को तोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कांग्रेस, CPI(M), ISF, AIMIM और कुछ बागी नेताओं के बीच अलग-अलग स्तर पर बातचीत चल रही है।
कांग्रेस ने CPI(M) से नाता तोड़ा, अकेले लड़ने का फैसला
गुरुवार को कांग्रेस ने एक बड़ा फैसला लिया। पार्टी ने पुराने सहयोगी CPI(M) के साथ गठबंधन तोड़ दिया और 2026 में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। यह फैसला मुरशिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में कांग्रेस की पुरानी पकड़ को मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।
CPI(M) राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि कांग्रेस का यह फैसला जमीनी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में मुरशिदाबाद और मालदा में कांग्रेस-वाम गठबंधन ने TMC को कड़ी चुनौती दी थी। 2023 के सागरदिघी उपचुनाव में हमने TMC को हराया था, लेकिन बाद में TMC ने हमारे विजेता विधायक को अपने साथ मिला लिया।”
सलीम ने आगे कहा कि वे सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर से भी मुलाकात की। कबीर TMC से निलंबित होने के बाद अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं।
ISF और AIMIM भी सक्रिय, बड़ा मोर्चा बनाने की कोशिश
भारतीय सेक्युलर फ्रंट (ISF) के नेता नवसाद सिद्दीकी ने पिछले हफ्ते कहा कि वे एक बार फिर वाम दलों और अन्य धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “TMC 70:30 के द्विध्रुवीय समीकरण को बनाए रखना चाहती है, लेकिन हम सभी सेक्युलर ताकतों को एक साथ लाना चाहते हैं।”
AIMIM के बंगाल अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने भी कहा कि उनकी पार्टी कई दलों से संपर्क में है। 2021 में AIMIM ने बंगाल में चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में 21 सदस्य TMC में शामिल हो गए थे। अब AIMIM फिर से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
मुरशिदाबाद-मालदा में 50% से ज्यादा मुस्लिम आबादी

2011 की जनगणना के अनुसार मुस्लिम आबादी इन जिलों में बहुत ज्यादा है:
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मुरशिदाबाद: 66.28%
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मालदा: 51.27%
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उत्तर दिनाजपुर: 49.92%
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दक्षिण 24 परगना: 35.57%
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बीरभूम: 37.06%
इन जिलों में कुल 50 से ज्यादा विधानसभा सीटें हैं। यहां मुस्लिम वोटों का बंटवारा किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
TMC और BJP की चिंता
TMC के लिए मुस्लिम वोट बैंक बहुत महत्वपूर्ण है। पार्टी को डर है कि अगर वोट बंटा तो कई सीटें कम हो सकती हैं। दूसरी तरफ BJP भी इस बंटवारे से फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है। BJP का मानना है कि मुस्लिम वोट बंटने से TMC को नुकसान होगा और कुछ सीटों पर उनका पलड़ा भारी हो सकता है।
छोटे दलों की रणनीति
छोटे दल और बागी नेता अब एक मंच बनाने की कोशिश में हैं। उनका लक्ष्य TMC और BJP दोनों को नुकसान पहुंचाना है। वे कहते हैं कि मुस्लिम वोटर अब TMC से नाराज हैं। TMC के स्थानीय नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।
कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी कहा कि समुदाय में बदलाव आ रहा है। वेस्ट बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने कहा कि TMC के जमीनी स्तर के नेताओं की मनमानी से मुस्लिम वोटर नाराज हैं। AIMIM के आने से वोट बंट सकता है।
West Bengal Politics: चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव संभव
2021 में TMC ने 213 और BJP ने 77 सीटें जीती थीं। अगर मुस्लिम वोटों का बंटवारा हुआ तो कई सीटों का रिजल्ट बदल सकता है। छोटे दल 10-15 सीटें भी जीत लें तो गठबंधन की सरकार बन सकती हैं।
पश्चिम बंगाल में 2026 का चुनाव अब त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। TMC और BJP के बीच 70:30 की लड़ाई में तीसरा विकल्प मजबूत हो रहा है। मुस्लिम वोटों का बंटवारा तय करेगा कि अगली सरकार कौन बनाएगी।



