West Bengal Election: देश में इस साल होने वाले पांच विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। चुनाव आयोग ने इन राज्यों में चुनाव कराने की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में टीम इसी महीने से इन राज्यों का दौरा शुरू कर देगी। मार्च के पहले सप्ताह में इन पांचों राज्यों के लिए चुनाव तारीखों का ऐलान होने की संभावना है।
ये पांच राज्य मिलकर 794 विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल की है, जहां 294 सीटें हैं। तमिलनाडु में 234, केरल में 140, असम में 126 और पुडुचेरी में 30 सीटें हैं। इन राज्यों में नए विधानसभा गठन के लिए चुनाव समय पर कराना जरूरी है।
इन राज्यों का कार्यकाल कब समाप्त हो रहा है

चुनाव आयोग ने इन राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल की तारीखें पहले ही स्पष्ट कर दी हैं। ये तारीखें इस प्रकार हैं:
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पश्चिम बंगाल: 7 मई 2026
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तमिलनाडु: 10 मई 2026
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असम: 20 मई 2026
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केरल: 23 मई 2026
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पुडुचेरी: 15 जून 2026
चुनाव आयोग का नियम है कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव कराकर नई विधानसभा का गठन कराना होता है। इसलिए इन पांचों राज्यों में मार्च से मई के बीच चुनाव होने की संभावना है।
चुनाव आयोग का दौरा कब और क्यों शुरू होगा
सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग की टीम फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में इन राज्यों का दौरा शुरू कर देगी। इस दौरे में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त शामिल रहेंगे। दौरे का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:
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कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेना
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सुरक्षा बलों की उपलब्धता और तैनाती की समीक्षा करना
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मतदाता सूची की अपडेट स्थिति देखना
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चुनाव सामग्री के भंडारण और वितरण की व्यवस्था जांचना
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ईवीएम और वीवीपैट की तैयारियों का आकलन करना
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राजनीतिक दलों से बैठक कर उनकी समस्याएं सुनना
चुनाव आयोग इन बैठकों में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से मुलाकात करेगा। दलों से चुनावी तैयारियों, सुरक्षा, आदर्श आचार संहिता और अन्य मुद्दों पर राय ली जाएगी। अगर किसी दल की कोई वैध मांग होगी तो उसे चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
पिछले चुनावों से तुलना
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में आयोग ने 6 अक्टूबर 2025 को तारीखों का ऐलान किया था। चुनाव दो चरणों में हुए और पूरी प्रक्रिया 16 नवंबर को खत्म हुई। बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक था। यानी ऐलान से चुनाव खत्म होने तक 42 दिन लगे थे।
इसी पैटर्न को देखते हुए इन पांच राज्यों में भी मार्च के पहले सप्ताह में ऐलान होने पर अप्रैल-मई में चुनाव संभव हैं। पश्चिम बंगाल सबसे पहले है, इसलिए इस राज्य का चुनाव सबसे पहले या एक साथ अन्य राज्यों के साथ हो सकता है।
इन राज्यों की राजनीतिक स्थिति
ये पांच राज्य अलग-अलग राजनीतिक माहौल रखते हैं:
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पश्चिम बंगाल: तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सत्ता में हैं। भाजपा मुख्य विपक्ष है। पिछले चुनाव में टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं।
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तमिलनाडु: डीएमके की एमके स्टालिन सरकार है। एआईएडीएमके और भाजपा गठबंधन विपक्ष में हैं।
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केरल: वाम मोर्चा (एलडीएफ) की सरकार है। कांग्रेस गठबंधन (यूडीएफ) मुख्य विपक्ष है।
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असम: भाजपा की हिमंत बिस्वा सरमा सरकार है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ विपक्ष में हैं।
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पुडुचेरी: एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। भाजपा विपक्ष में है।
इन सभी राज्यों में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। पार्टियां उम्मीदवार चयन, गठबंधन और रणनीति पर काम कर रही हैं।
चुनाव आयोग की चुनौतियां
इन राज्यों में चुनाव कराने में कई चुनौतियां हैं:
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पश्चिम बंगाल में पोस्ट-पोल हिंसा का इतिहास
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तमिलनाडु और केरल में गठबंधन की जटिलता
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असम में जातीय और भाषाई मुद्दे
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पुडुचेरी में केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण विशेष नियम
चुनाव आयोग इन सभी मुद्दों पर पहले से नजर रख रहा है। सुरक्षा बलों की तैनाती, ईवीएम की व्यवस्था और मतदाता जागरूकता पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बातें
चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने का काम तेजी से कर रहा है। सभी पात्र मतदाताओं से अपील है कि वे नाम चेक करें और जरूरत पड़ने पर नाम जुड़वाएं। फॉर्म 6, 7 और 8 का इस्तेमाल करके ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है।
इन चुनावों में युवा मतदाताओं की भूमिका बहुत अहम होगी। 18-25 साल के नए मतदाताओं की संख्या काफी है। पार्टियां भी युवा मुद्दों पर फोकस कर रही हैं।
West Bengal Election: निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 लोकतंत्र का बड़ा उत्सव होगा। चुनाव आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। मार्च के पहले सप्ताह में तारीखों का ऐलान होने पर चुनावी सरगर्मी और तेज हो जाएगी। ये चुनाव राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालेंगे। सभी पार्टियां और मतदाता पूरी तैयारी में जुट गए हैं।



