जमशेदपुर: झारखंड कला संस्कृति मंच के द्वारा इस वर्ष भी भव्य डेहरे टुसू परब 2025 का आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक पर्व की शोभायात्रा मानगो के डिमना चौक से शुरू होकर साकची के आम बगान मैदान तक पहुँची। झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए नृत्य और संगीत दलों ने इस आयोजन को रंगीन और आकर्षक बना दिया।
इस वर्ष के मुख्य आकर्षण में बोड़ाम, पटमदा, गालूडीह और पश्चिम बंगाल के बांदवान की प्रसिद्ध छौ नृत्य टीमें शामिल थीं। इसके अलावा धनबाद, बोकारो और पश्चिम बंगाल के जंगल महल क्षेत्र की टुसू नृत्य टीमें, बोड़ाम की घोड़ा नृत्य टीम, और धनबाद के झुमुर एवं टुसू गीत कलाकारों ने अपने अद्वितीय प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
गांव की परंपरा शहर तक लाने का उद्देश्य
आयोजन के आयोजकों ने बताया कि इस परब का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण कला और संस्कृति को शहर तक लाना है, ताकि शहरी लोग भी इन परंपराओं की महत्ता और सुंदरता को पहचान सकें। इस आयोजन में झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस बार लगभग एक लाख लोगों की भागीदारी देखी गई, जिससे इस परब का भव्य स्वरूप और भी बड़ा हो गया।
स्वयंसेवकों ने निभाई अहम भूमिका
झारखंड कला संस्कृति मंच के करीब 300 स्वयंसेवक, सफेद रंग की टी-शर्ट पहनकर, पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे। उन्होंने प्रतिभागियों और दर्शकों को आवश्यक सहायता प्रदान की। मंच के आयोजकों ने बताया कि आयोजन की सफलता में इन स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
ग्रामीण और शहरी संस्कृति का संगम
डेहरे टुसू परब ने एक बार फिर ग्रामीण और शहरी संस्कृति के बीच सेतु का काम किया है। दर्शकों ने न केवल नृत्य और संगीत का आनंद लिया, बल्कि झारखंड और पश्चिम बंगाल की समृद्ध परंपराओं को करीब से समझने का अवसर भी पाया।
यह आयोजन झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे संरक्षित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

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