छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर स्थित कुर्रेगुट्टालू पहाड़ (Karregutta Hills/KGH) पर सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े और निर्णायक ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस 21 दिन चले अभियान में कुल 31 कुख्यात वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें 16 महिला नक्सली भी शामिल थीं। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है।
कुर्रेगुट्टालू पहाड़ नक्सलियों के लिए बेहद सुरक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकाना था। यहां PLGA बटालियन 1, DKSZC, TSC और CRC जैसी नक्सली संस्थाओं का यूनिफाइड हेडक्वार्टर था, जहां नक्सलियों की ट्रेनिंग, रणनीति निर्माण और हथियारों का निर्माण किया जाता था। पिछले ढाई वर्षों में नक्सलियों ने इस क्षेत्र को अपना अभेद्य गढ़ बना लिया था, जहां लगभग 300-350 सशस्त्र नक्सली कैडर सक्रिय थे।
21 अप्रैल 2025 से 11 मई 2025 तक चले इस ऑपरेशन में छत्तीसगढ़ पुलिस, केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। ऑपरेशन की योजना बेहद गोपनीय और तकनीकी इनपुट्स के आधार पर बनाई गई थी। मल्टी-एजेंसी स्पेशल टीम ने लगातार आसूचना जुटाई और उसका विश्लेषण कर फील्ड कमांडरों को रियल टाइम में सूचनाएं भेजीं। इससे सुरक्षाबलों को नक्सलियों के ठिकानों, बंकरों और आईईडी जाल का पता लगाने में बड़ी मदद मिली।
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के 214 ठिकाने और बंकर नष्ट किए। तलाशी में 450 आईईडी, 818 बीजीएल शेल, 899 बंडल कॉडेक्स, डेटोनेटर, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और करीब 12 हजार किलोग्राम खाने-पीने का सामान भी बरामद किया गया। इसके अलावा नक्सलियों की चार तकनीकी इकाइयों को भी ध्वस्त किया गया, जिनका इस्तेमाल देसी हथियार, आईईडी और अन्य घातक हथियार बनाने में होता था।
कुर्रेगुट्टालू पहाड़ का इलाका बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण है। यह क्षेत्र लगभग 60 किलोमीटर लंबा और 5 से 20 किलोमीटर चौड़ा है, जिसमें सैकड़ों गुफाएं, एंबुश प्वाइंट और आईईडी जाल बिछाए गए थे। दिन का तापमान 45 डिग्री से ऊपर होने के बावजूद सुरक्षाबलों ने साहस और धैर्य का परिचय दिया। इस अभियान में 18 जवान घायल हुए, जिन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया गया और सभी अब खतरे से बाहर हैं। सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि इतने बड़े ऑपरेशन में सुरक्षाबलों की कोई जान नहीं गई।
इस अभियान में मारे गए 31 नक्सलियों में से 28 की शिनाख्त हो चुकी है, जिन पर कुल 1 करोड़ 72 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें PLGA बटालियन, CRC कंपनी और तेलंगाना स्टेट कमेटी के शीर्ष काडर भी शामिल हैं। ऑपरेशन के चलते नक्सलियों के सबसे मजबूत संगठन को भारी नुकसान पहुंचा है और उनके प्रभाव क्षेत्र में उल्लेखनीय कमी आई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक सफलता पर सुरक्षाबलों को बधाई देते हुए कहा कि जिस कुर्रेगुट्टालू पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहां आज तिरंगा शान से लहरा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक भारत नक्सलमुक्त हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने अद्भुत साहस और समर्पण का परिचय दिया है, जिससे पूरे देश को गर्व है।
यह ऑपरेशन राज्य और केंद्र की विभिन्न एजेंसियों के समन्वय और ‘whole of government approach’ का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका उद्देश्य नक्सलियों की सशस्त्र क्षमता को कम करना, हथियारबंद दस्तों को खत्म करना, दुर्गम इलाकों से नक्सलियों को खदेड़ना और उनके संगठनों को छिन्न-भिन्न करना था। इस अभियान के बाद नक्सलियों की बड़ी इकाइयां कई छोटी-छोटी इकाइयों में बंट गई हैं और सुरक्षाबलों का दबदबा इन क्षेत्रों में काफी मजबूत हो गया है।
2014 में जहां 35 जिले नक्सल प्रभावित थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 6 रह गई है। नक्सली घटनाओं की संख्या, सुरक्षाकर्मियों की शहादत और नक्सलियों के सरेंडर के आंकड़ों में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। इस अभियान से यह स्पष्ट हो गया है कि ‘नक्सलमुक्त भारत’ का सपना अब साकार होने की ओर है।

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