डेस्क: डायबिटीज यानी शुगर आज एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। गलत लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधि की कमी और खानपान की आदतें इसके पीछे सबसे बड़ी वजह मानी जाती हैं। शुगर कंट्रोल में रखने के लिए दवा और डाइट के साथ-साथ पैदल चलना सबसे आसान और असरदार उपाय माना जाता है। लेकिन अक्सर मरीजों के मन में यह सवाल रहता है कि शुगर के मरीज को रोज कितनी देर और कितने कदम चलना चाहिए, ताकि ब्लड शुगर सही स्तर पर रहे। डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, सही मात्रा में नियमित वॉक करने से ब्लड शुगर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
डायबिटीज में पैदल चलना क्यों है जरूरी
पैदल चलने से शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। इसका मतलब यह है कि शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल करने लगता है और खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर ऊर्जा में बदलने लगती है। जब हम चलते हैं, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का उपयोग करती हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। यही वजह है कि डॉक्टर डायबिटीज के मरीजों को रोजाना वॉक करने की सलाह देते हैं।
शुगर के मरीज को दिन में कितने कदम चलना चाहिए
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डायबिटीज के मरीज को दिन में कम से कम 6,000 से 8,000 कदम जरूर चलना चाहिए। अगर मरीज की उम्र कम है और कोई दूसरी गंभीर समस्या नहीं है, तो वह धीरे-धीरे इसे 10,000 कदम तक भी बढ़ा सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि शुरुआत से ही ज्यादा कदम चलें। पहले 3,000–4,000 कदम से शुरुआत करें और फिर शरीर की क्षमता के अनुसार इसे बढ़ाएं।
कितनी देर पैदल चलना है फायदेमंद
डॉक्टरों के अनुसार, शुगर के मरीज को दिन में 30 से 45 मिनट तेज चाल से पैदल चलना चाहिए। अगर एक साथ इतना चलना मुश्किल हो, तो इसे दो या तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। जैसे सुबह 15 मिनट, दोपहर या शाम को 15 मिनट और रात के खाने के बाद हल्की वॉक। इससे ब्लड शुगर को दिनभर संतुलन में रखने में मदद मिलती है।
खाने के बाद पैदल चलने का खास फायदा
विशेषज्ञ मानते हैं कि खाने के 10–15 मिनट बाद हल्की वॉक करना डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे खाने के बाद अचानक बढ़ने वाला ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। खासतौर पर डिनर के बाद थोड़ी देर टहलने से रात में शुगर बढ़ने का खतरा कम हो जाता है।
क्या सिर्फ पैदल चलना ही काफी है?
डॉक्टर बताते हैं कि पैदल चलना डायबिटीज कंट्रोल का अहम हिस्सा है, लेकिन यह अकेला उपाय नहीं है। सही डाइट, समय पर दवा और पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है। अगर इन सभी चीजों को साथ में अपनाया जाए, तो ब्लड शुगर को लंबे समय तक कंट्रोल में रखा जा सकता है। पैदल चलना इन सभी उपायों को और ज्यादा असरदार बना देता है।
किन मरीजों को सावधानी रखनी चाहिए
जिन शुगर मरीजों को घुटनों में दर्द, दिल की समस्या या बहुत ज्यादा कमजोरी है, उन्हें पैदल चलने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसे मरीज तेज चाल की बजाय हल्की और आरामदायक वॉक करें। साथ ही, चलने के दौरान अगर चक्कर, सांस फूलना या कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत रुक जाना चाहिए।
पैदल चलने से और कौन-कौन से फायदे मिलते हैं
डायबिटीज में पैदल चलने से सिर्फ ब्लड शुगर ही कंट्रोल नहीं होता, बल्कि वजन घटाने में मदद मिलती है, ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है और दिल की सेहत भी बेहतर होती है। इसके अलावा, रोजाना वॉक करने से तनाव कम होता है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है, जो डायबिटीज कंट्रोल के लिए बेहद जरूरी है।
सही तरीके से पैदल चलने के टिप्स
डॉक्टर सलाह देते हैं कि पैदल चलते समय आरामदायक जूते पहनें, शरीर सीधा रखें और धीरे-धीरे चाल बढ़ाएं। बहुत ज्यादा तेज या बहुत धीमी चाल से बचें। शुरुआत में वार्म-अप और अंत में थोड़ा कूल-डाउन करना भी फायदेमंद होता है, ताकि शरीर पर अचानक दबाव न पड़े।
निष्कर्ष:
डायबिटीज के मरीजों के लिए पैदल चलना एक आसान, सुरक्षित और बेहद असरदार उपाय है। रोजाना 6,000 से 8,000 कदम या 30–45 मिनट की वॉक ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में अहम भूमिका निभा सकती है। अगर इसे सही डाइट और नियमित दवाइयों के साथ अपनाया जाए, तो डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित पैदल चलना न सिर्फ शुगर कंट्रोल करता है, बल्कि पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।



