Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं और राजनीतिक दल चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी मांगें रख रहे हैं। सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ से मिलने वाली भाजपा और सीपीएम ने राज्य में चुनाव को एक या अधिकतम दो चरणों में कराने की मांग की है। दोनों दलों का कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और कम हिंसक होगी। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की टीम ने बैठक के बाद असंतोष जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त पर महिला मंत्री के साथ असभ्य व्यवहार का आरोप लगाया। यह मुलाकात चुनाव आयोग की कोलकाता यात्रा के दौरान हुई, जहां दल चुनावी तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं।
चुनाव आयोग ने पिछले कुछ दिनों में पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों की तैयारियों का जायजा लिया है। 8 मार्च को आयोग की टीम कोलकाता पहुंची और 9-10 मार्च को विभिन्न हितधारकों से बैठकें कीं। इसमें राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत हुई। आयोग का उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना है। राज्य में पिछले चुनावों में कई चरणों में मतदान होने से हिंसा और प्रशासनिक बोझ बढ़ा था, जिसे अब कम करने की कोशिश की जा रही है।
एक या दो चरणों में चुनाव की मांग क्यों?

भाजपा के राज्य नेता शिशिर बाजोरिया ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि पार्टी स्पष्ट रूप से सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में एक ही दिन या अधिकतम दो चरणों में मतदान चाहती है। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में सात-आठ चरणों में मतदान से कोई फायदा नहीं हुआ। इससे केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों का बेहतर उपयोग नहीं हो पाता और राज्य पुलिस पर निर्भरता बढ़ जाती है। भाजपा का आरोप है कि बहु-चरणीय चुनाव में प्रशासन और कुछ तत्वों को हिंसा फैलाने का मौका मिल जाता है। पार्टी ने केंद्रीय बलों के उपयोग पर भी असंतोष जताया और कहा कि इससे मतदाताओं का विश्वास कम होता है।
सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भी एक या दो चरणों में चुनाव की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि बहु-चरणीय चुनाव में वही प्रशासन और असामाजिक तत्व सक्रिय रहते हैं, जिससे हिंसा बढ़ती है। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में मतगणना के दौरान एक बच्चे की मौत का जिक्र किया और पूछा कि क्या रिटर्निंग अधिकारी ने कोई एफआईआर दर्ज की। सलीम ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे लगभग 60 लाख मतदाताओं को बाहर किया गया है, जो जनविरोधी है। उन्होंने आयोग से पूछा कि चुनाव या मतदाता सूची जनता को बाहर करके कैसे चल सकती है।
कांग्रेस ने भी एक या दो चरणों में चुनाव की मांग की, लेकिन उन्होंने शांतिपूर्ण चुनाव पर जोर दिया। कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी को एक, दो या तीन चरणों से कोई आपत्ति नहीं, बस चुनाव शांतिपूर्ण होना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस का असंतोष और आरोप
तृणमूल कांग्रेस की टीम में राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और राज्यसभा नामित राजीव कुमार शामिल थे। बैठक के बाद चंद्रिमा ने कहा कि वे बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चिल्लाने और महिला मंत्री के साथ असभ्य व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि एक मंत्री, एक महिला के साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है। यह उनका मानसिकता दर्शाता है। हालांकि, टीम ने चरणों की संख्या पर कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि वे लोगों की मांगों को लेकर आए हैं, चरणों की संख्या से उनका कोई लेना-देना नहीं।
तृणमूल कांग्रेस पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के एसआईआर अभियान पर आयोग से नाराज है। पार्टी का दावा है कि यह अभियान जनविरोधी है और लाखों वैध मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है। आयोग ने इसे पारदर्शी प्रक्रिया बताया है, लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है।
पश्चिम बंगाल में पिछले चुनावों का इतिहास
पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक से चुनाव कई चरणों में हो रहे हैं। 2014 लोकसभा चुनाव पांच चरणों में हुए, 2016 विधानसभा चुनाव में पहले चरण को दो दिनों में बांटा गया और कुल छह चरण थे। 2019 और 2024 लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुए, जबकि 2021 विधानसभा चुनाव आठ चरणों में हुए, जो अब तक का सबसे लंबा था। इन बहु-चरणीय चुनावों से हिंसा और पोस्ट-पोल हिंसा नहीं रुकी। विपक्षी दल इसे प्रशासनिक कमजोरी और सत्ताधारी दल की मिलीभगत से जोड़ते हैं।
एक या दो चरणों में चुनाव से केंद्रीय बलों का बेहतर उपयोग, कम हिंसा और तेज प्रक्रिया संभव होगी। आयोग को सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और मतदाता सुविधा का ध्यान रखना होगा। राज्य में 294 सीटें हैं और मतदाता संख्या करोड़ों में है।
Bengal Election 2026: चुनाव आयोग की तैयारियां और अगले कदम
आयोग की पूर्ण पीठ ने सोमवार और मंगलवार को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से भी बैठक की। इसमें कानून-व्यवस्था, केंद्रीय बलों की तैनाती, मतदान केंद्रों की व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरों की योजना पर चर्चा हुई। आयोग उच्च तनाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है, शायद मार्च के दूसरे सप्ताह में।
विश्लेषकों का कहना है कि कम चरणों में चुनाव से राजनीतिक दलों को फायदा होगा, क्योंकि प्रचार और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। लेकिन सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है। राज्य में पिछले चुनावों में हिंसा की घटनाएं आम रही हैं। आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरत रहा है।
यह मुलाकातें दिखाती हैं कि 2026 का चुनाव कितना महत्वपूर्ण है। भाजपा और सीपीएम विपक्षी एकता दिखा रहे हैं, जबकि तृणमूल अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। चुनाव आयोग की भूमिका निर्णायक होगी। राज्य की सियासत में यह दौर निर्णायक साबित हो सकता है।
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