नई दिल्ली: जीएसटी काउंसिल टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। संभावना है कि हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लगने वाली जीएसटी दरों में कटौती को मंजूरी मिल सकती है। इससे आम लोगों के लिए बीमा लेना सस्ता हो जाएगा। साथ ही, कुछ जीवनरक्षक दवाओं पर भी टैक्स छूट का प्रस्ताव रखा गया है।
काउंसिल की 56वीं बैठक 3 सितंबर से दिल्ली में शुरू हुई है, जो 4 सितंबर तक चलेगी। उम्मीद की जा रही है कि सितंबर के तीसरे सप्ताह तक दरों में बदलाव से जुड़े नोटिफिकेशन जारी कर दिए जाएंगे।
बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) तथा स्टार्टअप्स को राहत देने पर भी सहमति बनी है। अब इनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन सिर्फ 3 दिनों में पूरा किया जा सकेगा, जबकि पहले इसमें करीब 30 दिन लग जाते थे। इससे छोटे कारोबारियों का अनुपालन बोझ काफी कम होगा।
इसके अलावा, कपड़ा, फार्मा, रसायन और उर्वरक जैसे उद्योगों के लिए उल्टे शुल्क ढांचे के तहत अटके रिफंड को 7 दिनों के भीतर निपटाने का भी निर्णय लिया गया है।
दूसरी ओर, देश और विदेशी ईवी निर्माता कंपनियों—जैसे टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, JSW MG मोटर, BYD, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और हाल ही में भारत में उतरी टेस्ला—को झटका लग सकता है। परिषद की आगामी बैठक में ₹20 लाख से अधिक कीमत वाले लक्ज़री इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर 5% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव चर्चा के लिए लाया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे आठ राज्यों ने केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि अगर परिषद द्वारा टैक्स ढांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव पास होता है, तो उन्हें संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई की जाए।
जीएसटी काउंसिल की ये सिफारिशें टैक्स ढांचे को सरल बनाने और उद्योग जगत को राहत देने की दिशा में अहम साबित हो सकती हैं।
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