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झारखंड विधानसभा में गूंजे जनहित के मुद्दे, आधार कार्ड संशोधन में देरी से लेकर विस्थापितों के पुनर्वास तक

Jharkhand Budget Session: झारखंड विधानसभा के गुरुवार के सत्र में कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे उठाए गए। आधार कार्ड में संशोधन कराने में हो रही परेशानियों से लेकर चांडिल डैम से प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने तक विभिन्न मुद्दों पर सदन में जोरदार चर्चा हुई। विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं सरकार के सामने रखीं और त्वरित समाधान की मांग की। संबंधित मंत्रियों ने इन मुद्दों पर जवाब देते हुए जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया।

आधार कार्ड संशोधन में 90 दिन तक की देरी

Jharkhand Budget Session
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भवनाथपुर विधायक अनंत प्रताप देव ने सदन में आधार कार्ड में त्रुटि सुधार को लेकर आम लोगों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि आधार कार्ड में किसी भी प्रकार की गलती को ठीक कराने में लोगों को बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। सामान्यतः इस प्रक्रिया में 30 से 90 दिनों तक का समय लग जाता है, जो अत्यधिक लंबा और असुविधाजनक है।

विधायक देव ने आगे कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि आधार में संशोधन के लिए झारखंड के अधिकांश जिलों के लोगों को राजधानी रांची आना पड़ता है। जिला स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने से आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाई और खर्च का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रत्येक जिले में आधार कार्ड में त्रुटि को ठीक करने की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को रांची न आना पड़े।

विधायक ने यह भी बताया कि आधार कार्ड आज के समय में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज बन गया है। बैंक खाता खोलने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, राशन कार्ड बनवाने, मोबाइल सिम खरीदने और अन्य कई सेवाओं के लिए आधार अनिवार्य है। ऐसे में यदि आधार में कोई त्रुटि है और उसे सुधारने में महीनों लग जाएं, तो आम नागरिक की परेशानी समझी जा सकती है।

केंद्र सरकार से करेंगे आग्रह: मंत्री दीपक बिरूवा

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए संबंधित विभाग के मंत्री दीपक बिरूवा ने स्वीकार किया कि यह एक वास्तविक समस्या है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड में संशोधन की प्रक्रिया भारत सरकार के अधीन आती है और राज्य सरकार की इसमें सीमित भूमिका है। उन्होंने बताया कि आधार से संबंधित प्राधिकरण यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का मुख्यालय बेंगलुरू में है और सभी नीतिगत निर्णय वहीं से लिए जाते हैं।

मंत्री बिरूवा ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है और भारत सरकार से आग्रह किया जाएगा कि आधार में संशोधन की सुविधा प्रत्येक जिला मुख्यालय या कम से कम प्रमंडलीय मुख्यालय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा, “हम जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार को औपचारिक पत्र लिखेंगे और झारखंड के सभी जिलों में आधार सुधार केंद्र खोलने का अनुरोध करेंगे।”

मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर आधार नामांकन केंद्रों को मजबूत करने की योजना बना रही है, लेकिन संशोधन का अधिकार केवल अधिकृत केंद्रों के पास ही है। इसलिए UIDAI की स्वीकृति के बिना यह सुविधा नहीं दी जा सकती।

चांडिल डैम विस्थापितों के पुनर्वास का मुद्दा

गुरुवार के सत्र में ईचागढ़ की विधायक सबिता महतो ने चांडिल डैम से प्रभावित विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर सरकार को घेरा। चांडिल डैम पूर्वी सिंहभूम जिले में स्वर्णरेखा नदी पर बना एक महत्वपूर्ण जल परियोजना है जो 1980 के दशक में पूर्ण हुई थी। इस परियोजना के कारण हजारों परिवार विस्थापित हुए थे।

विधायक महतो ने सदन को बताया कि दशकों बीत जाने के बाद भी अनेक विस्थापितों का उचित पुनर्वास नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “विस्थापित परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही उन्हें वैकल्पिक जमीन या रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले दो वर्षों में इस मुद्दे पर एक भी समीक्षा बैठक नहीं हुई है।”

विधायक ने यह भी कहा कि विस्थापित परिवार आज भी अनिश्चितता में जी रहे हैं। उनके बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं और एक स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

116 गांवों को मुआवजा मिला, बाकी को जल्द मिलेगा: मंत्री

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए जल संसाधन मंत्री हफीजुल अंसारी ने बताया कि राज्य सरकार विस्थापितों के पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्ध है और इस दिशा में कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा, “अब तक 13 अलग-अलग स्थानों पर विस्थापित परिवारों को मुआवजा राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष स्थानों पर भी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।”

मंत्री ने स्वीकार किया कि यह एक जटिल मुद्दा है क्योंकि कई मामलों में भूमि रिकॉर्ड में अस्पष्टता है या कानूनी विवाद हैं। हालांकि, सरकार इन सभी मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने का प्रयास कर रही है।

इस पर विधायक सबिता महतो ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कहा कि केवल 116 गांवों के विस्थापितों को ही पूरा मुआवजा दिया गया है। बाकी सैकड़ों गांवों के विस्थापित अभी भी इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी पात्र विस्थापितों को बिना किसी भेदभाव के शीघ्र मुआवजा दिया जाना चाहिए।

मंत्री अंसारी ने विधायक की बात को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि सभी पात्र विस्थापितों को नियमानुसार शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले की समीक्षा के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।

उद्योगों को आसानी से पानी, किसानों को क्यों नहीं?

डुमरी विधायक जयराम महतो ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि उद्योगों को सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिए आसानी से पानी उपलब्ध करा दिया जाता है, लेकिन किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने में बड़ी कठिनाई होती है। यह असमानता क्यों है?

विधायक महतो ने कहा, “झारखंड एक कृषि प्रधान राज्य है और अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि बारिश समय पर नहीं हुई तो फसल बर्बाद हो जाती है। दूसरी ओर, उद्योगों को पानी की कोई कमी नहीं होती।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि कृषि को प्राथमिकता दी जाए और किसानों के लिए सुगम सिंचाई व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कई इलाकों में नहरें और जल स्रोत मौजूद हैं, लेकिन खराब रखरखाव और प्रबंधन के कारण किसानों को उनका लाभ नहीं मिल पाता।

भूमिगत पाइपलाइन योजना से मिलेगा समाधान

जल संसाधन मंत्री हफीजुल अंसारी ने इस मुद्दे पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की सिंचाई समस्या को गंभीरता से ले रही है और इसके समाधान के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया, “हम भूमिगत पाइपलाइन की एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहे हैं। इस योजना के तहत प्रमुख जल स्रोतों से भूमिगत पाइपों के माध्यम से सीधे खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा।”

मंत्री ने बताया कि इस योजना के कई लाभ होंगे। पहला, पानी की बर्बादी कम होगी क्योंकि खुली नहरों में वाष्पीकरण और रिसाव से काफी पानी बेकार चला जाता है। दूसरा, किसानों को जरूरत के समय आसानी से पानी मिल सकेगा। तीसरा, इससे जमीन का बेहतर उपयोग हो सकेगा क्योंकि नहरों के लिए अलग से जमीन की जरूरत नहीं होगी।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है और जल्द ही कुछ जिलों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। सफल होने पर इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा।

Jharkhand Budget Session: विधानसभा सत्र में उठे अन्य मुद्दे

इन प्रमुख मुद्दों के अलावा, गुरुवार के सत्र में विधायकों ने कई अन्य स्थानीय और राज्य स्तरीय समस्याएं भी उठाईं। सड़कों की खराब हालत, बिजली की अनियमित आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता और रोजगार के अवसरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

विपक्ष ने सरकार पर विकास कार्यों में धीमी गति का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष के विधायकों ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। सदन में कुछ तीखी नोकझोंक भी हुई, लेकिन अध्यक्ष ने सदन को सुचारु रूप से चलाया।

झारखंड विधानसभा के इस सत्र में उठाए गए मुद्दे आम जनता की वास्तविक समस्याओं को दर्शाते हैं। आधार कार्ड संशोधन जैसी तकनीकी समस्या हो या विस्थापितों के पुनर्वास और किसानों को पानी उपलब्ध कराने जैसा बुनियादी मुद्दा – ये सभी राज्य के विकास और जनकल्याण से सीधे जुड़े हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करती है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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