Jharkhand By-Election 2025: झारखंड विधानसभा उपचुनाव 2025 में पूर्वी सिंहभूम जिले की घाटशिला अनुसूचित जनजाति (एसटी) सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन ने भाजपा के बाबूलाल सोरेन पर जबरदस्त बढ़त बना ली है। मतगणना के दसवें राउंड के बाद सोमेश को 53,096 वोट मिले हैं, जबकि बाबूलाल को 32,289 वोट प्राप्त हुए। इससे झामुमो की बढ़त 20,807 वोटों तक पहुंच गई। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के रामदास मुर्मू को 7,811 वोटों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। यह परिणाम झामुमो की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
मतगणना जमशेदपुर कोऑपरेटिव कॉलेज में कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 8 बजे शुरू हुई और कुल 20 चरणों में पूरी होनी है। इस उपचुनाव में 11 नवंबर को 74.63 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। कुल 13 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला झामुमो और भाजपा के बीच रहा। यह सीट झामुमो विधायक रामदास सोरेन के 15 अगस्त को निधन के कारण रिक्त हुई थी, जिन्होंने 2024 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल सोरेन को 22,000 से अधिक वोटों से हराया था। सोमेश चंद्र सोरेन रामदास सोरेन के पुत्र हैं और यह उनका पहला चुनाव है, जबकि बाबूलाल सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र हैं।
उम्मीदवारों की स्थिति (दसवें राउंड तक)
| उम्मीदवार | पार्टी | वोट संख्या | स्थान |
| सोमेश चंद्र सोरेन | झामुमो | 53,096 | 1 |
| बाबूलाल सोरेन | भाजपा | 32,289 | 2 |
| रामदास मुर्मू | जेएलकेएम | 7,811 | 3 |
राजनीतिक प्रभाव
यह उपचुनाव झामुमो और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। झामुमो के लिए यह जीत पार्टी की पकड़ मजबूत करने का संकेत देगी, खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्र में। भाजपा के लिए हार राज्य स्तर पर चुनौती पैदा कर सकती है, क्योंकि यह उनकी रणनीति पर सवाल उठाएगा। अन्य पार्टियों जैसे जेएलकेएम का प्रदर्शन तीसरे स्थान तक सीमित रहा, जो उनकी सीमित प्रभावशालीता दर्शाता है। झारखंड की समग्र राजनीति पर यह परिणाम सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिरता को रेखांकित करेगा, लेकिन कोई बड़ा बदलाव नहीं लाएगा। पूर्वी सिंहभूम जिला निर्वाचन अधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने बताया कि मतगणना जारी है।
सरकार पर असर
चुनाव परिणाम का हेमंत सोरेन सरकार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में झामुमो नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 55 विधायक हैं, जबकि बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। इस बहुमत के कारण उपचुनाव का परिणाम सरकार की स्थिरता को प्रभावित नहीं करेगा।



