Jharkhand Crime News: झारखंड के बोकारो जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के खुंटाडीह गाँव की 18 वर्षीय पुष्पा की हत्या के मामले में जाँच में लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बाद बोकारो के पुलिस अधीक्षक (SP) हरविंदर सिंह ने शनिवार की देर रात एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने पिंड्राजोरा थाने में तैनात सभी 28 पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों को एक साथ निलंबित कर दिया। झारखंड पुलिस के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब किसी पूरे थाने को एक साथ सस्पेंड किया गया हो।
कौन-कौन हुए सस्पेंड?
SP हरविंदर सिंह के आदेश के तहत जो 28 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं उनमें 10 सब इंस्पेक्टर, 5 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, 2 हवलदार और 11 सिपाही शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने पुष्पा के लापता होने और बाद में हत्या के मामले की जाँच में न केवल लापरवाही बरती, बल्कि अपराधियों को बचाने और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के भी सबूत मिले हैं। एसपी ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन जाँच प्रक्रिया का हिस्सा है और विभागीय जाँच पूरी होने के बाद जो दोषी पाए जाएंगे उन पर कड़ी कार्रवाई होगी, जबकि निर्दोष पाए जाने वाले कर्मियों को निलंबन से मुक्त किया जाएगा।
जाँच का काम न रुके, गोमिया के रवि कुमार को मिला प्रभार

एक साथ पूरे थाने के सस्पेंड हो जाने के बाद जाँच कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एसपी ने तुरंत व्यवस्था की। गोमिया थाने के रवि कुमार को पिंड्राजोरा थाने का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनकी तैनाती तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई ताकि थाने का काम बिना किसी रुकावट के जारी रहे और पुष्पा हत्याकांड की जाँच में कोई देरी न हो।
पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई, यह दूसरा बड़ा कदम
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में कार्रवाई हुई हो। शनिवार की शाम को ही एसपी हरविंदर सिंह ने पिंड्राजोरा थाना प्रभारी अभिषेक रंजन, जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अनिकेत कुमार, एसआईटी सदस्य सब इंस्पेक्टर विवेक पांडे, सब इंस्पेक्टर अनिल यादव और मुंशी अक्षय कुमार को निलंबित किया था। इस दौरान एसपी ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि किसी पुलिसकर्मी के हत्यारे से सीधे संबंध के सबूत मिले तो उसे सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है।
इससे भी पहले 9 अप्रैल को डीजीपी तदाशा मिश्रा ने हाईकोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए थाना प्रभारी अभिषेक रंजन और मुंशी अक्षय कुमार को जाँच में लापरवाही के चलते तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया था।
जाँच टीम ने रात को ही सौंपी रिपोर्ट
देर रात को पिंड्राजोरा थाने की एसआईटी की एक उच्च स्तरीय टीम पहुँची जिसमें एसआईटी प्रमुख और सिटी डीएसपी आलोक रंजन, बीएस सिटी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुदामा कुमार दास, बालीडीह थाना इंस्पेक्टर नवीन कुमार सिंह, हरला थाना इंस्पेक्टर खुर्शीद आलम, चीरा चास थाना प्रभारी पुष्पराज और सब इंस्पेक्टर विक्रम कुमार शामिल थे। इस टीम ने मौके पर पूरी जाँच-पड़ताल की और रात को ही अपनी रिपोर्ट एसपी को सौंप दी। उसी रिपोर्ट के आधार पर थाने के सभी 28 पुलिसकर्मियों के निलंबन का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी किया गया।
पुलिस मेंस एसोसिएशन ने जताया विरोध
इस फैसले पर झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। एसोसिएशन ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि एक साथ पूरे थाने को सस्पेंड करना उचित नहीं है क्योंकि इसमें कई ऐसे पुलिसकर्मी भी हैं जो निर्दोष हो सकते हैं। एसोसिएशन की माँग है कि दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी सजा दी जाए, लेकिन निर्दोष कर्मियों को न्याय मिलना भी उतना ही जरूरी है।
हाईकोर्ट के रुख ने बढ़ाया दबाव
इस पूरे मामले में झारखंड हाईकोर्ट का रुख बेहद सख्त रहा है। कोर्ट की नाराजगी और सख्त टिप्पणियों के बाद ही प्रशासन और पुलिस महकमे पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने भी हाईकोर्ट के इसी दबाव में 9 अप्रैल को पहली बड़ी कार्रवाई की थी। अब एसपी द्वारा पूरे थाने को सस्पेंड करने का फैसला यह साफ करता है कि प्रशासन इस मामले में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
क्या है पुष्पा हत्याकांड?
खुंटाडीह गाँव की 18 साल की पुष्पा कुछ समय पहले लापता हो गई थी। परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की तरफ से तेज और संवेदनशील जाँच नहीं हुई। बाद में पुष्पा का शव मिला और यह स्पष्ट हो गया कि उसकी हत्या की गई थी। जाँच में जैसे-जैसे चीजें सामने आईं, पुलिस की लापरवाही और कथित मिलीभगत के गंभीर आरोप उठने लगे जिसने इस मामले को पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना दिया।
एसपी का बयान, दोषी बचेंगे नहीं
बोकारो एसपी हरविंदर सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि जाँच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा, “जो दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ विभागीय जाँच के बाद कड़ी कार्रवाई होगी और जो निर्दोष होंगे उन्हें जल्द ही निलंबन से मुक्त किया जाएगा।” रविवार को भी जाँच का काम जारी रहा और प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है।
यह मामला न केवल बोकारो जिले बल्कि पूरे झारखंड की पुलिस व्यवस्था के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर एक लापता लड़की की जाँच में इतनी लापरवाही और मिलीभगत कैसे हो सकती है। अब देखना यह होगा कि विभागीय जाँच में कितने पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं और उन्हें क्या सजा मिलती है।
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