Jharkhand Education News: झारखंड का पलामू जिला हमेशा से पिछड़ेपन और उग्रवाद के साए में जाना जाता रहा है। लेकिन अब यही जिला शिक्षा के मामले में एक नई मिसाल कायम करने की तैयारी में है। सोमवार को पलामू में एक ऐसी पहल की शुरुआत हुई जो यहाँ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के बच्चों की जिंदगी बदल सकती है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने छतरपुर विधानसभा क्षेत्र में दो सरकारी विद्यालयों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण का विधिवत शिलान्यास किया। इन दोनों स्कूलों को एचडीएफसी बैंक के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड की मदद से मॉडल और स्मार्ट स्कूल के रूप में तैयार किया जाएगा।
कौन से दो स्कूल बनेंगे मॉडल स्कूल?

सिक्कीकला गाँव का विद्यालय
पहला स्कूल पाटन प्रखंड स्थित सिक्कीकला गाँव में है। यह इलाका आदिवासी बहुल है जहाँ पीढ़ियों से बच्चे बुनियादी सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर रहे हैं। यहाँ अच्छी शिक्षा की पहुँच हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। इस स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने से यहाँ के बच्चों को शहर के बच्चों जैसी सुविधाएँ मिल सकेंगी।
नामुदाग उच्च विद्यालय
दूसरा स्कूल नौडीहा बाजार प्रखंड का नामुदाग उच्च विद्यालय है। यह इलाका पहले उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित रहा है। लंबे समय तक यहाँ के बच्चों को शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब इस स्कूल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना इस क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
2 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्प, क्या-क्या बदलेगा?
इस पूरी योजना पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च होंगे जो एचडीएफसी बैंक के CSR फंड से आएंगे। एचडीएफसी बैंक के CSR स्टेट हेड परमेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में बताया कि इन दोनों विद्यालयों को पूरी तरह स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इन सुविधाओं से लैस होंगे दोनों स्कूल
स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे जहाँ डिजिटल तकनीक के जरिए पढ़ाई होगी। आधुनिक साइंस लैब तैयार की जाएगी ताकि बच्चे प्रयोग करके सीख सकें। एक समृद्ध लाइब्रेरी बनेगी जिसमें पर्याप्त किताबें और पढ़ाई का सामान होगा। स्कूल परिसर में बाउंड्री वॉल और पक्की सड़क बनाई जाएगी। नए और अतिरिक्त कमरे बनाए जाएंगे ताकि बच्चों को बैठने की जगह की कमी न हो। पीने के साफ पानी की व्यवस्था की जाएगी और पानी की निकासी के लिए नालियाँ भी बनाई जाएंगी। सबसे जरूरी बात यह है कि बिजली की समस्या को खत्म करने के लिए सोलर एनर्जी सिस्टम लगाया जाएगा ताकि पढ़ाई में कभी रुकावट न आए।
वित्त मंत्री बोले, बैंकों की जिम्मेदारी सिर्फ पैसे लेना-देना नहीं
शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एचडीएफसी बैंक की इस पहल की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि बैंकिंग संस्थानों को सिर्फ वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी उनका उतना ही बड़ा फर्ज है।
मंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में बैंकर्स के साथ हुई एक बैठक में उन्होंने यह मुद्दा उठाया था कि पलामू में कई बड़े बैंक करोड़ों रुपये का कारोबार करते हैं, लेकिन जिले को उसका उचित लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने साफ कहा कि जो बैंक यहाँ से कमाते हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे यहाँ के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में भी योगदान दें। इस लिहाज से एचडीएफसी बैंक का यह कदम दूसरे बैंकों के लिए एक उदाहरण है।
शिक्षित नेतृत्व पर दिया जोर बड़ी बात कह गए मंत्री
अपने भाषण में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने एक बेहद जरूरी बात कही जो आज के दौर में काफी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि जब लोग डॉक्टर चुनते हैं तो देखते हैं कि वह पढ़ा-लिखा है या नहीं। जब इंजीनियर या शिक्षक की तलाश करते हैं तो उसकी योग्यता जाँचते हैं। लेकिन जब जनप्रतिनिधि यानी नेता चुनने की बात आती है तो अक्सर यह जाँचना भूल जाते हैं कि वह शिक्षित है या नहीं।
मंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए शिक्षित नेतृत्व बेहद जरूरी है। उन्होंने स्कूलों से अपील की कि वे सिर्फ डॉक्टर और इंजीनियर ही नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक और शिक्षित नागरिक भी तैयार करें जो आगे चलकर समाज और राजनीति दोनों में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
रंगारंग कार्यक्रम से सजा शिलान्यास समारोह
शिलान्यास के इस मौके पर माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा। स्कूली बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए जिन्होंने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में एचडीएफसी बैंक के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विद्यालय से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत परंपरागत तरीके से शॉल और फूलों के गुलदस्ते देकर किया गया।
पलामू की शिक्षा में बदलाव की उम्मीद
यह पहल पलामू जिले के लिए बहुत बड़ी उम्मीद लेकर आई है। जिन इलाकों में कभी उग्रवाद और गरीबी की वजह से बच्चे स्कूल छोड़ देते थे, वहाँ अब आधुनिक सुविधाओं वाले स्मार्ट स्कूल बनेंगे। जब बच्चों को अच्छी लाइब्रेरी, डिजिटल क्लास और साफ पानी मिलेगा तो न सिर्फ उनकी पढ़ाई बेहतर होगी बल्कि स्कूल छोड़ने की दर भी कम होगी। यह योजना पूरे झारखंड में एक मॉडल बन सकती है जिसे दूसरे जिलों में भी अपनाया जा सकता है।
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