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Jharkhand High Court Verdict: साकची गुरुद्वारा में नहीं होंगे दोबारा चुनाव, निशान सिंह बरकरार

Jharkhand High Court Verdict: जमशेदपुर के साकची इलाके में स्थित गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के चुनाव को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। गुरुद्वारे के प्रधान पद पर सरदार निशान सिंह की नियुक्ति और उनकी सेवा को चुनौती देते हुए कुछ विपक्षी पक्षों ने झारखंड उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका में यह मांग की गई थी कि गुरुद्वारे में नए सिरे से चुनाव कराए जाएं और मौजूदा प्रबंधन को अवैध घोषित किया जाए।

इस मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से दिनांक 08 जुलाई 2025 को दाखिल किए गए प्रतिहलफनामे के परिशिष्ट-बी का हवाला दिया गया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि गुरुद्वारे के चुनाव पहले ही विधिवत रूप से संपन्न हो चुके हैं।

कोर्ट ने क्या कहा?

माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा कि चूंकि गुरुद्वारे के चुनाव पहले ही संपन्न हो चुके हैं, इसलिए इस रिट याचिका में अब विचार करने योग्य कोई मुद्दा शेष नहीं बचता। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति चुनाव के नतीजों से असंतुष्ट है तो वह कानून के मुताबिक उचित सिविल न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

कोर्ट ने अपने फैसले में यह बिल्कुल नहीं कहा कि दोबारा चुनाव कराए जाएं। यही वह बिंदु था जिसे लेकर विपक्षी पक्ष ने लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की। कोर्ट का फैसला पूरी तरह साकची गुरुद्वारा के संविधान और चुनाव प्रक्रिया की वैधता की पुष्टि करता है।

निशान सिंह बोले, सत्य की जीत हुई

Jharkhand High Court Verdict

झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले के बाद गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के प्रधान सरदार निशान सिंह ने बुधवार को जमशेदपुर में एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ जमशेदपुर कोर्ट के वरीय अधिवक्ता केएम सिंह भी उपस्थित रहे।

सरदार निशान सिंह ने कहा कि आज सत्य की जीत हुई है। साकची गुरुद्वारा साहिब के संविधान को मानने वालों की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि वे गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार के रूप में पूरी तरह बरकरार हैं और आगे भी संगत की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि जो लोग गुरुद्वारे की सेवा और संगत की भलाई के बजाय सिर्फ विवाद फैलाने में लगे थे, उन्हें आज कोर्ट के फैसले से करारा जवाब मिल गया है।

केएम सिंह ने उठाए सवाल, विपक्ष ने जनता को गुमराह किया

प्रेस वार्ता में वरीय अधिवक्ता केएम सिंह ने कहा कि विपक्षी पक्षों ने जानबूझकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने यह अफवाह उड़ाई कि माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने फ्रेश चुनाव कराने का आदेश दिया है, जो पूरी तरह झूठ है। कोर्ट के किसी भी आदेश में ऐसा कुछ नहीं लिखा गया।

केएम सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि धार्मिक संस्था के मामले में इस तरह की राजनीति की जाती है। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून दोनों ने साकची गुरुद्वारे के वर्तमान प्रबंधन को सही ठहराया है।

संविधान को मिली मान्यता, कोर्ट ने की पुष्टि

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि माननीय झारखंड उच्च न्यायालय ने साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के संविधान को सर्वोपरि माना। यानी गुरुद्वारे की अपनी चुनाव प्रक्रिया और नियम-कायदे कानूनी रूप से मान्य हैं। कोर्ट ने यह माना कि चुनाव उसी संविधान के तहत सही तरीके से हुए और अब उसमें किसी बाहरी दखल की जरूरत नहीं है।

यह फैसला न सिर्फ निशान सिंह की जीत है बल्कि उन सभी सदस्यों की भी जीत है जो संविधान की प्रक्रिया में विश्वास रखते हैं और चाहते हैं कि गुरुद्वारे का प्रबंधन पारदर्शी और नियमों के अनुसार हो।

किसने की पैरवी?

इस मामले में गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची की तरफ से झारखंड उच्च न्यायालय में वरीय अधिवक्ता आयुष आदित्य, प्रवीण शंकर दयाल, मनीष कुमार, कृष्ण मुरारी सिंह और अविनाश प्रखर ने पैरवी की। वकीलों की इस मजबूत टीम ने पूरे मामले को बहुत अच्छे से कोर्ट के सामने रखा और साकची गुरुद्वारे के पक्ष में फैसला आया।

संगत में खुशी का माहौल

झारखंड उच्च न्यायालय का यह फैसला आने के बाद जमशेदपुर की सिख संगत में खुशी का माहौल है। लंबे समय से यह विवाद चल रहा था जिससे संगत में एक तरह की अनिश्चितता बनी हुई थी। अब जबकि कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है, संगत यह उम्मीद कर रही है कि गुरुद्वारे में शांति और सेवा का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ेगा।

सरदार निशान सिंह ने संगत का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह उनकी दुआओं और विश्वास का नतीजा है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा की तरह गुरुद्वारे की सेवा और संगत की भलाई के लिए काम करते रहेंगे।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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