Top 5 This Week

Related Posts

सरकारी खर्च पर लगाम, बंगाल में बाहर इलाज के लिए CM की अनुमति अब अनिवार्य

Bengal Govt New Rule: पश्चिम बंगाल सरकार ने मंत्रियों के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब राज्य के किसी भी मंत्री को अगर बंगाल के बाहर किसी अस्पताल में इलाज कराना है, तो उन्हें पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लिखित अनुमति लेनी होगी। राज्य सचिवालय नवान्न की ओर से यह नई अधिसूचना जारी की गई है और इसे ‘द कोलकाता गजट’ में भी प्रकाशित कर दिया गया है। यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू माना जा रहा है।

क्या है नया नियम और किन पर लागू होगा?

गृह विभाग द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री सभी इस नए नियम के दायरे में आएंगे। यानी सरकार के हर स्तर के मंत्री को राज्य के बाहर इलाज से पहले CM की हरी झंडी लेनी होगी। पहले ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी और मंत्री बिना किसी पूर्व अनुमति के दूसरे राज्यों में जाकर सरकारी खर्चे पर इलाज करा सकते थे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले की सबसे बड़ी वजह यह है कि बीते कुछ वर्षों में कुछ मंत्रियों ने बिना किसी गंभीर बीमारी के दूसरे राज्यों में जाकर सिर्फ नियमित जांच कराई और उसके बदले भारी-भरकम बिल सरकार को थमा दिए। नवान्न के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसे कई मामले सामने आए जहां साधारण स्वास्थ्य जांच के नाम पर लाखों रुपए का खर्च दिखाया गया।

यह पहली बार नहीं है जब बंगाल में मंत्रियों के मेडिकल बिल विवाद का विषय बने हों। वाम मोर्चा के शासनकाल में तत्कालीन मंत्री मानव मुखर्जी के महंगे चश्मे की सरकारी प्रतिपूर्ति को लेकर काफी बवाल हुआ था। इसके बाद ममता बनर्जी की सरकार में भी मंत्री सावित्री मित्रा के मेडिकल बिल पर सवाल उठे थे। इन पुराने विवादों और नए मामलों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाने का फैसला किया।

परिवार के सदस्यों को भी मिलेगी सुविधा, पर शर्तों के साथ

नई अधिसूचना में सिर्फ मंत्रियों की नहीं बल्कि उनके परिवार के कुछ सदस्यों की भी बात की गई है। इस सुविधा का लाभ उठाने के पात्र परिजनों में अविवाहित बेटियां, आश्रित माता-पिता और 18 साल तक की उम्र के आश्रित भाई-बहन शामिल हैं। हालांकि इनके लिए भी राज्य के बाहर इलाज की स्थिति में वही नियम लागू होगा जो मंत्री पर लागू होता है।

नई व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव यह भी है कि चिकित्सा सेवाओं का दायरा अब पहले से बड़ा कर दिया गया है। पहले सिर्फ सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा थी, लेकिन अब पश्चिम बंगाल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2017 के तहत पंजीकृत निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

कौन-कौन सी सेवाएं होंगी कवर?

नई अधिसूचना के मुताबिक, डॉक्टर से परामर्श, पैथोलॉजी जांच, रेडियोलॉजी जांच, दवाइयां, टीकाकरण, सर्जरी और दांतों का इलाज यानी दंत चिकित्सा, ये सभी सेवाएं सरकारी खर्चे पर मिलेंगी। इसके अलावा डॉक्टर के निजी चैंबर में दिखाने का खर्च, अस्पताल के उच्च श्रेणी के वार्ड में रहने का खर्च और जरूरत पड़ने पर विशेष नर्सिंग सेवाओं का खर्च भी सरकार उठाएगी।

सरकारी अस्पताल में इलाज पूरी तरह मुफ्त रहेगा

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त रहेगा। वहीं अगर कोई मंत्री किसी निजी या पंजीकृत अस्पताल में इलाज कराते हैं, तो उस स्थिति में राज्य सरकार या तो सीधे खर्च उठाएगी या फिर बाद में प्रतिपूर्ति यानी रिइंबर्समेंट करेगी।

सरकार का साफ कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दो चीजें हैं, पहली, सरकारी चिकित्सा खर्च पर नियंत्रण रखना और दूसरी, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना। जब CM की अनुमति जरूरी होगी, तो हर मामले की जांच पहले ही हो जाएगी और यह तय किया जा सकेगा कि इलाज वाकई जरूरी है या नहीं।

बड़ा संदेश भी है इस फैसले में

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी ने यह कदम उठाकर एक बड़ा संदेश दिया है कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। चुनावी माहौल में इस तरह के फैसले जनता के बीच एक अच्छा संदेश देते हैं कि सरकार फिजूलखर्ची को बर्दाश्त नहीं करेगी।

अभी तक विपक्षी दलों की ओर से इस फैसले पर कोई बड़ी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि कुछ नेताओं ने निजी बातचीत में यह जरूर कहा है कि यह नियम तो अच्छा है, लेकिन असली सवाल यह है कि इसे कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा। उनका कहना है कि कागजों पर तो कई नियम बने हैं, लेकिन जमीन पर असर तभी दिखता है जब पालन सुनिश्चित हो।

Read More Here:- 

Jharkhand Voter List 2026: झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारी तेज, अप्रैल के दूसरे हफ्ते में होगी SIR की घोषणा, 73% सत्यापन पूरा 

सिलेंडर बुक करने के लिए करना होगा 35 दिन का इंतजार, जानें नए नियम

धुरंधर 2 ने पुष्पा 2 को पछाड़ा! बनी तीसरी सबसे बड़ी भारतीय फ्रेंचाइजी, अब बाहुबली का रिकॉर्ड तोड़ने की बारी

West Bengal Election 2026: तृणमूल नेताओं का वोटर लिस्ट से नाम गायब, मंत्री गुलाम रब्बानी बोले- यह साजिश है

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles