Jharkhand Student Protest: झारखंड में पिछले कई हफ्तों से सुलग रहा छात्र आंदोलन आखिरकार एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों की सबसे बड़ी मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मान ली है। सोमवार को राज्य सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने साल 2014 से अब तक आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी टीडीपीएल के जरिए कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसमें विवादों में घिरी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा भी शामिल है। इस फैसले के बाद 20 अगस्त को होने वाला मुख्यमंत्री आवास घेराव भी छात्रों ने खुद ही रद्द कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि क्या आंदोलन यहीं थम गया, या फिर आगे कुछ और होने वाला है?
दरअसल इस पूरे मामले की जड़ें झारखंड की भर्ती परीक्षा प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ियों में हैं। छात्रों का आरोप था कि परीक्षाओं के आयोजन और परिणामों में भारी अनियमितता बरती गई, जिसकी वजह से हजारों उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लग गया। इसी को लेकर JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले छात्रों ने लगातार धरना-प्रदर्शन शुरू किया था और राज्यभर से रांची कूच की अपील की थी।
Jharkhand Student Protest: कैबिनेट बैठक में क्या हुआ फैसला
सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की लंबी बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए सोरेन ने साफ कहा कि सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है। यही छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक थी। इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी द्वारा आयोजित बाकी सभी परीक्षाओं और उनके नतीजों को भी निरस्त कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अगुवाई में एक परीक्षा सुधार समिति गठित की गई है। यह समिति आने वाले समय में भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को और पारदर्शी और मजबूत बनाने के उपाय सुझाएगी। जानकार बताते हैं कि यह कदम सिर्फ मौजूदा आंदोलन को शांत करने भर के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने की दिशा में भी उठाया गया है।
छात्रों में जश्न का माहौल, पर आंदोलन अब भी जारी
सरकार की घोषणा के बाद छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई जगह छात्र तिरंगा लहराते और जश्न मनाते नजर आए। पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे जेएलकेएम नेता देवेंद्र महतो सहित तीन आंदोलनकारियों ने भी अपना अनशन तोड़ दिया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए महतो से बात कर उन्हें बधाई दी और इस फैसले को हर पक्ष की जीत बताया।
लेकिन यहां एक छोटा-सा ट्विस्ट भी है। सरकार के इस बड़े फैसले के बावजूद पूरा आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी असली और सबसे अहम मांग परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराना है, जिसे अभी तक सरकार ने स्वीकार नहीं किया। सदर अस्पताल में इलाज करा रहे आंदोलनकारी राहुल क्रांति ने साफ कहा कि जब तक सीबीआई जांच की मांग पूरी नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
“यह किसी की हार नहीं, सबकी जीत है”
इस पूरे घटनाक्रम पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को एक बयान जारी कर छात्रों को आंदोलन के पहले चरण में मिली इस जीत पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे ऐसी जीत करार दिया, जिसमें किसी की हार नहीं हुई। उनका कहना था कि यह छात्रों की भी जीत है और सरकार की भी, क्योंकि सरकार भी बेहतर करना चाहती है। देखने पर लगता है कि यह वाक्य आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर खूब शेयर होगा, क्योंकि इसमें आंदोलन की पूरी भावना समाहित है।
सीआईडी जांच में क्या निकले चौंकाने वाले तथ्य
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रेस वार्ता में एक और अहम बात कही। उन्होंने बताया कि सीआईडी और विशेष अन्वेषण टीम की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो चौंकाने वाले हैं। हालांकि फिलहाल इनका खुलासा नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने यह संकेत भी दिया कि राज्य में सक्रिय कई कंपनियां किसी बड़े परीक्षा गिरोह से जुड़ी हो सकती हैं। यह बयान आंदोलन को एक नया आयाम देता है, क्योंकि इससे साफ होता है कि मामला सिर्फ एक-दो परीक्षाओं तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर संगठित गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है।
Jharkhand Student Protest: आम छात्रों के लिए इसका मतलब
झारखंड के लाखों युवाओं के लिए यह फैसला सीधे तौर पर उनके भविष्य से जुड़ा है। जिन छात्रों ने सालों मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की, उनके लिए दोबारा परीक्षा होने का मतलब है एक नया मौका, लेकिन साथ ही एक नई चुनौती भी। सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे होने वाली परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी हों, ताकि छात्रों का भरोसा फिर से कायम हो सके।
फिलहाल झारखंड में यह आंदोलन आधी जीत के साथ अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। सरकार ने भर्ती परीक्षाएं रद्द कर छात्रों की एक बड़ी मांग तो पूरी कर दी है, लेकिन सीबीआई जांच का मुद्दा अब भी टकराव की वजह बना हुआ है। सीआईडी जांच में सामने आए संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार सीबीआई जांच को लेकर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है।
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