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2025 प्रदोष व्रत की तारीखें, पूजा का समय और जाने फायदे

Pradosh Vrat 2025: भगवान शिव के भक्तों के लिए 2025 में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व रहेगा। यह व्रत हर माह दो बार आता है, जो जीवन में खुशी, सेहत और सफलता लाता है। प्रदोष व्रत की तारीखें, पूजा का शुभ समय और लाभ जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट।

प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा शाम के प्रदोष काल में की जाती है। इससे पाप मिटते हैं और मन शांत होता है। 2025 में पहला प्रदोष व्रत 12 जनवरी को पड़ेगा, जो रविवार का सोम प्रदोष होगा।

2025 प्रदोष व्रत की सभी तारीखें

वर्ष 2025 में, प्रदोष व्रत लगभग हर महीने में दो बार आते हैं, और तिथि के अनुसार व्रत की तारीख 12 या 13 तारीख के आस-पास होती है। जनवरी में 12 और 30 तारीख को व्रत है। इसके बाद, फरवरी में 13 और 28, मार्च में 14 और 29, और अप्रैल में 12 और 27 तारीख को व्रत किए जाएंगे। मई में 12 और 27, जून में 10 और 25, जुलाई में 10 और 24, अगस्त में 8 और 23, सितंबर में 7 और 22, और अक्टूबर में 7 और 22 तारीखों को प्रदोष व्रत पड़ेगा। साल का अंतिम चरण नवंबर (6 और 20) और दिसंबर (5 और 17) के साथ समाप्त होगा। वर्ष का आखिरी प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को बुधवार के दिन है, जिसे बुध प्रदोष कहा जाता है, जो बुद्धि और करियर में सफलता के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष पूजा का सबसे अच्छा समय शाम 5:30 से 8:00 बजे तक होता है। उदाहरण के लिए, 17 दिसंबर को प्रदोष काल 5:27 बजे से शुरू होकर 8:11 बजे तक चलेगा। इस समय शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और बेलपत्र चढ़ाएं। आरती करें और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। व्रत में फलाहार लें, रात को हल्का भोजन करें।

प्रदोष व्रत का महत्व

यह व्रत शिवजी को प्रसन्न करने का सरल तरीका है। पूजा से घर में सुख-शांति आती है, रोग दूर होते हैं और काम में सफलता मिलती है। बुध प्रदोष पर ‘ओम बुद्धिप्रदाय नमः’ का 21 बार जाप करने से दिमाग तेज होता है और नई राहें खुलती हैं। पुराणों में कहा गया है कि प्रदोष काल की पूजा सामान्य पूजा से लाख गुना फल देती है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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