Top 5 This Week

Related Posts

लोकसभा सीटें बढ़कर होंगी 815, महिलाओं के लिए 272 सीटें आरक्षित, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल

Nari Shakti Vandan: लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 कर दी जाएगी और इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह जानकारी केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को लोकसभा में दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण कानून लागू होने से न तो किसी पुरुष को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा।

मंत्री ने महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन और परिसीमन आयोग की स्थापना से जुड़े तीन विधेयकों पर चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है। नए प्रस्ताव के मुताबिक कुल 815 सीटें होंगी, जिनमें 33 प्रतिशत यानी 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखी जाएंगी।

मेघवाल ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके उचित अधिकार दिलाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद भी सभी राज्यों की मौजूदा सीटों में कोई कमी नहीं आएगी। हर राज्य को उसकी आबादी के अनुपात में अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, जिससे किसी भी राज्य के हित प्रभावित नहीं होंगे।

महिला आरक्षण में एससी-एसटी महिलाओं को भी मिलेगा आरक्षण

केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के अंतर्गत अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिलाओं के लिए भी अलग से आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब है कि एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को भी 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

मेघवाल ने सदन को बताया कि यदि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 अपने मौजूदा रूप में लागू होता तो 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं होता। कारण यह है कि आरक्षण जनगणना के नए आंकड़ों पर आधारित होगा, जो 2026 के बाद ही उपलब्ध होंगे। इसलिए सरकार ने संविधान संशोधन विधेयक लाकर इस प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि परिसीमन आयोग जल्द ही गठित किया जाएगा, जो नए आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्गठन करेगा। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी और सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

Nari Shakti Vandan: किसी राज्य को नहीं होगा नुकसान

मंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा। वर्तमान में जो सीटें किसी राज्य को मिली हुई हैं, वे बनी रहेंगी। बढ़ी हुई सीटें आबादी के अनुपात में अतिरिक्त रूप से दी जाएंगी। इससे छोटे राज्यों का भी प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को अपनी आबादी के हिसाब से ज्यादा सीटें मिलने की संभावना है। वहीं छोटे राज्यों जैसे गोवा, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। मेघवाल ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लोकसभा में सभी क्षेत्रों, वर्गों और राज्यों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो।

महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने में भारत आगे

अर्जुन राम मेघवाल ने विश्व के अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं को मताधिकार देने में भारत काफी आगे रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में महिलाओं को पुरुषों के 144 साल बाद मतदान का अधिकार मिला। वहीं ब्रिटेन में महिलाओं को 1918 में कुछ शर्तों के साथ और 1928 में पूर्ण मताधिकार मिला।

भारत में स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को पुरुषों के बराबर मतदान का अधिकार दिया गया था। अब सरकार महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें राजनीतिक रूप से और मजबूत बनाना चाहती है। मंत्री ने कहा कि यह कदम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

विधेयकों का उद्देश्य क्या है?

मेघवाल ने तीनों विधेयकों का उद्देश्य बताते हुए कहा कि इनका मुख्य लक्ष्य महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है। साथ ही परिसीमन प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है ताकि 2029 के चुनाव से पहले सब कुछ तैयार हो जाए।

उन्होंने बताया कि जनगणना 2026 के बाद होने की उम्मीद है। उसके बाद परिसीमन आयोग अपना काम शुरू करेगा। आयोग सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा और महिला आरक्षण के लिए अलग से सीटें चिन्हित करेगा। पूरे प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक और पारदर्शी तरीके अपनाए जाएंगे।

राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया?

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने अपनी राय रखी। कुछ सदस्यों ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया, तो कुछ ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल भी उठाए।

मंत्री ने सभी सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार सभी दलों से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधेयक पास होने के बाद कोई भी राज्य या वर्ग अपने हितों से वंचित नहीं रहेगा।

महिला आरक्षण का देश पर क्या असर पड़ेगा?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा में 272 महिला सीटें आरक्षित होने से संसद की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएगा। महिलाओं से जुड़े मुद्दे जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा।

इसके अलावा युवा महिलाओं को राजनीति में आने का बेहतर मौका मिलेगा। कई महिला नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इस कदम का स्वागत कर रही हैं। वे कह रही हैं कि यह महिलाओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अभी क्या है स्थिति?

वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं। महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी काफी कम है। महिला आरक्षण कानून लागू होने के बाद यह संख्या काफी बढ़ जाएगी। राज्य विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाए ताकि नई व्यवस्था के साथ चुनाव कराए जा सकें। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अंत में कहा कि यह विधेयक सिर्फ संख्या बढ़ाने का नहीं बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का है। सरकार का प्रयास है कि देश का लोकतंत्र और मजबूत बने और हर वर्ग को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले।

Read More Here:- 

Bengal Election 2026: उत्तर बंगाल के सीमावर्ती गांवों में ‘सुरक्षा’ बना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा, बांग्लादेशी घुसपैठ से डरे हुए हैं ग्रामीण

NPCIL Recruitment 2026: न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन में 330 एग्जीक्यूटिव ट्रेनी पदों पर निकली भर्ती, ट्रेनिंग में मिलेगा 74 हजार रुपये स्टाइपेंड

Aaj Rashifal 16 April 2026: कुंभ राशि वालों को मिलेगा आकर्षक प्रस्ताव, जानें सभी राशियों का हाल

महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का दोहरा रुख, आरक्षण के पक्ष में, परिसीमन के सख्त खिलाफ

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles