West Bengal News: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है, लेकिन वोटर लिस्ट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में मतुआ, राजबंशी और मुस्लिम समुदाय के लोगों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उनके नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं।
मंगलवार को नदिया जिले के चकदह में आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि SIR प्रक्रिया के तहत राज्य में करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि खास समुदायों को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। ममता ने रैली में तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी के साथ मंच साझा किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मताधिकार के लिए सजग रहें और किसी भी डर या बहकावे में न आएं।
SIR प्रक्रिया में 91 लाख नाम हटाए गए
ममता बनर्जी ने रैली के दौरान निर्वाचन आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि SIR पूरी होने के बाद राज्य से लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया कुछ खास समुदायों को टारगेट करके की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मतुआ भाई-बहन, राजबंशी समुदाय और अल्पसंख्यक वोटर्स को चुन-चुनकर नाम काटे जा रहे हैं। यह उनके लोकतांत्रिक अधिकार पर सीधा हमला है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि तृणमूल कांग्रेस इन सभी प्रभावित लोगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके नाम बहाल कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, SIR के दौरान कई जगहों पर गरीब, महिला, किसान, अनुसूचित जाति और जनजाति के वोटर्स के नाम भी प्रभावित हुए हैं, लेकिन ममता का मुख्य फोकस मतुआ, राजबंशी और मुस्लिम समुदाय पर रहा।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से 32 लाख नाम बहाल

ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की सक्रियता और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 60 लाख मामलों में से 32 लाख नामों को फिर से वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है। उन्होंने इसे न्याय की जीत करार दिया।
उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई और कोर्ट के दखल से लाखों लोगों का वोट बच गया। लेकिन अभी भी कई मामले विचाराधीन हैं। हम इनकी भी निगरानी कर रहे हैं।” ममता ने लोगों को आश्वासन दिया कि तृणमूल कांग्रेस हर प्रभावित व्यक्ति के साथ खड़ी है और उनके नाम वापस लाने के लिए कानूनी और राजनीतिक स्तर पर प्रयास जारी रखेगी।
West Bengal News: चकदह रैली में ममता का आक्रामक रुख
नदिया जिले के नक्काशीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के पास चकदह में हुई इस रैली में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर राजनीतिक साजिश की जा रही है।
रैली में मौजूद लोगों ने ममता के आरोपों पर जोरदार समर्थन जताया। कई लोगों ने हाथ उठाकर बताया कि उनके या उनके परिवार के सदस्यों के नाम लिस्ट से गायब हो गए हैं। ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे ऐसे सभी मामलों को इकट्ठा करें और जरूरी अपील दाखिल करें।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: दो चरणों में मतदान
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जिसमें 152 सीटें शामिल हैं। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग होगी। मतगणना 4 मई 2026 को होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में Model Code of Conduct लागू हो गया है। वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर चल रही बहस अब चुनावी मुद्दा बन गई है।
मतुआ समुदाय का महत्व और आरोप
मतुआ समुदाय बांग्लादेश से आए शरणार्थियों का बड़ा हिस्सा है। यह समुदाय मुख्य रूप से नदिया, उत्तर 24 परगना और अन्य सीमावर्ती इलाकों में बसता है। पिछले चुनावों में मतुआ वोट BJP की ओर झुका था, लेकिन SIR में इन इलाकों में ज्यादा नाम कटने से सियासी हलचल मची हुई है। ममता ने कहा कि मतुआ लोगों को नया नागरिकता देने के नाम पर उनका वोट छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा- जो लोग पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, उनके वोट पर सवाल उठाया जा रहा है। यह साजिश है।
राजबंशी समुदाय उत्तर बंगाल में मजबूत है। कोचबिहार, जलपाईगुड़ी जैसे इलाकों में इनकी अच्छी संख्या है। ममता का आरोप है कि इन समुदायों को भी SIR में निशाना बनाया गया।
अल्पसंख्यक वोटर्स पर असर
ममता बनर्जी ने मुस्लिम समुदाय का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक इलाकों में नाम कटने की संख्या ज्यादा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ जगहों पर मुस्लिम वोटर्स का बड़ा प्रतिशत प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरे राज्य में एक समान नहीं है। कुछ समुदायों पर ज्यादा असर पड़ा है, जो साजिश का संकेत है।
निर्वाचन आयोग का पक्ष
निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया को पारदर्शी और जरूरी बताया है। आयोग के अनुसार, यह सफाई अभियान है जिसमें दोहरे नाम, मृतक वोटर्स और गलत जानकारी वाले नाम हटाए गए। आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद कुल 90 लाख से ज्यादा नाम हटे हैं, जिसमें न्यायिक समीक्षा के बाद 27 लाख से ज्यादा नाम कटे। आयोग ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में 700 से ज्यादा न्यायिक अधिकारियों ने काम किया और जिला स्तर पर डेटा सार्वजनिक किया गया है।
तृणमूल कांग्रेस ने SIR को “वोटर पर्ज” की साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके उन्होंने कई नाम बचाए। अब वे बाकी मामलों में भी अपील करेंगे। ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे बूथ स्तर पर प्रभावित परिवारों से संपर्क करें और उनके नाम बहाल कराने में मदद करें।
चुनावी माहौल पर असर
वोटर लिस्ट विवाद अब बंगाल की सियासत का केंद्र बन गया है। BJP और TMC के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। TMC इसे लोकतंत्र बचाने का मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्ष इसे साफ-सुथरी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। मतुआ और राजबंशी जैसे वोट बैंक पर असर पड़ने से उत्तर और दक्षिण बंगाल दोनों में सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
रैली में ममता बनर्जी ने कहा, “हम किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देंगे। हर वोटर का अधिकार सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे वोटर लिस्ट चेक करें और अगर नाम गायब हो तो तुरंत शिकायत करें। पार्टी सूत्र बताते हैं कि TMC अब पूरे राज्य में SIR प्रभावितों के लिए विशेष कैंप लगाने की योजना बना रही है।
बंगाल की राजनीति में नया मोड़
2026 के चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का यह विवाद बड़ा मुद्दा बन गया है। ममता बनर्जी का आक्रामक रुख दिखाता है कि TMC इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करेगी। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग साफ कह चुका है कि लिस्ट अब फाइनल है और चुनाव इसी के आधार पर होंगे। स्थिति अभी भी बदल सकती है क्योंकि कुछ मामलों में अपील की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है।
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