Bengal Chunav 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और तीखा टकराव शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने करीब दो दशक बाद एक बार फिर सड़क की राजनीति का सहारा लिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में उन्होंने शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजकर 15 मिनट पर कोलकाता के मध्य इलाके एस्प्लेनेड में धरना शुरू किया। धरने की पहली ही रात ममता बनर्जी ने टेंट में बिताई और TMC के अन्य नेताओं को घर भेज दिया। उन्होंने साफ कहा कि वे इस कथित षड्यंत्र को बेनकाब करके रहेंगी।
63 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम काटे गए
इस पूरे विवाद की जड़ में SIR प्रक्रिया के बाद हुई मतदाता सूची की सफाई है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी तक पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से करीब 63.66 लाख नाम हटाए जा चुके हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इस प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा करीब 60.06 लाख मतदाताओं को न्यायिक जांच के अधीन श्रेणी में रखा गया है जिनकी पात्रता का फैसला कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा।
ममता के गंभीर आरोप

धरना स्थल पर हजारों समर्थकों के बीच ममता बनर्जी ने BJP और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर बंगाली मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं और वे इस साजिश का पर्दाफाश करेंगी। ममता ने यह भी दावा किया कि संशोधित मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने ऐलान किया कि वे ऐसे मतदाताओं को जिन्हें चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया है लेकिन जो वास्तव में जीवित हैं उन्हें मंच पर लाकर दिखाएंगी।
अभिषेक बनर्जी के आरोप: मालदा और मुर्शिदाबाद पर विशेष ध्यान
TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने SIR प्रक्रिया पर और भी विशिष्ट आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मालदा के कई विधानसभा क्षेत्रों में करीब 42 प्रतिशत मतदाताओं को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है। मुर्शिदाबाद में 11 लाख से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं जबकि मालदा में 8 लाख से अधिक, उत्तर 24 परगना में लगभग 6 लाख और दक्षिण 24 परगना में करीब 5.22 लाख मामले दर्ज हैं। TMC का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक समुदायों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
आठ जिलों में न्यायिक जांच
इसी संदर्भ में राज्य के आठ जिलों में न्यायिक अधिकारियों द्वारा मामलों की जांच चल रही है। इन जिलों में उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हुगली, हावड़ा, बीरभूम, पूर्व और पश्चिम बर्दवान तथा नादिया शामिल हैं। चुनाव आयोग ने TMC के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि यह प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
चुनाव आयोग का दौरा और सियासी टकराव
ममता बनर्जी का यह धरना चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के प्रस्तावित राज्य दौरे से ठीक दो दिन पहले शुरू हुआ है जिससे राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। माना जा रहा है कि ममता का यह आंदोलन चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। BJP ने इस धरने को राजनीतिक नाटक करार दिया है। BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने तंज कसते हुए कहा कि ममता को धरने का अभ्यास करते रहना चाहिए क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद BJP सत्ता में आएगी और ममता विपक्ष की नेता बन जाएंगी।
Bengal Chunav 2026: ममता की ‘स्ट्रीट पॉलिटिक्स’ की वापसी
ममता बनर्जी की राजनीति में धरना और आंदोलन का हमेशा से विशेष महत्व रहा है। 2006 में सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो फैक्ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उन्होंने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर 25 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। उस ऐतिहासिक आंदोलन ने 2011 के विधानसभा चुनाव में TMC को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी और 34 साल के वाम शासन का अंत हुआ था। एस्प्लेनेड का यह धरना उसी स्ट्रीट पॉलिटिक्स की वापसी है जिसने ममता को एक जन नेता के रूप में स्थापित किया था। ममता ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह धरना कितने दिन चलेगा लेकिन इससे बंगाल की राजनीति में एक नया और तीखा अध्याय शुरू हो गया है।
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