Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी के अभेद्य किले को भेदने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। 14 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक विशाल रैली को संबोधित करेंगे जिसे बंगाल चुनाव में BJP के अभियान की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की पकड़ दशकों पुरानी है और उनके पास एक मजबूत चुनावी फॉर्मूला है जिसे राजनीतिक विश्लेषक ‘M’ फैक्टर कहते हैं। BJP के लिए इस फैक्टर की काट निकालना इस चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती है।
एक दशक में BJP का बढ़ा जनाधार
पश्चिम बंगाल में BJP की यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले तक पार्टी के पास बंगाल विधानसभा में महज तीन सीटें थीं। लेकिन 2021 के चुनाव में BJP ने 77 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया और खुद को ममता बनर्जी के सामने एक मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित किया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी। लोकसभा चुनावों की बात करें तो 2019 में BJP ने बंगाल की 18 सीटें जीती थीं लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या घटकर 12 रह गई।
क्या है ममता का ‘M’ फैक्टर?

ममता बनर्जी की चुनावी सफलता के पीछे जो सबसे महत्वपूर्ण कारक काम करता है उसे राजनीतिक जानकार ‘M’ फैक्टर कहते हैं। यहां M का मतलब है महिला और मुसलमान। ये दो वर्ग मिलकर ममता बनर्जी के वोट बैंक की मजबूत नींव बनाते हैं। महिला मतदाताओं के लिए ममता सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी नकद सहायता योजनाओं ने TMC की जड़ें गहरी की हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम वोट बैंक भी बंगाल की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।
BJP की महिला वोटर रणनीति
महिला वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए BJP ने बिहार और महाराष्ट्र के अनुभव से सबक लिया है। पार्टी नेताओं को पूरा भरोसा है कि बंगाल में भी BJP महिलाओं के लिए एक बड़ी आर्थिक सहायता योजना का ऐलान करेगी। यह ममता की लक्ष्मी भंडार योजना को सीधी चुनौती होगी। BJP की यह रणनीति इस सोच पर आधारित है कि अगर महिला मतदाता यह महसूस करें कि BJP सरकार उन्हें ममता सरकार से अधिक या बराबर आर्थिक लाभ देगी तो उनके वोटिंग पैटर्न में बदलाव आ सकता है।
मुस्लिम वोट बैंक – सबसे कठिन चुनौती
BJP के सामने सबसे कठिन चुनौती मुस्लिम वोट बैंक को लेकर है। पार्टी नेताओं के अनुसार बंगाल में लगभग 35 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां मुस्लिम आबादी का प्रभाव बहुत अधिक है। इन सीटों पर TMC को परंपरागत रूप से मजबूत समर्थन मिलता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर इन मुस्लिम बहुल सीटों पर वोटिंग पैटर्न में थोड़ा भी बदलाव आता है तो चुनावी नतीजों पर गहरा असर पड़ सकता है।
SIR विवाद ने गर्माया सियासी माहौल
विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर बंगाल में सियासी माहौल बेहद गर्म है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर लगातार हमला बोला है। TMC का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में छेड़छाड़ की कोशिश हो रही है, जिससे लाखों नाम काटे गए हैं। यह विवाद चुनाव से पहले दोनों पक्षों के बीच एक नया मोर्चा बन गया है।
Bengal Election 2026: 14 मार्च की रैली होगी निर्णायक
BJP ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत के लिए 14 मार्च को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में PM मोदी की विशाल रैली का आयोजन किया है। यह रैली BJP के बंगाल विजय अभियान का शंखनाद मानी जा रही है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड बंगाल की राजनीति में एक प्रतीकात्मक मैदान है और यहां बड़ी रैली करना अपने आप में एक बड़ा राजनीतिक संदेश है।
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