Jharkhand Metro Update: झारखंड के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य के तीन प्रमुख शहरों रांची, जमशेदपुर और धनबाद में जल्द ही मेट्रो रेल परियोजना शुरू होने की संभावना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए नया कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी) मांगा है। यह कदम इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार झारखंड में मेट्रो परियोजना को लेकर गंभीर है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मांग के तुरंत बाद नगर विकास एवं आवास विभाग को नया प्लान बनाने का निर्देश दिया है। विभाग ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, डेढ़ से दो माह के भीतर नया सीएमपी केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।
पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठाई थी मांग
10 जुलाई 2025 को पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से रांची समेत प्रमुख शहरों में मेट्रो रेल परियोजना की मांग की थी। यह बैठक एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। मुख्यमंत्री ने यातायात की बढ़ती समस्या और जनता की जरूरतों को केंद्र के सामने रखा।
तुरंत भेजा गया प्रस्ताव
बैठक के अगले ही दिन, यानी 11 जुलाई को मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेज दिया। यह प्रस्ताव शहरी विकास और आवास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव को प्रेषित किया गया। इस तेज कार्रवाई से झारखंड सरकार की गंभीरता का पता चलता है।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच बेहद व्यापक है। फिलहाल तीन शहरों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन भविष्य में राज्य के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों में मेट्रो रेल की सुविधा शुरू करने की योजना है।
केंद्र ने पुराना सीएमपी नहीं माना उपयुक्त
राज्य सरकार ने शुरुआत में एक दशक पहले तैयार किया गया सीएमपी केंद्र को भेजा था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस पुराने मोबिलिटी प्लान का अध्ययन करने के बाद माना कि यह अब मौजूदा जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
तीनों शहरों में तेजी से बदल रही स्थिति
पिछले दस वर्षों में रांची, जमशेदपुर और धनबाद में आबादी, वाहनों की संख्या और यातायात दबाव में भारी बदलाव आया है। शहरीकरण की रफ्तार तेज हुई है और सड़कों पर वाहनों की भीड़ कई गुना बढ़ गई है। पुराना सीएमपी इन बदलावों को सही तरीके से नहीं दर्शाता था।
इसलिए केंद्र ने झारखंड से नया और अद्यतन सीएमपी तैयार कर भेजने को कहा है। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने आश्वासन दिया है कि डेढ़ से दो माह में केंद्र को नया सीएमपी बनाकर भेज दिया जाएगा।
कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान क्या है?
सीएमपी एक आधारभूत दस्तावेज है जिसके बिना मेट्रो या किसी भी रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की मंजूरी संभव नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक व्यापक योजना होती है जो शहर की पूरी गतिशीलता को समझती है।
सीएमपी में क्या शामिल होता है?
सीएमपी में शहर की मौजूदा और भावी यातायात व्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। इसमें सड़क नेटवर्क, ट्रैफिक दबाव, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता, निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, जाम की समस्या, प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन होता है।
इन्हीं आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर तय होता है कि मेट्रो किन रूटों पर सबसे उपयुक्त होगी। साथ ही परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता का भी आकलन किया जाता है। केंद्र इसी नए सीएमपी के आधार पर तीनों शहरों में मेट्रो के परिचालन पर अंतिम निर्णय लेगी।
रांची मेट्रो का प्रस्तावित रूट

रांची में 16.2 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन प्रस्तावित है। यह तीव्र पारगमन प्रणाली शहर के प्रमुख इलाकों को जोड़ेगी। इसका स्वामित्व और संचालन राज्य द्वारा संचालित झारखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के पास होगा।
पहले चरण का रूट
मेट्रो रेल दो रूटों पर चलने की उम्मीद है। पहले चरण के लिए रूट 1ए और 1बी प्रस्तावित है। यह कचहरी चौक और स्टेडियम से होते हुए रातू रोड से हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) लिमिटेड के पास स्टेशन प्वाइंट 17 तक जाएगी।
इस रूट में कुल 17 स्टेशन होंगे: रातू रोड, कचहरी चौक, स्टेडियम, सर्जना चौक, सुजाता चौक, आरओबी चौक, राजेंद्र चौक, विवेकानंद चौक, हटिया रेलवे स्टेशन चौक, धुर्वा गोलचक्कर चौक और अंत में HEC लिमिटेड स्टेशन।
दूसरे चरण का विस्तार
दूसरे चरण में रांची मेन रोड होते हुए लक्ष्मी नगर से नामकुम के बीच मेट्रो रेल सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। दो मेट्रो लाइनों का जंक्शन रेलवे फ्लाईओवर और रांची मुख्य सड़क जंक्शन पर होगा। इससे यात्रियों को आसानी से एक लाइन से दूसरी लाइन में बदलने की सुविधा मिलेगी।
जमशेदपुर और धनबाद के लिए भी योजना
जमशेदपुर झारखंड का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर है। यहां टाटा स्टील का विशाल कारखाना है और लाखों लोग रोजाना आवागमन करते हैं। धनबाद कोयला उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है।
तीनों शहरों की जरूरत
नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने हाल ही में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर राज्य में मेट्रो सेवा के लिए सहयोग मांगा था। पत्र में स्पष्ट किया गया कि झारखंड में शहरीकरण तेजी से हो रहा है, लेकिन उस हिसाब से सार्वजनिक परिवहन और शहरी बुनियादी ढांचे का विकास नहीं हो पाया है।
मौजूदा परिवहन व्यवस्था अब बढ़ते ट्रैफिक दबाव के लिए पर्याप्त नहीं है। मंत्री ने मेट्रो प्रोजेक्ट को झारखंड की शहरी जरूरतों के लिए एक क्रांतिकारी पहल बताया और केंद्र से विशेष सहयोग की अपील की।
प्रदूषण और बढ़ती आबादी बड़ी चुनौती
रांची, जमशेदपुर और धनबाद में तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या
धनबाद विशेष रूप से वायु प्रदूषण से जूझ रहा है। कोयला खनन और बड़ी संख्या में डीजल वाहनों के कारण यहां की हवा की गुणवत्ता खराब है। रांची और जमशेदपुर में भी स्थिति चिंताजनक है। सर्दियों के महीनों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है।
मेट्रो रेल सेवा शुरू होने से न केवल ट्रैफिक समस्या में कमी आएगी, बल्कि प्रदूषण भी घटेगा। लोगों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
मेट्रो परियोजना के फायदे
मेट्रो रेल परियोजना को रांची, जमशेदपुर और धनबाद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह केवल यातायात सुविधा नहीं है, बल्कि शहरी विकास का एक व्यापक माध्यम है।
रोजगार सृजन
मेट्रो परियोजना निर्माण के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। इंजीनियर, मजदूर, तकनीशियन और अन्य कर्मचारियों की बड़ी संख्या में जरूरत होगी। परिचालन शुरू होने के बाद भी स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
आर्थिक प्रगति
मेट्रो स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी। दुकानें, रेस्तरां और अन्य सेवाएं विकसित होंगी। संपत्ति की कीमतें बढ़ेंगी और क्षेत्र का समग्र आर्थिक विकास होगा। शहर की कनेक्टिविटी बेहतर होने से निवेश आकर्षित होगा।
समय की बचत
मेट्रो से यात्रा करने पर समय की भारी बचत होगी। जाम में फंसे रहने के बजाय लोग तय समय पर अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। यह एक साथ बड़ी संख्या में यात्रियों को सफर की सुविधा देती है।
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट की योजना
राज्य सरकार इस परियोजना के अंतर्गत ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) को भी अपनाने का विचार कर रही है। यह एक आधुनिक शहरी नियोजन की अवधारणा है।
TOD क्या है?
ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट में मेट्रो स्टेशनों के आसपास उच्च घनत्व वाला विकास किया जाता है। इससे भूमि का बेहतर उपयोग होता है। आवासीय, व्यावसायिक और सेवा क्षेत्र सभी स्टेशनों के पास विकसित होते हैं, जिससे लोगों को दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह मॉडल विश्वभर में सफल रहा है। पटना और भुवनेश्वर जैसे शहरों में मेट्रो रेल की सफलता यह साबित करती है कि यह व्यवस्था द्वितीय श्रेणी के शहरों में भी शहरी परिवहन को नई दिशा दे सकती है।
मेट्रो रेल नीति 2017 के मापदंड
झारखंड सरकार मेट्रो रेल नीति 2017 के सभी मापदंडों को पूरा करने के लिए तैयार है। केंद्र सरकार ने मेट्रो परियोजनाओं के लिए एक व्यापक नीति बनाई है जो सभी राज्यों के लिए लागू होती है।
नीति के प्रमुख प्रावधान
इस नीति में कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (सीएमपी), सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और मूल्य अधिग्रहण वित्तपोषण (वीसीएफ) जैसे विकल्प शामिल हैं। ये सभी विकल्प परियोजना की सफलता में सहायक हो सकते हैं।
राज्य सरकार ने इन तीनों शहरों में मेट्रो परियोजना के कार्यान्वयन, व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) और मार्ग निर्धारण (एलाइनमेंट सर्वे) कराने का अनुरोध किया है। साथ ही केंद्र से आग्रह किया गया है कि वह इस परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करे।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की तैयारी
जैसे ही केंद्र सीएमपी को मंजूरी देगा, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम शुरू होगा। DPR में परियोजना के हर पहलू का विस्तृत विवरण होता है।
DPR में क्या होगा?
DPR में मेट्रो लाइन के सटीक रूट, स्टेशनों की संख्या और स्थान, तकनीकी विवरण, अनुमानित लागत, निर्माण की समयसीमा और वित्तीय योजना शामिल होगी। इसमें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और भूमि अधिग्रहण की जानकारी भी दी जाएगी।
DPR को केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। IDFC जैसी संस्थाओं ने पहले भी रांची के लिए DPR तैयार किया था।
चार हजार करोड़ का निवेश
रांची शहर में 16 किलोमीटर लंबी मेट्रो परियोजना में चार हजार करोड़ रुपये का निवेश होना है। यह एक विशाल परियोजना है जो राज्य के इतिहास में सबसे बड़ी शहरी परिवहन परियोजनाओं में से एक होगी।
एशियन डेवलपमेंट बैंक की भूमिका
झारखंड सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक से वित्तीय सहायता की मांग की है। यह अंतर्राष्ट्रीय संस्था झारखंड सरकार के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दे चुकी है।
एशियन डेवलपमेंट बैंक के मनीला स्थित मुख्यालय की हाई पावर टीम ने झारखंड का दौरा किया था। पांच से सात जुलाई तक इस टीम ने मेट्रो परियोजना के प्रस्ताव की समीक्षा की और अधिकारियों की ओर से दिए गए प्रेजेंटेशन को देखा।
रांची आई टीम ने मेट्रो परियोजना को एशियन डेवलपमेंट बैंक के मानदंडों पर खरा बताया है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि परियोजना के लिए फंडिंग मिल सकती है।
पांच प्रमंडलीय शहरों तक विस्तार की योजना
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच बेहद दूरदर्शी है। फिलहाल तीन शहरों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन भविष्य की योजना और भी बड़ी है।
सभी प्रमंडलों में मेट्रो
मुख्यमंत्री का मानना है कि भविष्य में राज्य के सभी पांच प्रमंडलीय शहरों में मेट्रो रेल की सुविधा शुरू की जा सकती है। इनमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद के अलावा दुमका और पलामू भी शामिल हो सकते हैं।
यह परियोजना झारखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। यह राज्य को आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में एक बड़ा कदम आगे ले जाएगी। अगर यह योजना सफल होती है, तो झारखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां व्यापक मेट्रो नेटवर्क है।
पटना मेट्रो से प्रेरणा
पड़ोसी राज्य बिहार की राजधानी पटना में मेट्रो रेल परियोजना का पहला चरण अपने अंतिम दौर में है। यह झारखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
Jharkhand Metro Update: पटना मॉडल की सफलता
पटना मेट्रो की सफलता ने यह साबित किया है कि छोटे और मध्यम आकार के शहरों में भी मेट्रो परियोजना सफलतापूर्वक चलाई जा सकती है। यह आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो सकती है और लोगों को बेहतर सेवा दे सकती है।
झारखंड सरकार पटना और भुवनेश्वर के अनुभवों से सीख ले रही है। इन शहरों में हुई गलतियों से बचने और सफलताओं को दोहराने की कोशिश की जा रही है।
आगे की राह
नया सीएमपी तैयार होने के बाद केंद्र द्वारा मंजूरी मिलने पर मेट्रो परियोजना की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि अगले छह महीने में परियोजना को स्वीकृति मिल जाएगी।
चुनौतियां
परियोजना के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। भूमि अधिग्रहण एक बड़ा मुद्दा हो सकता है। शहरों में मेट्रो लाइन के लिए जगह की कमी है। कई इलाकों में घनी आबादी है और लोगों को विस्थापित करना मुश्किल होगा।
वित्तीय व्यवस्था भी एक चुनौती है। हालांकि एशियन डेवलपमेंट बैंक ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन पूरी राशि की व्यवस्था करना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार को भी अपना हिस्सा देना होगा।
सकारात्मक संकेत
लेकिन सभी संकेत सकारात्मक हैं। केंद्र सरकार ने नया सीएमपी मांगकर अपनी गंभीरता दिखाई है। राज्य सरकार पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है। जनता में भी उत्साह है।
नगर विकास प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मजबूत पैरवी के बाद रांची, जमशेदपुर और धनबाद में मेट्रो रेल परियोजना को लेकर केंद्र ने सकारात्मक पहल की है।



