Top 5 This Week

Related Posts

पश्चिम बंगाल में माइक्रो-ऑब्जर्वर्स विवाद, ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए सवाल, 8100 क्यों सिर्फ बंगाल में?

SIR in West Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को लेकर विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद पेश होकर चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि अन्य राज्यों में माइक्रो-ऑब्जर्वर्स नहीं लगाए गए, तो बंगाल में ही 8100 क्यों तैनात किए गए? ममता ने कहा कि असम में भी चुनाव होने वाले हैं, वहां ऐसा क्यों नहीं हो रहा। चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि बंगाल सरकार ने पर्याप्त एसडीएम रैंक के अधिकारी नहीं दिए, इसलिए माइक्रो-ऑब्जर्वर्स लगाने पड़े। यह मामला 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा रहा है।

ममता बनर्जी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सिर्फ बंगाल को निशाना बना रहा है। अन्य आठ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में भी SIR चल रही है, लेकिन वहां माइक्रो-ऑब्जर्वर्स नहीं हैं। बंगाल में 8100 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स तैनात किए गए हैं। ममता ने कहा कि ये ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों के सरकारी कर्मचारी हैं। उनका मकसद मतदाता सूची में बदलाव करके बंगाल के लोगों के साथ अन्याय करना है।

माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का काम क्या है?

चुनाव आयोग ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया कि बंगाल में तैनात 8100 माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का ठीक-ठीक काम क्या है। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के निर्देश के अनुसार, इनका काम मतदाताओं द्वारा भरे फॉर्म की जांच करना, जमा दस्तावेज देखना और उन मतदाताओं की सुनवाई का अवलोकन करना है जिन्हें पात्रता साबित करने के लिए नोटिस भेजा गया है। ये माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ईआरओ या ओईआरओ के लॉग-इन पर कंट्रोल लेकर डेटा संशोधित कर रहे हैं। ममता बनर्जी का आरोप है कि यह काम रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 के तहत सिर्फ ईआरओ या ओईआरओ का है।

चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और मतदाता सूची मैनुअल 2023 के पैरा 11.4.7 के तहत अधिकारियों की नियुक्ति का हवाला दिया। आयोग का कहना है कि अगर पर्याप्त अधिकारी नहीं हैं तो तहसीलदार या समकक्ष रैंक के लोगों को लगाया जा सकता है। बंगाल में एसडीएम रैंक के अधिकारी कम होने से यह कदम उठाया गया।

ममता बनर्जी के मुख्य आरोप

SIR in West Bengal - WB CM Mamata Banerjee
SIR in West Bengal – WB CM Mamata Banerjee

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने ईआरओ की शक्तियां खत्म कर दी हैं। पहले फेज में 58 लाख नाम डिलीट कर दिए गए। कई जीवित लोगों को मृत बताकर नाम काटे गए। ममता ने चुनाव आयोग को “व्हाट्सएप कमीशन” कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये माइक्रो-ऑब्जर्वर्स भाजपा शासित राज्यों से लाए गए हैं और मतदाता सूची को गलत तरीके से प्रभावित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह कार्रवाई हो रही है। असम में भी चुनाव हैं, वहां एसआईआर क्यों नहीं? ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को कई पत्र लिखे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया राज्य के अधिकारों और लोकतंत्र के लिए खतरा है। बंगाल में SIR से 140 लोगों की जान गई है।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया। आयोग ने कहा कि बंगाल सरकार ने पर्याप्त एसडीएम या क्लास-2 अधिकारी ईआरओ के रूप में नहीं दिए। सिर्फ 80 अधिकारी उपलब्ध हुए। इसलिए माइक्रो-ऑब्जर्वर्स लगाने पड़े। ये केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और बैंकों के कर्मचारी हैं। आयोग ने ममता के आरोपों को खारिज किया।

आयोग ने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था खराब है। SIR के दौरान अधिकारियों पर हिंसा और धमकी हो रही है। कई माइक्रो-ऑब्जर्वर्स ने ड्यूटी छोड़ दी। फरक्का में 55 ने सामूहिक रूप से काम छोड़ने का फैसला किया। आयोग ने CAPF सुरक्षा की मांग की। आयोग का कहना है कि ममता के बयान भड़काऊ हैं।

SIR प्रक्रिया में क्या हो रहा है?

पश्चिम बंगाल में SIR नवंबर 2025 से चल रही है। मतदाता सूची में बदलाव हो रहा है। ड्राफ्ट सूची में कई नामों पर सवाल उठे। 1.36 करोड़ नामों में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी है। 63 लाख मामलों में सुनवाई बाकी है। आयोग ने कहा कि हर वैध मतदाता का नाम रहना चाहिए। लेकिन ममता का आरोप है कि लाखों नाम बिना ठीक प्रक्रिया के कट रहे हैं।

पहले माइक्रो-ऑब्जर्वर्स सिर्फ मतदान के दिन लगते थे। मतदाता सूची संशोधन में कभी नहीं। पूर्व सीईसी ओ.पी. रावत ने भी पुष्टि की कि ऐसा पहली बार हुआ है। मैनुअल में सिर्फ चुनाव पर्यवेक्षक और ईआरओ का जिक्र है।

SIR in West Bengal: राजनीतिक प्रभाव और आगे क्या?

यह विवाद 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। टीएमसी का कहना है कि SIR से वैध मतदाता बाहर हो रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई फरवरी में होगी।

ममता बनर्जी ने कोर्ट से लोकतंत्र बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। आयोग ने कहा कि हर वैध नागरिक का नाम रहेगा। मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं।

यह पूरा विवाद मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। बंगाल में SIR से लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles