Jharkhand News: झारखंड में खुदरा शराब की कुल 1343 दुकानों का भविष्य आज तय होने वाला है। इन दुकानों के नवीनीकरण के लिए लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 7 फरवरी 2026 है। शनिवार शाम तक यह साफ हो जाएगा कि कितनी दुकानें लाइसेंस शुल्क जमा कर नवीनीकृत होंगी और कितनी सरेंडर मानी जाएंगी। जो दुकानें शुल्क नहीं जमा करेंगी, उन्हें सरेंडर मानकर 31 मार्च 2026 के बाद झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के अधीन चली जाएंगी।
उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस शुल्क जमा न करने वाली दुकानों का संचालन जेएसबीसीएल खुद करेगा या लाटरी प्रक्रिया से नई बंदोबस्ती करेगा। राज्य में यह प्रक्रिया नई शराब नीति के तहत हो रही है। एक सितंबर 2025 से ये दुकानें निजी हाथों में संचालित हो रही हैं। अब 2026-27 के लिए नवीनीकरण का समय आ गया है।
कुल 1343 दुकानों में कितनी देसी और कंपोजिट

झारखंड में कुल 1343 खुदरा शराब दुकानें हैं। इनमें 159 दुकानें केवल देसी शराब की हैं। बाकी 1184 दुकानें कंपोजिट हैं, जहां देसी और विदेशी दोनों तरह की शराब बिकती है। ये दुकानें पूरे राज्य में फैली हुई हैं। रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे-छोटे जिलों तक ये दुकानें चल रही हैं।
नई नीति के तहत दुकानों का संचालन निजी व्यापारियों को सौंपा गया है। इससे पहले जेएसबीसीएल के माध्यम से दुकानें चलती थीं। अब निजी संचालक लाइसेंस शुल्क जमा कर दुकानें चला रहे हैं। लेकिन कई व्यापारी नई शर्तों से परेशान हैं। कुछ दुकानें घाटे में चल रही हैं। ऐसे में कई व्यापारी दुकान सरेंडर करने पर विचार कर रहे हैं।
लाइसेंस शुल्क जमा न करने पर क्या होगा
उत्पाद विभाग के अनुसार, 7 फरवरी तक लाइसेंस शुल्क जमा न करने वाली दुकानें सरेंडर मानी जाएंगी। इन दुकानों का लाइसेंस रद्द हो जाएगा। 31 मार्च 2026 के बाद ये दुकानें जेएसबीसीएल के नियंत्रण में आ जाएंगी। जेएसबीसीएल इन दुकानों की फिर से बंदोबस्ती के लिए लाटरी प्रक्रिया शुरू करेगा। लाटरी से नई दुकानें आवंटित की जाएंगी। अगर लाटरी से बंदोबस्ती नहीं हुई तो जेएसबीसीएल खुद इन दुकानों का संचालन करेगा।
यह व्यवस्था राज्य सरकार की नई शराब नीति का हिस्सा है। सरकार का मकसद राजस्व बढ़ाना और अवैध शराब पर रोक लगाना है। विभाग ने हाल ही में शराब व्यापारी संघ के साथ बैठक की थी। बैठक में नवीनीकरण की नई शर्तें तय हुईं। बैंक गारंटी की जगह अब डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) से शुल्क जमा होगा। इससे व्यापारियों को कुछ राहत मिली है।
पिछले साल की नीति और बदलाव
एक सितंबर 2025 से झारखंड में शराब दुकानों का संचालन निजी हाथों में आया। इससे पहले जेएसबीसीएल प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से दुकानें चलवाता था। लेकिन मैनपावर एजेंसियों पर गबन के आरोप लगे। एजेंसियों ने भी जेएसबीसीएल पर बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाया। एक जुलाई 2025 से दुकानें जेएसबीसीएल के माध्यम से चलीं। सात महीने बीत गए, लेकिन प्लेसमेंट एजेंसियों की देनदारी अभी तक तय नहीं हुई है।
नई नीति में दुकानों का आवंटन ई-लाटरी से होता है। पिछले साल 560 ग्रुप में दुकानें बांटी गईं। आवेदन ऑनलाइन लिए गए। अब नवीनीकरण के लिए भी समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि शराब बिक्री से ज्यादा राजस्व आए। चालू वित्तीय वर्ष में 4000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था।
व्यापारियों की परेशानी और सरेंडर की आशंका
झारखंड शराब व्यापारी संघ के सदस्यों ने बताया कि कई दुकानें घाटे में चल रही हैं। नई नीति से कुछ दुकानों पर बोझ बढ़ गया है। उच्च लाइसेंस शुल्क, कम बिक्री और अवैध शराब की वजह से व्यापारी परेशान हैं। कुछ दुकानें सरेंडर करने का फैसला कर सकती हैं। खासकर छोटे जिलों और ग्रामीण इलाकों की दुकानें प्रभावित हैं।
रांची में कुछ ग्रुप की दुकानें पहले ही सरेंडर हो चुकी हैं। जहां आवेदन नहीं आए, वहां नई नीति का असर दिख रहा है। विभाग ने अवैध शराब रोकने के लिए टास्क फोर्स गठित की है। लेकिन व्यापारी कहते हैं कि वैध दुकानों की समस्या भी हल होनी चाहिए।
सरकार की योजना और राजस्व लक्ष्य
झारखंड सरकार शराब बिक्री से राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही है। जेएसबीसीएल थोक आपूर्ति का काम देखता है। खुदरा बिक्री निजी व्यापारियों को सौंपी गई है। सरेंडर हुई दुकानों को लाटरी से नए व्यापारियों को दिया जाएगा। इससे नए लोग कारोबार में आएंगे। सरकार का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व में इजाफा होगा।
उत्पाद विभाग ने सभी दुकान मालिकों को सूचित किया है कि समय पर शुल्क जमा करें। अन्यथा दुकान सरेंडर मानी जाएगी। शाम तक विभाग के पास आंकड़े आ जाएंगे। कितनी दुकानें नवीनीकृत हुईं और कितनी सरेंडर हुईं, यह साफ हो जाएगा।
Jharkhand News: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
शराब नीति के जानकारों का कहना है कि नई व्यवस्था से राज्य को फायदा होगा। लेकिन व्यापारियों को राहत देने की जरूरत है। अगर ज्यादा दुकानें सरेंडर हुईं तो जेएसबीसीएल पर बोझ बढ़ेगा। विभाग को लाटरी जल्दी करनी होगी। अवैध शराब पर सख्ती बरती जाए तो वैध दुकानों की बिक्री बढ़ेगी।
झारखंड में शराब दुकानों का यह फैसला महत्वपूर्ण है। आज शाम तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। व्यापारी और विभाग दोनों नजरें लगाए हुए हैं।



