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झारखंड में अप्रैल तक लागू होंगे नए लेबर कोड, श्रमिकों को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा, नियोजकों पर बढ़ेगा बोझ

Jharkhand News: झारखंड सरकार ने श्रम क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार प्रमुख लेबर कोड को लागू करने के लिए अप्रैल 2026 तक नियमावलियाँ तैयार करने जा रही है। यह जानकारी शनिवार को झारखंड विधानसभा में प्रस्तुत झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025-26 में सामने आई। इस रिपोर्ट में इन चारों श्रम संहिताओं के संभावित प्रभाव, फायदे और इनके रास्ते में आने वाली चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ये चारों लेबर कोड झारखंड के श्रम बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राज्य की आर्थिक संरचना जिसमें खनन, इस्पात और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख भूमिका है, उन पर इन कोड का सीधा और व्यापक असर पड़ने वाला है।

चार लेबर कोड, चार बड़े बदलाव

केंद्र सरकार ने कुल चार श्रम संहिताएं लागू की हैं जिन्हें झारखंड में भी अमल में लाया जाना है। ये हैं वेतन संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता 2020। इन चारों कोड का मकसद दशकों पुराने जटिल श्रम कानूनों को सरल, पारदर्शी और समावेशी बनाना है।

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक वेतन संहिता 2019 के तहत किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत बेसिक पे होना अनिवार्य होगा। इसका सबसे बड़ा असर उन सेक्टरों पर पड़ेगा जहाँ कुल मुआवजे में भत्तों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन क्षेत्रों में नियोजकों की वेज कॉस्ट यानी वेतन खर्च करीब आठ से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसका सबसे सीधा असर झारखंड की माइनिंग, स्टील और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पर पड़ेगा।

असंगठित कामगारों को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा की छतरी

नए लेबर कोड का सबसे बड़ा सामाजिक लाभ असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों को मिलने वाला है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और असंगठित कामगारों को पहली बार सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में लाया जाएगा। यह झारखंड जैसे राज्य के लिए बेहद जरूरी कदम है जहाँ बड़ी तादाद में अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक किसी भी सुरक्षा कवच से वंचित हैं।

इसके अलावा ग्रेच्युटी पाने की पात्रता की समय सीमा पाँच साल से घटाकर एक साल किए जाने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि जो कर्मचारी एक साल से ज्यादा समय तक किसी संस्थान में काम करेगा, वह ग्रेच्युटी का हकदार होगा। साथ ही पूरे देश में ईएसआईसी कवरेज का विस्तार किया जाएगा जिससे झारखंड के अधिकांश अनौपचारिक कार्यबल को औपचारिक ढाँचे में लाने की बड़ी उम्मीद है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि अकेले राज्य के कोयला क्षेत्र में 85,000 से अधिक औपचारिक कामगार हैं और इनसे जुड़ा अनौपचारिक निर्भर कार्यबल इस संख्या का लगभग ढाई गुना है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार इन लाखों परिवारों की जीवनदशा बदल सकता है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी जोर

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता 2020 के तहत खतरनाक उद्योगों में 40 वर्ष से अधिक आयु के कामगारों के लिए अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट और सालाना स्वास्थ्य जाँच अनिवार्य की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे बीमारियों की जल्द पहचान होगी और लंबे समय में कार्यस्थल की परिस्थितियों में सुधार आएगा। खनन जैसे खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के लिए यह प्रावधान जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

चुनौतियाँ भी हैं कम नहीं

हालाँकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि इन सुधारों को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। जब तक राज्य में प्रत्येक कोड के तहत नियमावलियाँ अधिसूचित नहीं हो जातीं, तब तक नियोजकों को एक साथ दो व्यवस्थाओं यानी पुराने और नए कानूनों का पालन करना होगा। इससे अनिश्चितता का माहौल बनेगा जो खासतौर पर हस्तशिल्प, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को प्रभावित कर सकता है क्योंकि ये उद्योग पहले से कम मार्जिन पर काम करते हैं।

दूसरी बड़ी चुनौती है राज्य के दूरदराज आदिवासी इलाकों तक इन नए कानूनों की पहुँच सुनिश्चित करना। इन क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा के नियमों को पहुँचाने के लिए भारी निवेश और प्रशासनिक तंत्र की जरूरत होगी।

जागरूकता अभियान जरूरी, डिजिटल पोर्टल की दरकार

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य सरकार को स्पष्ट सुझाव दिए गए हैं। पहला, नियमावलियाँ तय समय में अधिसूचित की जाएं। दूसरा, एक एकीकृत डिजिटल कंप्लायंस पोर्टल विकसित किया जाए ताकि नियोजक और कामगार दोनों आसानी से नियमों का पालन कर सकें। तीसरा, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि नए लेबर कोड का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि अगर इन सुझावों पर ईमानदारी से अमल हो तो नए लेबर कोड झारखंड की अधिक समावेशी और मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव बन सकते हैं।

Jharkhand News: श्रम बाजार में नए युग की दस्तक

कुल मिलाकर झारखंड में नए लेबर कोड का लागू होना श्रम सुधारों की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा। एक तरफ जहाँ कामगारों को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलेंगी, वहीं नियोजकों को अनुपालन के बढ़े हुए बोझ का सामना करना पड़ेगा। इस संतुलन को साधना ही राज्य सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। अप्रैल 2026 की समयसीमा अब बस कुछ ही हफ्ते दूर है और देखना होगा कि सरकार इस चुनौती को कितनी कुशलता से पार करती है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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