पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को विधानसभा भवन में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग आने वाले 10 वर्षों में दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। इस दौरान उन्होंने सदन में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल पर नाराजगी जताई और इसे अनुशासनहीनता करार दिया।
विधानसभा सत्र के दौरान जब राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायक सुदय यादव अपने मोबाइल फोन से नोट्स देखकर एक पूरक प्रश्न पूछ रहे थे, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आपा खो दिया। उन्होंने सदन के अध्यक्ष नंद किशोर यादव से आग्रह किया कि सदन में मोबाइल फोन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पहले सदन में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध था और इसे फिर से लागू किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की इस मांग पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को “संरक्षणवादी” करार देते हुए कहा कि वह आधुनिक राजनीति के अनुकूल नहीं हैं। तेजस्वी यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, “सदन को पेपरलेस बनाने के लिए ऑनलाइन प्रश्नों का उत्तर देने की व्यवस्था की गई है। यदि कोई सदस्य पूरक प्रश्न पूछना चाहता है, तो उसे मोबाइल या टैबलेट देखकर ही पूछना होगा। लेकिन बिहार के कंप्यूटर-अनभिज्ञ मुख्यमंत्री को इससे भी समस्या है।”
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने भी मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उन्हें उपचार कराना चाहिए। तेजस्वी यादव ने आगे कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बिहार को ऐसा रूढ़िवादी और पुराने विचारों वाला मुख्यमंत्री मिला है, जो प्रौद्योगिकी, युवाओं, छात्रों और महिलाओं का विरोध करता है। यह निंदनीय है!”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह टिप्पणी और विपक्ष की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध की उनकी मांग को कितना समर्थन मिलता है।

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