Jharkhand Nikay Chunav: मानगो नगर निगम चुनाव में राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। विकास के मुद्दों को पीछे छोड़ते हुए अब व्यक्तिगत आरोप और चरित्र हनन की राजनीति हावी हो गई है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के बीच चल रही इस जंग ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। दोनों नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है और स्थानीय मतदाता इस कीचड़ उछाल की राजनीति से परेशान हैं।
बन्ना गुप्ता ने उठाए निजी सवाल
यह विवाद बुधवार को तब शुरू हुआ जब पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सरयू राय के निजी जीवन पर सीधा हमला किया। बन्ना गुप्ता ने जिसे आपरेशन सिंदूर का नाम दिया, उसमें सरयू राय की व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े सवाल उठाए।
बन्ना गुप्ता ने सार्वजनिक मंच से कहा कि सरयू राय जिस महिला के साथ सालों से रामार्चा पूजा में बैठते हैं, उनके बारे में अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ते। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि अगर रिश्ता इतना गहरा है तो सरयू राय उस महिला की मांग में सिंदूर क्यों नहीं भर देते और उन्हें समाज में पत्नी का दर्जा क्यों नहीं देते।
सरयू राय का करारा जवाब

गुरुवार को सरयू राय ने बन्ना गुप्ता के आरोपों का चुन-चुनकर जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति हर नारी को केवल देह की दृष्टि से देखता हो, उससे मर्यादा की उम्मीद करना ही बेमानी है। सरयू राय ने स्पष्ट किया कि मधु और उनका पूरा शिक्षित परिवार जिसमें माता, बेटा और बेटी शामिल हैं, उनके साथ रहता है।
रामार्चा पूजा पर सफाई
सरयू राय ने रामार्चा पूजा को लेकर विस्तार से सफाई दी। उन्होंने कहा कि वे रामार्चा पूजा में बैठते हैं और पंडित पूजा कराते हैं। संकल्प के समय कई महिलाएं मौजूद रहती हैं। यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसे बन्ना गुप्ता की विकृत सोच ने गलत रंग दे दिया। राय ने कहा कि बेहुदगी की भी एक सीमा होती है और बन्ना गुप्ता ने वह सीमा पार कर दी है।
पुराने वीडियो का जिक्र
सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को आईना दिखाते हुए उनका वह विवादित वीडियो याद दिलाया जो विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले सामने आता था। राय ने तीखा हमला करते हुए कहा कि बन्ना गुप्ता को उस वीडियो वाली महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि सच्चाई सबके सामने है।
मेयर पति बनने की आरोप
सरयू राय ने बन्ना गुप्ता पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि बन्ना गुप्ता मेयर पति बनकर नगर निगम के पैसों को लूटने की फिराक में हैं। इसी बौखलाहट में वे मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और ऐसे निराधार आरोप लगा रहे हैं। सरयू राय का कहना है कि सत्ता और पैसे की लालच में बन्ना गुप्ता किसी भी हद तक जा सकते हैं।
विकास के मुद्दे हुए गायब
मानगो नगर निगम चुनाव में मूल रूप से स्थानीय विकास के मुद्दे होने चाहिए थे। सड़कों की हालत, पानी की व्यवस्था, सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बहस होनी चाहिए थी। लेकिन दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत आरोपों की इस जंग ने सभी विकास के मुद्दों को पीछे धकेल दिया है। अब चुनावी रैलियों और सभाओं में विकास की बात कम और व्यक्तिगत आरोप ज्यादा सुनाई देते हैं।
स्थानीय मतदाताओं और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
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मतदाता: मानगो क्षेत्र के स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे इस तरह की कीचड़ उछाल की राजनीति से तंग आ चुके हैं।
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विश्लेषक: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पूरा विवाद चुनावी राजनीति का सबसे निचला स्तर है। जब नेताओं के पास विकास के मुद्दे नहीं होते तो वे व्यक्तिगत हमले का सहारा लेते हैं।
Jharkhand Nikay Chunav: चुनाव आयोग की भूमिका
ऐसे आरोपों के बाद सवाल उठता है कि क्या चुनाव आयोग को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। आचार संहिता के तहत व्यक्तिगत हमले से बचना चाहिए। कुछ स्थानीय सामाजिक संगठनों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह दोनों नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करे।
आगे क्या होगा: अब देखना यह है कि मानगो की इस चुनावी जंग में आखिर में किसका पलड़ा भारी होता है। क्या मतदाता इस व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति को स्वीकार करेंगे या वे विकास के मुद्दों पर वोट देंगे। पूरा झारखंड इस चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहा है।



