Jharkhand Politics: झारखंड में खनन परियोजनाओं से प्रभावित विस्थापितों की समस्याओं को लेकर गठित कांग्रेस जांच समिति का बड़कागांव और केरेडारी का दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। राज्य कैबिनेट की अचानक बैठक बुलाए जाने के कारण पांच फरवरी को होने वाला यह निरीक्षण स्थगित कर दिया गया। हालांकि समिति ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा दो से तीन दिनों के भीतर नई तिथि तय करके किया जाएगा। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में विस्थापन से जुड़े मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाया जाएगा।
हजारीबाग और रामगढ़ के विस्थापितों की समस्या
हजारीबाग जिले के बड़कागांव और केरेडारी प्रखंड तथा रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में खनन परियोजनाओं से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों में कोयला खनन और बिजली परियोजनाओं के कारण स्थानीय लोगों को अपनी जमीन और घर छोड़ने पड़े हैं। लेकिन विस्थापितों को उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल पाया है।
इन समस्याओं को देखते हुए झारखंड कांग्रेस ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। इस समिति को विस्थापितों की समस्याओं की जांच करने और समाधान के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
कैबिनेट बैठक के कारण टला दौरा

बुधवार को रांची में झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू और जांच समिति के संयोजक तथा मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद भी शामिल हुए।
बैठक में बड़कागांव, केरेडारी और पतरातू क्षेत्र में खनन कंपनियों द्वारा विस्थापितों के कथित शोषण और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान यह जानकारी मिली कि गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक होने वाली है। इस कारण पांच फरवरी को प्रस्तावित बड़कागांव और केरेडारी का दौरा टालना पड़ा।
कांग्रेस प्रभारी ने की विस्तृत समीक्षा
कांग्रेस प्रभारी के राजू ने विस्थापन से जुड़ी गंभीर समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि गठित जांच समिति गुरुवार को कांग्रेस मुख्यालय रांची में आंतरिक बैठक करे। के राजू ने जांच समिति को यह भी निर्देश दिया कि राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव रखने की रणनीति तैयार की जाए।
कैबिनेट में उठाया जाएगा मुद्दा
बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि गुरुवार को होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र की विस्थापन संबंधी समस्याओं को औपचारिक रूप से उठाया जाएगा। कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण मुद्दे रखे जाने की योजना है, जिनमें शामिल हैं:
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भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का प्रभावी क्रियान्वयन।
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विस्थापन आयोग की भूमिका।
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स्थानीय मजदूरों को एचपीसी नियमों के तहत उचित भुगतान।
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पतरातू विद्युत निगम लिमिटेड और पतरातू छाई डैम से जुड़े मुद्दे।
भूमि अधिग्रहण कानून का क्रियान्वयन
कांग्रेस का कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में विस्थापितों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई प्रावधान हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इनका ठीक से पालन नहीं हो रहा है। पार्टी चाहती है कि राज्य सरकार इस कानून के सख्त क्रियान्वयन के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाए।
स्थानीय मजदूरों को भुगतान का मुद्दा
जांच समिति को यह भी जानकारी मिली है कि खनन परियोजनाओं में काम करने वाले स्थानीय मजदूरों को उचित वेतन नहीं मिल रहा है। एचपीसी (हायर पर्चेज सिस्टम) के तहत जो नियम बनाए गए हैं उनका भी पालन नहीं हो रहा।
पतरातू परियोजनाओं से जुड़ी समस्याएं
रामगढ़ जिले के पतरातू क्षेत्र में विद्युत निगम लिमिटेड और छाई डैम परियोजनाओं से भी हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। पतरातू छाई डैम के कारण कई गांवों की जमीन प्रभावित हुई है लेकिन प्रभावित परिवारों को कोई विकल्प नहीं दिया गया।
दो-तीन दिन में होगा दौरा
जांच समिति ने स्पष्ट किया है कि कैबिनेट बैठक से संबंधित पत्र मिलने के बाद दौरा स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भरोसा दिलाया है कि कैबिनेट में मुद्दे रखने के तुरंत बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया जाएगा। दौरे की नई तिथि दो से तीन दिनों के भीतर तय कर दी जाएगी।
विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी
प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के बाद जांच समिति एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट कांग्रेस प्रभारी के राजू के माध्यम से राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। इसके बाद त्रिपक्षीय वार्ता यानी सरकार, कंपनियों और विस्थापितों के बीच बातचीत के जरिए ठोस निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।
Jharkhand Politics: कांग्रेस की प्रतिबद्धता
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि विस्थापितों की समस्याओं का समाधान पार्टी की प्राथमिकता है। पार्टी विस्थापितों के हक और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेगी। जांच समिति के गठन से यह साफ हो गया है कि पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।



