West Bengal Chunav News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं। चुनाव आयोग ने इस बार बंगाल में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल बैठक में चुनाव आयोग के नुमाइंदे ने कई अहम जानकारियां साझा कीं। बैठक में बताया गया कि इस बार बंगाल में ऑब्जर्वरों यानी पर्यवेक्षकों की संख्या में बड़ा इजाफा किया जाएगा। साथ ही चुनाव से पहले वोटरों के लिए एक सप्लीमेंटरी लिस्ट भी लाई जाएगी। इस बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल और विशेष रोल ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता भी मौजूद थे।
सूत्रों की मानें तो बंगाल विधानसभा चुनाव का आधिकारिक एलान 16 मार्च तक हो सकता है और अप्रैल में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है। वोटर लिस्ट से लेकर मतगणना तक का पूरा ब्लूप्रिंट चुनाव आयोग ने तैयार कर लिया है। इस बार चुनाव आयोग की पूरी कोशिश है कि बंगाल में जो भी शिकायतें और विवाद पिछले चुनावों में सामने आए थे उनकी पुनरावृत्ति न हो। इसीलिए इस बार हर स्तर पर पहले से ज्यादा सख्त तैयारी की जा रही है।
West Bengal Chunav News: ऑब्जर्वरों की संख्या में होगा बड़ा इजाफा
इस बार बंगाल चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव ऑब्जर्वरों की संख्या में देखने को मिलेगा। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक सामान्य पर्यवेक्षकों की संख्या पिछली बार के 160 से बढ़ाकर इस बार करीब 294 करने की तैयारी है। यानी लगभग दोगुने ऑब्जर्वर इस बार बंगाल में तैनात होंगे।
इसके पीछे का मकसद एकदम साफ है। आयोग इस बार हर एक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक अलग पर्यवेक्षक नियुक्त करने की योजना पर काम कर रहा है। बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं और अगर हर सीट पर एक पर्यवेक्षक हो तो हर बूथ और हर इलाके पर नजर रखना बहुत आसान हो जाएगा। पिछले चुनावों में यह शिकायत रही है कि एक ऑब्जर्वर के पास कई-कई विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी होने से नजर रखना मुश्किल हो जाता था। इस बार वो कमी दूर होगी।
सिर्फ सामान्य पर्यवेक्षक ही नहीं बल्कि व्यय पर्यवेक्षकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। पिछली बार 84 व्यय पर्यवेक्षक थे जिनकी संख्या इस बार बढ़ाकर करीब 100 करने की बात है। व्यय पर्यवेक्षक चुनाव में होने वाले खर्च पर नजर रखते हैं और काले धन के इस्तेमाल को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। पैसों से मतदाताओं को प्रभावित करने की शिकायतें बंगाल में पहले भी आती रही हैं इसलिए इस बार व्यय पर्यवेक्षकों की बढ़ी हुई संख्या एक मजबूत रोक का काम करेगी।
सबसे बड़ा बदलाव पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या को लेकर है। 2021 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में 37 पुलिस ऑब्जर्वर तैनात थे। इस बार यह संख्या दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है। यानी 74 से 111 तक पुलिस ऑब्जर्वर बंगाल में तैनात हो सकते हैं। पुलिस पर्यवेक्षकों की यह बढ़ी हुई संख्या मतदान के दौरान किसी भी हिंसा या गड़बड़ी को रोकने में बेहद कारगर साबित होगी।
वोटरों के लिए आएगी सप्लीमेंटरी लिस्ट, सॉफ्टवेयर में भी होंगे जरूरी बदलाव

बैठक में एक और अहम जानकारी सामने आई। चुनाव आयोग मतदान से पहले वोटरों के लिए एक सप्लीमेंटरी लिस्ट लाने पर काम कर रहा है। यह सप्लीमेंटरी लिस्ट उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जिनके नाम मुख्य वोटर लिस्ट में किसी वजह से नहीं आ पाए।
बंगाल में SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर पहले से ही काफी विवाद है। TMC का आरोप है कि लाखों असली वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। ऐसे में सप्लीमेंटरी लिस्ट लाना उन वोटरों के लिए एक मौका होगा जो मुख्य लिस्ट में जगह नहीं पा सके। इसके प्रकाशन और सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलावों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी योग्य मतदाता अपने वोट के अधिकार से वंचित न रहे।
रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त, 294 सीटों पर तैनाती, 16 मार्च तक हो सकता है चुनाव का एलान
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकारियों को राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त करने का निर्देश दे दिया है। इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दी गई है। इस बार कई जगहों पर सब-डिविजनल ऑफिसर, जिला स्तरीय अधिकारी और दूसरे सीनियर प्रशासनिक अधिकारी रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी संभालेंगे।
रिटर्निंग ऑफिसर चुनाव प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी होते हैं। नामांकन से लेकर मतगणना तक हर काम इन्हीं की देखरेख में होता है। सीनियर और अनुभवी अधिकारियों को यह जिम्मेदारी देने से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता दोनों सुनिश्चित होगी।
सूत्रों के मुताबिक बंगाल विधानसभा चुनाव का एलान 16 मार्च तक हो सकता है और अप्रैल में मतदान होने की उम्मीद है। बंगाल चुनाव हमेशा से देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील चुनावों में गिना जाता है। इस बार ऑब्जर्वरों की बढ़ी हुई संख्या, सप्लीमेंटरी वोटर लिस्ट और रिटर्निंग ऑफिसरों की नियुक्ति जैसे कदम साफ बताते हैं कि चुनाव आयोग इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में है।



