Jharkhand News: झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम लिमिटेड के समक्ष बकायेदारों का संकट गंभीर रूप लेता जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन ही सबसे बड़ी बकायेदार के रूप में सामने आई है। इस पर 280 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है और यदि भुगतान नहीं किया गया तो शीघ्र ही कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
विशाल बकाया राशि का संकट
हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन प्रतिमाह 80 से 90 लाख रुपये की बिजली की खपत करता है। परंतु आश्चर्यजनक रूप से यह संस्थान बिजली बिल के भुगतान में एक रुपया भी नहीं दे रहा है। परिणामस्वरूप बकाया राशि निरंतर बढ़ती जा रही है। वर्तमान में यह बकाया 280 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और यदि यही स्थिति बनी रही तो शीघ्र ही यह 350 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।
यह स्थिति झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। एक सरकारी उपक्रम द्वारा दूसरे सरकारी संस्थान के बिलों का भुगतान न करना प्रशासनिक समन्वय की कमी को दर्शाता है।
रांची एरिया बोर्ड की आपात बैठक

शुक्रवार को रांची एरिया बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें इस गंभीर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में एरिया बोर्ड के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने स्पष्ट किया कि इतनी विशाल राशि को लंबे समय तक अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह बकाया सीधे तौर पर राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर कर रहा है।
महाप्रबंधक ने बताया कि इस बैठक में केवल एक ही प्रमुख एजेंडा पर केंद्रित चर्चा हुई – बड़े बकायेदारों से बिजली बिल की वसूली करना और यदि आवश्यक हो तो उनके बिजली कनेक्शन काटना। यह निर्णय दर्शाता है कि अब निगम कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है।
बैठक में रांची एरिया बोर्ड के सभी कार्यपालक अभियंता उपस्थित थे। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब संबंध बनाए रखने की नीति को छोड़कर बकायेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए और आवश्यकता पड़ने पर बिजली कनेक्शन काटे जाएं।
मुफ्त बिजली योजना से उत्पन्न वित्तीय संकट
स्थिति को और जटिल बनाने वाला तथ्य यह है कि राज्य सरकार द्वारा घोषित 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पिछले चार महीनों से झारखंड बिजली वितरण निगम को भुगतान नहीं मिल रहा है। इसका सीधा प्रभाव यह हुआ है कि निगम बिजली उत्पादन कंपनियों को समय पर भुगतान करने में असमर्थ हो गया है।
निगम पर एनटीपीसी का लगभग 450 करोड़ रुपये और दामोदर घाटी निगम का करीब 300 करोड़ रुपये बकाया है। यह कुल मिलाकर 750 करोड़ रुपये की विशाल राशि है। यदि यह भुगतान लंबे समय तक लंबित रहा तो राज्य में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यह स्थिति दर्शाती है कि लोकलुभावन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान न होने पर पूरी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
रांची में व्यापक वसूली अभियान की तैयारी
महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने स्पष्ट किया कि निर्बाध बिजली आपूर्ति तभी संभव है जब उपभोक्ता समय पर बिजली बिल का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार निगम की जिम्मेदारी निरंतर बिजली प्रदान करने की है, उसी प्रकार उपभोक्ताओं की भी जिम्मेदारी है कि वे समय पर बिलों का भुगतान करें।
रांची रिंग रोड के अंदर उच्च वोल्टेज उपभोक्ताओं की संख्या 90 हजार है। इनसे बकाया वसूली के लिए 21 से 23 जनवरी के बीच एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान सुनियोजित तरीके से विभिन्न डिवीजनों में चरणबद्ध रूप से संचालित होगा।
सर्वप्रथम वेस्ट डिवीजन में वसूली अभियान शुरू होगा और अंत में कोकर डिवीजन में इसे लागू किया जाएगा। यह रणनीतिक योजना दर्शाती है कि निगम इस बार गंभीरता से बकाया वसूली के लिए प्रतिबद्ध है।
मीटर संबंधी अनियमितताएं
बैठक में यह भी सामने आया कि अनेक स्थानों पर बिना मीटर के बिजली उपयोग हो रहा है या फिर खराब मीटर लगे हुए हैं। महाप्रबंधक ने निर्देश दिए कि इन सभी मामलों की जांच की जाए और त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को सुधारा जाए।
खराब मीटरों की समस्या बिजली चोरी और राजस्व की हानि का एक प्रमुख कारण है। इसलिए इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सभी डिवीजनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र में मीटर की स्थिति का सर्वेक्षण करें और आवश्यक सुधार करें।
राज्य की बिजली व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव
यह पूरा प्रकरण झारखंड की बिजली वितरण व्यवस्था की गंभीर समस्याओं को उजागर करता है। एक ओर जहां राज्य सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर बिजली वितरण कंपनी वित्तीय संकट से जूझ रही है।
हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन जैसी प्रमुख सार्वजनिक इकाई द्वारा बिल भुगतान न करना अन्य उपभोक्ताओं के लिए गलत संदेश देता है। यदि सरकारी संस्थान ही बिल नहीं चुकाएंगे तो आम उपभोक्ताओं से नियमित भुगतान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
Jharkhand News: आगे की राह
इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को गंभीर कदम उठाने होंगे। सबसे पहले हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन के बकाया भुगतान के लिए तत्काल व्यवस्था करनी होगी। साथ ही मुफ्त बिजली योजना के लिए निगम को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना होगा।
बिजली वितरण निगम को भी अपनी वसूली प्रणाली को मजबूत करना होगा। नियमित निगरानी, त्वरित बिल जारी करना और बकायेदारों के विरुद्ध समयबद्ध कार्रवाई आवश्यक है।
यदि यह समस्या शीघ्र हल नहीं हुई तो राज्य में बिजली संकट उत्पन्न हो सकता है। एनटीपीसी और डीवीसी जैसी बिजली उत्पादन कंपनियां लंबे समय तक बकाया भुगतान की प्रतीक्षा नहीं करेंगी और वे आपूर्ति कम कर सकती हैं।
झारखंड की बिजली व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी पक्ष – सरकार, बिजली वितरण निगम और उपभोक्ता – अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।



